चंडीगढ़ निगम चुनाव: कचरे का पहाड़ बनेगा बड़ा मुद्दा, डड्डूमाजरा वासियों की दो टूक-लिखकर आश्वासन देने वाले को ही समर्थन
डंपिंग ग्राउंड का लोकसभा चुनाव में भी बड़ा मुद्दा रहा था। भाजपा, कांग्रेस, आप सहित अन्य राजनीतिक पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में डंपिंग ग्राउंड को हटाने का जिक्र किया था। यहां धरने पर बैठे लोगों को सांसद किरण खेर ने पानी पिलाकर उठाया था और इस कचरे से मुक्ति दिलाने का वादा किया था।
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चंडीगढ़ निगम चुनाव में एक बार फिर से डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा प्रत्याशी की जीत तय करेगा। हर चुनाव में डड्डूमाजरा से कचरे का पहाड़ हटाने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि जीत के बाद दिखाई नहीं देते लेकिन इस बार वार्ड-26 के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि जो प्रत्याशी कचरे के इस पहाड़ को हटाने की बात लिखकर देगा, उसे ही समर्थन दिया जाएगा। ऐसे में वार्ड-26 के उम्मीदवारों के लिए इस बार जीत की राह आसान नहीं होगी।
भाजपा ने इस बार वर्तमान पार्षद फर्मिला देवी को टिकट नहीं दिया है। उनकी जगह भाजपा ने राजेश कालिया को वार्ड-26 से प्रत्याशी बनाया है। डंपिंग ग्राउंड से निगम तक की राजनीति का सफर तय करने वाले राजेश कालिया वर्ष 2019 में मेयर चुने गए थे। उन्होंने पहले ही दिन डंपिंग ग्राउंड पर जाकर कहा था कि इस पहाड़ को यहां से हटाया जाएगा। मेयर का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्होंने बिना तैयारियों के ही कचरा निस्तारण योजना का शुभारंभ कर दिया। इसके बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब एक कचरे के पहाड़ के अलावा दूसरा भी तैयार हो गया है। लोग चिल्लाते रहे, लेकिन अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने कान और आंख बंद कर लिए। एनजीटी से दबाव पड़ा तो बहाने लगाकर मामले टालने लगे।
अब चुनाव आते ही स्थानीय लोगों ने सभी प्रत्याशियों से कह दिया है कि डंपिंग ग्राउंड कब हटेगा, इसकी तारीख लिखकर दें, हम समर्थन देने को तैयार हैं। डंपिंग ग्राउंड ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष दयाल कृष्ण का कहना है कि हर चुनाव में नेता डंपिंग ग्राउंड के कचरे के पहाड़ को हटाने का वादा करते हैं और चुनाव बाद भूल जाते हैं लेकिन इस बार जब तक लिखित में नहीं देंगे, हम वोट नहीं देंगे। नेताओं, अफसरों ने वादा किया था कि यहां एक साल में खेल का मैदान बन जाएगा, अब तक हम उसी खेल के मैदान को आज तक खोज रहे हैं। बता दें कि डंपिंग ग्राउंड के मुद्दे को लेकर 11 लोगों ने इस वार्ड से नामांकन भरा, जिनमें से सात का नामांकन स्वीकृत भी हो गया है। ऐसे में वार्ड का चुनाव काफी रोमांचक होने की उम्मीद है।
अपने ही विरोधी, राह होगी मुश्किल
राजेश कालिया बेशक वापस अपने क्षेत्र में लौटकर चुनाव लड़ने आए हों, लेकिन उनके सामने उनकी ही पार्टी से बगावत करके गए नरेंद्र चौधरी हैं। इसके अलावा तीन निर्दलीय हैं। ऐसे में भाजपा के इस सीट पर फिर से वापस काबिज होना आसान नहीं होगा। वहीं कांग्रेस ने भी गुरचरण सिंह का टिकट काटकर जतिंदर कुमार को टिकट दे दिया है। इससे मामला और पेचीदा हो गया है।
न सांसद पहुंचीं और न प्रशासक
कचरा साफ करने के कार्य के शुभारंभ के दौरान राजेश कालिया, नरेंद्र चौधरी और डंपिंग ग्राउंड ज्वाइंट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष दयाल कृष्ण एक मंच पर थे। इन्हें डंपिंग ग्राउंड से कचरा हटाने के लिए संघर्ष करने पर तत्कालीन प्रशासक ने पुरस्कृत किया था। उन्होंने मंच से कहा था कि सांसद किरण खेर प्रत्येक 15 दिन और मैं एक माह में कार्य प्रगति देखने आएंगे। एक साल बाद यहां खेल का मैदान होगा लेकिन स्थिति नहीं बदली।
लोकसभा चुनाव में भी रहा था बड़ा मुद्दा
डंपिंग ग्राउंड का लोकसभा चुनाव में भी बड़ा मुद्दा रहा था। भाजपा, कांग्रेस, आप सहित अन्य राजनीतिक पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में डंपिंग ग्राउंड को हटाने का जिक्र किया था। यहां धरने पर बैठे लोगों को सांसद किरण खेर ने पानी पिलाकर उठाया था और इस कचरे से मुक्ति दिलाने का वादा किया था। उससे पहले कांग्रेस ने कचरा निस्तारण प्लांट लगाकर इस डंपिंग ग्राउंड को हटाने का दावा किया था, लेकिन दोनों पार्टियों के घोषणा पत्र महज कागजों तक सीमित रह गए बल्कि कचरा निस्तारण प्लांट भी लोगों के लिए नासूर बन गया।
कांग्रेस की पार्षद कमलेश के कार्यकाल में डंपिंग ग्राउंड के पास थीम पार्क बना था। जहां बच्चे खेलते थे। भाजपा पार्षद फर्मिला देवी ने इस पार्क में भी कचरा डलवा दिया। हम नए सिरे से पार्क को बनाएंगे और डंपिंग ग्राउंड पर बने दोनों कचरे के पहाड़ों को हटवाएंगे। -जितेंद्र कुमार तोती, प्रत्याशी, कांग्रेस
डंपिंग ग्राउंड के सबसे ज्यादा नजदीक मेरा घर है, इसलिए मैं लोगों की पीड़ा को समझता हूं। हकीकत यह है कि भाजपा व कांग्रेस इस डंपिंग ग्राउंड को हटाना ही नहीं चाहते। हम जब धरने पर बैठे थे तब भी तीन माह में डंपिंग ग्राउंड स्थानांतरण करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। - कुलदीप ढल्होर, प्रत्याशी, आम आदमी पार्टी