'चाहे जान देनी पड़े पर जाट आरक्षण जरूर लेंगे'
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्रीय सेवाओं में खत्म किए गए जाटों के आरक्षण के फैसले का भारी विरोध शुरू हो गया है। जाट नेताओं का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें आरक्षण मिला था, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराशा हाथ लगी है। हम रिव्यू पिटिशन फाइल करेंगे और फुल बेंच के सामने मामले को ले जाएंगे।
नेताओं ने यह भी कहा कि जब कांग्रेस ने आरक्षण देने का फैसला किया और भाजपा सरकार ने उसका समर्थन किया तो आरक्षण गलत कैसे हो सकता है। आरक्षण के लिए चाहे हमें नए सिरे से लड़ाई लड़नी पड़े तो हम लड़ेंगे, अपनी जान की बाजी भी लगानी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे। इसके लिए 22 मार्च को जींद में पंचायत बुलाई गई है, जहां आगे की रणनीति पर निर्णय होगा।
रिव्यू पिटिशन होगी फाइल
जाट आरक्षण रद करने पर फतेहाबाद में सर्व जाट खाप पंचायत के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूबे सिंह समैण ने कहा कि न्यायालय के फैसले से जाटों में रोष है। ऐसा महसूस होता है कि हमारे साथ अन्याय हुआ है। सूबे सिंह मंगलवार को जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सर्व जाट खाप फैसले को चुनौती देगी और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन डालेंगे। जिसकी रणनीति बनाने के लिए 22 मार्च को अर्बन स्टेट जींद में जाटों की पंचायत बुलाई गई है।
सूबे सिंह ने कहा कि जाटों को आरक्षण के लिए नए सिरे से जमीनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी तो उसकी भी रणनिति बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बैकवर्ड क्लास कमीशन ने हमारे खिलाफ केंद्र सरकार को रिपोर्ट दी थी।
केंद्र सरकार ने उसे अमान्य करार देते हुए जाटों के आरक्षण को उचित बताया था। तत्कालीन केंद्र सरकार ने 9 राज्य के जाटों को ओबीसी में शामिल किया था। समैण ने बताया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर करके यूपीए सरकार के फैसले को सही ठहराया था।
केंद्र के सोलिटर जनरल ने इस फैसले की पैरवी की थी। दोनों सरकारों की सहमति होने के बावजूद भी सर्वोच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि 22 मार्च को जाटों की पंचायत में सड़कों पर उतरने का फैसला लिया जाएगा। कहा कि आरक्षण के लिए अगर हमें अपनी जान की बाजी भी लगानी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।
खापों ने खुलकर किया फैसले का विरोध
अखिल भारतीय जाट आरक्षण महासभा के प्रांतीय प्रधान ओमप्रकाश मान का कहना है कि इस फैसले से समाज खिन्न हुआ है। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ फुल बेंच में जाएंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार ने फैसला लिया था और एनडीए ने भी समर्थन दिया।
अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि यह पता लगाए कि कहां गलती रही और गलती को ठीक कराने का फर्ज भी केंद्र सरकार का बनता है। पहले सरकार को मौका देंगे, फिर आगे की रणनीति तय की जाएगी। महासभा अपने स्तर पर भी पूरे मामले की स्टडी करेगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को जाटों को केंद्रीय नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण को निरस्त किए जाने के फैसले पर जींद/नरवाना में खापों ने भी विरोध जताया है। जाट नेताओं के साथ ही खापों ने भी आरक्षण की बहाली के लिए फिर से आंदोलन करने फैसला लिया है। सर्वजाट खाप पंचायत के प्रधान नफे सिंह नैन और कंडेल खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने बताया कि केंद्र में आरक्षण रद्द होने के फैसले से जाट समुदाय के लोग बहुत ही दुखी हैं।
जाट आरक्षण हर प्रकार से न्याय संगत है। यहां तक कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए केंद्र में जाट आरक्षण को सही ठहराया है। इसके बाद भी जो फैसला आया है, उसका अध्ययन किया जाएगा और जो भी आगे कि रणनीति होगी, उसकी घोषणा 22 मार्च की मीटिंग में की जाएगी।
इससे पहले हुए आंदोलन में भी जींद केंद्रीय भूमिका में रहा है। प्रदेश में आरक्षण मिलने का ऐतिहासिक समझौता प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं के बीच जींद में ही हुआ था। ऐसे में फिर से जींद आरक्षण का केंद्र बन सकता है।