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Hindi News ›   Chandigarh ›   Jagdish Jhinda arrives at Golden Temple for tankhah

जो पंथ से निष्कासित हैं, वे मुझे क्या निकालेंगे: जगदीश झींडा

Tue, 11 Apr 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Tue, 11 Apr 2017 09:15 AM IST
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Jagdish Jhinda arrives at Golden Temple for tankhah
जगदीश झींडा - फोटो : File Photo
जगदीश सिंह झींडा ने कहा है कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का मैं सेवादार (प्रधान) हूं । जो पंथ से खुद निष्कासित हैं, वे मुझे क्या निकालेंगे। श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्म से मैं श्रद्धा के साथ सेवा करने आया हूं। श्री अकाल तख्त साहिब से जारी हुक्म मुझे मान्य हैं। आरोप लगाया कि सरबत खालसा हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को दोफाड़ करने में जुटा है। 
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झींडा हरियाणा में गुरुद्वारा पर कब्जा करने के आरोपों के बाद श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बीते चार अप्रैल की मुकर्रर सजा पूरी करने सोमवार को यहां आए थे। उन्होंने एक घंटे लंगर भवन की सेवा की। श्री अकाल तख्त साहिब पर शीश झुकाया और श्री हरमंदिर साहिब में अरदास की। 
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उन्होंने कहा कि सरबत खालसा के जत्थेदार ध्यान सिंह मंड का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि असली जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह हैं। गुरु के वचन को मैं मानता हूं। मैं श्री हरमंदिर साहिब की चौखट पर सिर झुकाने आया हूं। बीते चार अप्रैल को श्री अकाल तख्त साहिब पर झींडा ने पंथ में वापसी के लिए अरदास की थी। जिसके तहत जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने उन्हें नौ अप्रैल को धार्मिक सजा सुनाई थी।
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झींडा पंथ में शामिल, किया शुकराना 

Jagdish Jhinda arrives at Golden Temple for tankhah
एचएसजीएमसी प्रधान जगदीश झींडा - फोटो : फाइल फोटो
दीदार सिंह नलवी को प्रधान बनाने पर चर्चा 
 सोमवार को जब जगदीश सिंह झींडा श्री हरमंदिर साहिब के लंगर घर में जूठे बर्तनों की सेवा कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान पद से हटाकर एचएसजीपीसी सदस्यों द्वारा दीदार सिंह नलवी को कार्यकारिणी प्रधान बनाए जाने पर चर्चा हो रही थी।
 
झींडा पंथ में शामिल, किया शुकराना 
हरियाणा गुरुघरों पर कब्जे के आरोप में जुलाई 2014 को पंथ से निष्कासित जगदीश सिंह झींडा की सोमवार को पंथ में वापसी हो गई। उन्होंने 101 रुपये का देग (प्रसाद) चढ़ाकर शुकराना किया। इसे इत्तफाक कहें या संयोग। हरियाणा के जिन गुरुद्वारों पर कब्जे को लेकर उन्हें पंथ से निष्कासित किया गया था, उन्हीं गुरुद्वारों की साज संभाल के तौर पर काम कर रहे हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचसीपीसी) ने उन्हें प्रधान पद से हटा दिया।

सोमवार को जब झींडा की पंथ में वापसी हो रही थी, तभी उन्हें प्रधान पद से हटाए जाने की खबरें भी सामने आईं। झींडा ने पंथ में शामिल होने के बाद कहा कि हर किसी से भूल हो सकती है, हमें सिख धर्म पर चलना है और श्री अकाल तख्त साहिब का हर फरमान मानना है। 
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