Sports Industry: कभी खेलों का हब था जालंधर, आज उजड़ रहे उद्योग, सितारे भी गर्दिश में
जालंधर में क्रिकेट बैट से लेकर हॉकी, बॉक्सिंग, फुटबाल, इन लाइन स्केटिंग, वॉलीबाल सहित सभी तरह के खेलों का सामान बनता है। लोकल स्तर पर बनने वाले सामान की मांग 90 प्रतिशत कम हो गई है। जालंधर से कई बड़े स्पोर्ट्सपर्सन भी निकले।
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खेलों के आसमान पर कभी जालंधर का नाम चमकता रहा है। आज भी लोग जालंधर को स्पोर्ट्स हब के नाम से ही जानते हैं लेकिन अब न यहां खिलाड़ी निकल रहे हैं और न ही स्पोर्ट्स का कारोबार फल-फूल रहा है। जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री अर्श से फर्श तक पहुंच चुकी है। आजादी के बाद जालंधर को स्पोर्ट्स हब के रूप में देखा जाने लगा। यहां तब 8-10 स्पोर्ट्स यूनिट लग चुकी थीं। जालंधर में विकसित होने वाला स्पोर्ट्स के सामान की दुनिया भर में मांग थी लेकिन अब हालात खराब हो चुके हैं। जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को बचाने के लिए सरकार ने वादे तो किए लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ।
जालंधर में क्रिकेट बैट से लेकर हॉकी, बॉक्सिंग, फुटबाल, इन लाइन स्केटिंग, वॉलीबाल सहित सभी तरह के खेलों का सामान बनता है। लोकल स्तर पर बनने वाले सामान की मांग 90 प्रतिशत कम हो गई है। जालंधर से कई बड़े स्पोर्ट्सपर्सन निकले हैं, जिनमें क्रिकेटर हरभजन सिंह, विक्रम राठौड़, अगुराग ठाकुर, मनदीप सिंह, हॉकी में ओलंपियन सुरजीत सिंह, राष्ट्रीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह आदि शामिल हैं। तब इंडस्ट्री को सरकार की मदद के साथ स्किल्ड लेबर भी मिल जाती थी। स्पोर्ट्स हब के रूप में कभी नंबर एक पर थे लेकिन आज मेरठ है। आज व्यापारी का बेटा व्यापारी बनने के बजाय विदेश जाना चाहता है या नौकरी करना चाहता है।
बदलाव सिर्फ इश्तहारों में दिखा, इंडस्ट्री अब भी बदहाल
जालंधर की स्पोर्ट्स मार्केट स्थित धीर इंटरप्राइजेस के मालिक रविंदर धीर बताते हैं कभी विवियन रिचर्ड्स भी यहां बने बैट से खेलते थे। ग्लोबल मार्केट में पंजाब से अच्छी तो पाकिस्तान की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री है। जालंधर में तीन तरह के क्रिकेट बैट बनते हैं, पापुलर-कश्मीर और इंग्लिश व्लो, लेकिन अब सिर्फ 15 प्रतिशत यूनिट ही बची हैं। लकड़ी न आने से सारी इंडस्ट्री जेएंडके शिफ्ट हो गई और लेबर भी ले गई। स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को वैट और जीएसटी ने खा लिया। बदलाव सिर्फ इश्तहारों में ही देखने को मिल रहा है, जबकि हालत अभी बदहाल है।
जालंधर की हॉकी दुनिया में छाई, अब बनी रहस्य
मलिक हॉकी के मालिक विपिन परनीजा ने बताया कि युवाओं को इंडस्ट्री में लाने के लिए स्टाइपेंड देकर आरएनडी खोलने के लिए लोन मिलना चाहिए। पहले जालंधर में स्टेट ट्रेडिंग कंपनी (एसटीसी) विदेश से माल मंगवाती थी और जिसे जितना चाहिए होता था, व्यापारी खरीद लेता था लेकिन अब कुछ साल से एटीसी बंद है।
जालंधर के ही कुछ व्यापारियों ने विदेश से खरीदे जा रहे सामान के पैसे बढ़ा दिए तो छोटे व्यापारी खत्म हो गए। वुडन हॉकी का उत्पादन और मांग 90 फीसदी तक खत्म हो गई है। अब कंपोजिट हॉकी की डिमांड है, जो देश में कुछ ही यूनिट बनाते हैं और कच्ची सामग्री विदेश से आती है। एक समय तक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद के हाथों से स्वर्णिम इतिहास लिखने वाली जालंधर की हॉकी स्टिक आज खुद रहस्य बन गई है।
मैरीकॉम भी जेजे योनेक्स के ग्लब्ज पहनती थीं
दुनिया में ऐसा कोई खेल नहीं, जिसमें उच्च गुणवत्ता का सामान उपलब्ध कराने में जालंधर की इंडस्ट्री को याद न किया जाता हो। जालंधर के जेजे योनेक्स स्पोर्ट्स सामान विक्रेता शाम सुंदर ने कहा कि 1968 से हम स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में हैं। हमारे योनेक्स के बॉक्सिंग ग्लब्ज कभी गोल्डन गर्ल एमसी मैरीकॉम पहनती थी और आज इंडस्ट्री स्ट्रगल कर रही है। यहां निर्माण में लागत ज्यादा आ रही है और चीन का माल सस्ता है, जिसे लोग खरीद और बेच रहे हैं। सरकार को चाहिए कि चीन से आने वाले खेल के सामान को प्रतिबंधित किया जाए, ताकि हालात सुधर सकें।