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जाट आंदोलनः हिंसा के सुबूतों की दोबारा जांच करेगी पुलिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Mon, 09 May 2016 10:30 AM IST
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उपद्रव करने वाले दो आरोपियों के फोटो जारी
- फोटो : amarujala
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव और हिंसा के आरोप में गिरफ्तारियों और कार्रवाई पर एतराज जताने वाले जाट प्रतिनिधियों को गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया है कि आला पुलिस अफसर उपद्रव और हिंसा तथा आगजनी से जुड़े सुबूतों की दोबारा जांच करेंगे। आरक्षण आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों पर गृह विभाग के सचिव के समक्ष जाट प्रतिनिधियों ने वीरवार को अपना पक्ष रखा। सचिव के साथ जाट युवा एकता मंच की बैठक तीन घंटे तक चली। इस बीच निर्दोषों पर दर्ज मामले वापस लेने और सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रमुखता से मांग की गई।
सचिव ने प्रतिनिधियों को विश्वास दिलाया कि महज मोबाइल कॉल डिटेल्स और लोकेशन के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी। बैठक के दौरान मंच ने गिरफ्तार लोगों की सूची भी सौंपी। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास के साथ बैठक के दौरान कुछ बिंदुओं पर गृह विभाग का रुख सकारात्मक रहा, लेकिन कुछ पर सहमति नहीं बन सकी।
सीएम से मुलाकात के लिए मांगा वक्त :
मंच के सदस्यों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात के लिए वक्त मांगा है, जिस पर गृह विभाग की ओर से उन्हें जल्द मुलाकात का आश्वासन दिया गया है। बैठक के बाद मंच के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात होने तक शांतिपूर्ण धरना जारी रखने की बात कही। जाट युवा एकता मंच के विनीत धनखड़ ने बताया कि उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं थीं। इनमें आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई, सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा, निर्दोष के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग प्रमुख थीं। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल्स के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया और उनकी गिरफ्तारियां भी की गई है। बैठक के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि अगर कुछ मामलों में दोबारा साक्ष्यों की जांच करने की जरूरत हुई तो ऐसा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी निर्दोष पर कार्रवाई हुई है तो जांच के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा।
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सेना की कार्रवाई में मृत लोगों को मुआवजा नहीं मिल सकता :
मुआवजे के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि सुरक्षा बलों या सेना की कार्रवाई में मृत लोगों को मुआवजा नहीं मिल सकता है, इस बारे में सरकार का नजरिया साफ है। बावजूद इसके मंच की ओर से अनुकंपा के आधार पर परिजनों को मुआवजा देने की मांग को लेकर वे सरकार से विचार विमर्श करेंगे। गृह विभाग की ओर से जाट प्रतिनिधियों से किसी भी स्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाने की अपील की गई है। बैठक में गृह विभाग के आला अधिकारी वजीर सिंह गोयत भी मौजूद रहे।
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सचिव ने प्रतिनिधियों को विश्वास दिलाया कि महज मोबाइल कॉल डिटेल्स और लोकेशन के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी। बैठक के दौरान मंच ने गिरफ्तार लोगों की सूची भी सौंपी। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास के साथ बैठक के दौरान कुछ बिंदुओं पर गृह विभाग का रुख सकारात्मक रहा, लेकिन कुछ पर सहमति नहीं बन सकी।
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सीएम से मुलाकात के लिए मांगा वक्त :
मंच के सदस्यों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात के लिए वक्त मांगा है, जिस पर गृह विभाग की ओर से उन्हें जल्द मुलाकात का आश्वासन दिया गया है। बैठक के बाद मंच के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात होने तक शांतिपूर्ण धरना जारी रखने की बात कही। जाट युवा एकता मंच के विनीत धनखड़ ने बताया कि उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं थीं। इनमें आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई, सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा, निर्दोष के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग प्रमुख थीं। उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल्स के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया और उनकी गिरफ्तारियां भी की गई है। बैठक के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि अगर कुछ मामलों में दोबारा साक्ष्यों की जांच करने की जरूरत हुई तो ऐसा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी निर्दोष पर कार्रवाई हुई है तो जांच के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा।
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सेना की कार्रवाई में मृत लोगों को मुआवजा नहीं मिल सकता :
मुआवजे के बारे में अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि सुरक्षा बलों या सेना की कार्रवाई में मृत लोगों को मुआवजा नहीं मिल सकता है, इस बारे में सरकार का नजरिया साफ है। बावजूद इसके मंच की ओर से अनुकंपा के आधार पर परिजनों को मुआवजा देने की मांग को लेकर वे सरकार से विचार विमर्श करेंगे। गृह विभाग की ओर से जाट प्रतिनिधियों से किसी भी स्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाने की अपील की गई है। बैठक में गृह विभाग के आला अधिकारी वजीर सिंह गोयत भी मौजूद रहे।