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जाट आरक्षण पर लगी रोक नहीं हटी, सुनवाई फिर टली और इस वजह से

Thu, 17 Nov 2016 11:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 17 Nov 2016 11:52 AM IST
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jat reservation case hearing in punjab haryana highcourt
जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत - फोटो : amar ujala
हरियाणा में जाटों सहित 6 जातियों को नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए दिए गए आरक्षण पर 30 नवंबर तक रोक जारी रहेगी।
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बुधवार को याची पक्ष की ओर से दो घंटे आरक्षण के विरोध में दलील देते हुए कहा गया कि यदि सामाजिक और शैक्षणिक दोनों रूप से पिछड़े हों तो ही आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

जिन 6 जातियों को आरक्षण का लाभ दिया गया है, उनके समाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के आंकड़े ही एकत्रित नहीं किए गए, ऐसे में यह आरक्षण गलत है।

दो घंटे की दलीलों के बाद भी याची का पक्ष पूरा न होने पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 30 नवंबर तक टाल दी। इसके साथ ही आरक्षण पर लगी रोक भी अब 30 नवंबर तक जारी रहेगी।
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मामला हरियाणा में जाटों सहित 6 जातियों को दिए गए आरक्षण से जुड़ा है। हरियाणा सरकार ने एक्ट के माध्यम से जाटों सहित 6 जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। इसको चुनौती देते हुए मुरारी लाल गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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याचिका में दी गई ये दलीलें, जिन पर हुई सुनवाई

jat reservation case hearing in punjab haryana highcourt
जाट आरक्षण को लेकर सोनीपत में महापंचायत - फोटो : amar ujala
याचिका में कहा गया था कि किसी भी स्थिति में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। हरियाणा सरकार ने इन 6 जातियों को आरक्षण देने के लिए न तो कोई सर्वे करवाया न ही सरकार के पास कोई आंकड़े हैं। ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार की ओर से दिया गया आरक्षण लाभ गलत है। हरियाणा सरकार ने केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरक्षण दिया है, जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।

हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद इन 6 जातियों को दिए गए आरक्षण लाभ पर रोक लगा दी थी। इसके बाद हरियाणा सरकार और जाट नेताओं ने अपनी दलीलें हाईकोर्ट के समक्ष रखी थीं। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब हाईकोर्ट में याची पक्ष की दलीलें सुनी जा रही हैं। बुधवार को याची पक्ष की ओर से कहा गया कि यदि अतिविशेष परिस्थितियां हो तो ही आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया जा सकता है परंतु यहां ऐसा नहीं था।

वहीं, संविधान में व सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न जजमेंट में यह स्पष्ट है कि यदि किसी जाति को आरक्षण दिया जाना है तो इसके लिए आंकड़ों को एकत्रित करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं किया गया और जिस केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को मानने से सुप्रीम कोर्ट इंकार कर चुका है, उसी को आधार बनाते हुए राज्य में आरक्षण का लाभ दे दिया गया है।
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