जाट आंदोलन : सरकार पर बरसे मलिक, पूछा- सात मांगों पर क्या कदम उठाया
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि जाट आरक्षण के संबंध में गेंद प्रदेश सरकार के पाले में हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर करके हाईकोर्ट में समय सीमा के अंदर आरक्षण की सुनवाई की मांग करे।
साथ ही सरकार बताए कि दूसरी मांगों पर क्या होम वर्क किया है और किस मांग पर बात करना चाहती है। तभी बातचीत का फायदा होगा। यशपाल मलिक जसिया में चले रहे जाट न्याय धरने के 9वें दिन तीसरी बार पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया के अलावा लोगों को भी संबोधित किया।
मीडिया से बातचीत में यशपाल मलिक ने कहा कि 29 जनवरी से पहले सरकार ने कुछ लोगों से बयानबाजी करवाकर धरनों को फेल करने का प्रयास किया, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली।
उन्होंने दावा किया कि उनके पास पीएमओ से लेकर प्रदेश के नेताओं और अधिकारियों के दिन में दो-तीन बार फोन आते हैं। बातचीत का न्योता तो दिया जाता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि जाट समाज की सात मांगों पर क्या कदम उठाए हैं।
लोगों से मलिक की अपील-सड़क पर जाम न लगाएं
केवल यह कहा जाता है कि जाट आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है, जिसकी पैरवी सरकार कर रही है। अन्य मांगों पर जवाब नहीं मिलता है। ऐसे में बातचीत का क्या फायदा होगा।
अधिकारियों पर अंकुश लगाए सरकार : मलिक
हांसी प्रकरण पर यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारियों पर अंकुश लगाए, जो माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अंदर 9 दिन से शांतिपूर्ण धरना दिया जा रहा है। केवल सरकार तनाव में है, समाज में कोई तनाव नहीं है।
पानीपत में बदला जाएगा धरनास्थल
मलिक ने कहा कि पानीपत में गांव के अंदर धरना चल रहा है, लेकिन प्रशासन से बातचीत करके धरना उस जगह दिया जाएगा, जहां के लिए अनुमति मांगी गई थी। इसके लिए पानीपत इकाई से वहां के अधिकारियों से बातचीत करने के लिए कहा गया है।
लोगों से मलिक की अपील, सड़क पर जाम न लगाएं
जसिया धरनास्थल पर शाम छह बजे पहुंचे यशपाल मलिक ने मौजूद लोगों से कहा कि अगर कोई व्यक्ति आकर सड़क जाम करने के लिए कहे तो उसकी बातों में नहीं आना है। न अफवाह पर ध्यान देना है। केवल आंदोलन को मजबूत करना है। मांगें पूरी होने के बाद ही आंदोलन खत्म किया जाएगा, इसका पूरा भरोसा देते हैं।