{"_id":"5896c98e4f1c1bf340e82972","slug":"jat-reservation-haryana-inld-abhay-chautala-yashpal-malik","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जाट आंदोलन: धरने पर पहुंचे अभय चौटाला, बोले- नहीं चलने देंगे विधानसभा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जाट आंदोलन: धरने पर पहुंचे अभय चौटाला, बोले- नहीं चलने देंगे विधानसभा
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
Updated Sun, 05 Feb 2017 05:42 PM IST
विज्ञापन
धरने पर पहुंचे अभय चौटाला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईक्कस गांव में जाट आरक्षण आंदोलन के धरने पर पहुंचे विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों की मांगें नहीं मानी गईं तो 27 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान सदन को नहीं चलने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बार-बार जाटों को आरक्षण देने की बात कही, हमेशा धोखा ही मिला। उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री की अध्यक्षता में जाट समिति की बैठक हुई तथा सभी मांगों को मान लिया, लेकिन कोई भी मांग पूरी नहीं की गई।
हमारे पास अकड़ बची है, वह भी चली गई तो कहीं ओर जाना पड़ेगा
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जून में मुख्यमंत्री ने कहा था कि वे धरना देने वालों की अकड़ निकाल देंगे। इस पर चुटकी लेते हुए चौटाला ने कहा कि जाटों की जमीन तो पिछली सरकारों ने ही छीन ली थी। नौकरियां अब हैं नहीं। यदि अकड़ भी चली गई तो फिर कहीं ओर जाकर रहना पड़ेगा।
आज समाप्त होगी धरने की स्वीकृति
धरने के लिए प्रशासन द्वारा की गई स्वीकृति का भी रविवार को अंतिम दिन है। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल के अनुसार, उन्होंने अनिश्चित कालीन धरने के लिए आवेदन किया है। अब प्रशासन को देखना है कि आगे की स्वीकृति देता है या नहीं। धरना हर हाल में जारी रहेगा। वहीं, डीसी विनय सिंह ने कहा कि सशर्त धरने को स्वीकृति दी गई है। फिलहाल पांच फरवरी तक की स्वीकृति है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हमारे पास अकड़ बची है, वह भी चली गई तो कहीं ओर जाना पड़ेगा
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जून में मुख्यमंत्री ने कहा था कि वे धरना देने वालों की अकड़ निकाल देंगे। इस पर चुटकी लेते हुए चौटाला ने कहा कि जाटों की जमीन तो पिछली सरकारों ने ही छीन ली थी। नौकरियां अब हैं नहीं। यदि अकड़ भी चली गई तो फिर कहीं ओर जाकर रहना पड़ेगा।
विज्ञापन
आज समाप्त होगी धरने की स्वीकृति
धरने के लिए प्रशासन द्वारा की गई स्वीकृति का भी रविवार को अंतिम दिन है। संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल के अनुसार, उन्होंने अनिश्चित कालीन धरने के लिए आवेदन किया है। अब प्रशासन को देखना है कि आगे की स्वीकृति देता है या नहीं। धरना हर हाल में जारी रहेगा। वहीं, डीसी विनय सिंह ने कहा कि सशर्त धरने को स्वीकृति दी गई है। फिलहाल पांच फरवरी तक की स्वीकृति है।
विज्ञापन
विरोध करने वाले नेता धरनों पर जाकर मांगे माफी
'सीएम को नहीं हरियाणवी संस्कृति की जानकारी'
- फोटो : अमर उजाला
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से ईक्कस गांव में जारी धरने में शनिवार को समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक पहुंचे। यशपाल मलिक के आगमन के कार्यक्रम से यहां अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही।
यशपाल मलिक ने कहा कि भाजपा और पार्टी की सरकार ने प्रदेश का भाईचारा बिगाड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को डराने का काम कर रही है। मलिक ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के बारे में कहा कि यदि सरकार रासुका लगाती है तो लोग जनता सुरक्षा कानून (जसुका) लगा देंगे। इस पर लोगों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया। मलिक ने कहा कि सरकार कहती है कि आरक्षण का मामला अदालत में है।
इसके अलावा भी छह मांगें हैं, जो सरकार को पूरी करनी है। मलिक ने कहा कि राज्य का आरक्षण अदालत में विचाराधीन है, लेकिन केंद्र का आरक्षण तो मोदी की अदालत में है। उसे तो बहाल किया जाए। इस दौरान यशपाल मलिक ने धरने का समर्थन नहीं करने वाले जाट नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने 50 सांड छोड़ रखे हैं, उनके साथ 51वां आदमी नहीं है।
12 से बढ़ सकते हैं धरने
यशपाल मलिक ने कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो 12 फरवरी से धरनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। धरने कितने होंगे और कहां-कहां होंगे, इसका फैसला जिला स्तर पर किया जाएगा। वहीं, 19 फरवरी को पिछले साल के आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में बलिदान दिवस मनाया जाएगा।
यशपाल मलिक ने कहा कि भाजपा और पार्टी की सरकार ने प्रदेश का भाईचारा बिगाड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को डराने का काम कर रही है। मलिक ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के बारे में कहा कि यदि सरकार रासुका लगाती है तो लोग जनता सुरक्षा कानून (जसुका) लगा देंगे। इस पर लोगों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया। मलिक ने कहा कि सरकार कहती है कि आरक्षण का मामला अदालत में है।
इसके अलावा भी छह मांगें हैं, जो सरकार को पूरी करनी है। मलिक ने कहा कि राज्य का आरक्षण अदालत में विचाराधीन है, लेकिन केंद्र का आरक्षण तो मोदी की अदालत में है। उसे तो बहाल किया जाए। इस दौरान यशपाल मलिक ने धरने का समर्थन नहीं करने वाले जाट नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने 50 सांड छोड़ रखे हैं, उनके साथ 51वां आदमी नहीं है।
12 से बढ़ सकते हैं धरने
यशपाल मलिक ने कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो 12 फरवरी से धरनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। धरने कितने होंगे और कहां-कहां होंगे, इसका फैसला जिला स्तर पर किया जाएगा। वहीं, 19 फरवरी को पिछले साल के आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में बलिदान दिवस मनाया जाएगा।