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Haryana: चंडीगढ़ डिपो में हुआ था एक करोड़ का गबन; पांच साल से चल रही जांच पर... दोषियों पर नहीं आ रही आंच
Wed, 13 Dec 2023 10:42 AM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 13 Dec 2023 10:42 AM IST
सार
मिलीभगत की आशंका इस मामले में पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक न तो परिवहन विभाग की तरफ से तह तक जाने की कोशिश की गई और न ही खजाना विभाग की ओर से। क्योंकि फर्जी बिलों पर भुगतान मिलीभगत से किया गया।
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विस्तार
फर्जी बिलों के माध्यम से चंडीगढ़ रोडवेज डिपो में हुए 1.09 करोड़ रुपये के गबन में पांच साल बाद भी विभाग की जांच पूरी नहीं हो पा रही है। विभाग बार-बार जांच पर जांच बैठा रहा है।
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अब ताजा मामले में परिवहन विभाग के जांच अधिकारी ने पांच माह तक मामले की जांच की, रिपोर्ट पूरी होते ही आनन-फानन में ही विभाग ने न केवल उनको जांच कमेटी से हटा दिया, बल्कि उनके द्वारा गई जांच को भी वापस ले लिया। विभाग द्वारा बार बार जांच बदलने को लेकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
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विभागीय जांच अधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट में परिवहन विभाग के 16 और खजाना एवं लेखा विभाग के सात अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम हैं। ये वे अधिकारी व कर्मचारी हैं, जो 2015 से लेकर 2017 तक रोडवेज डिपो चंडीगढ़ और खजाना विभाग चंडीगढ़ में तैनात रहे। इसी अवधि में डिपो में बिना सामान आए ही धड़ाधड़ फर्जी बिल पास गए और उनके बदले राशि वसूली गई।
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इनमें रोडवेज के एचसीएस प्रद्युमन, एचसीएस सतीश सिंगला, जीएम आरके गोयल, वर्क्स मैनेजर सुमिंद्र सिंह, गुरमेल सिंह, रवि भूषण, रणधीर सिंह, अजमेर सिंह, हेमंत शर्मा, देवेंद्र कुमार, रजनीश, पवन कुमार, गुलजारी लाल, संजय कुमार, महेंद्र कुमार, जीत पाल के नाम शामिल हैं। वहीं, खजाना विभाग के एमके गुप्ता, रेणु सिवाच, रम्मी शयोराण मलिक, सब्बीर अहमद, विजय कुमार, अरविंद कुमार और मधुसूदन के नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि 2018 में यह मामला सामने आया था। चंडीगढ़ में केस दर्ज कर क्लर्क को गिरफ्तार किया गया था।
बार बार यूं बदली गई जांच कमेटी
इस मामले की जांच बार बार बदल रही है। शुरुआत में 7 जून, 2023 को जांच अधिकारी कृष्ण सांगवान को यह जांच सौंपी गई। 8 अगस्त को विभाग के निदेशक ने एक और जांच कमेटी बना दी। इसमें विभाग के के सीवीओ और विभाग के अतिरिक्त परिवहन निदेशक प्रदीप अहलावत के नेतृत्व में डीटीसी (डिप्टी ट्रांसपोर्ट कंट्रोलर) ट्रैफिक, डीटीसी टेक्नीकल, डीटीसी स्टोर और डीटीसी प्लानिंग के साथ-साथ विभाग के जांच अधिकारी कृष्ण सांगवान को भी शामिल किया गया। 4 सितंबर को विभाग ने फिर से जांच कमेटी को रिवाइज कर दिया और कृष्ण सांगवान को जांच कमेटी से बाहर कर दिया। इसके बाद फिर विभाग ने 4 अक्टूबर जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच को ही वापस ले लिया। अब सीवीओ वाली जांच कमेटी के पास यह मामला है।
बिना जांच के ही धड़ाधड़ पास किए बिल
मिलीभगत की आशंका इस मामले में पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक न तो परिवहन विभाग की तरफ से तह तक जाने की कोशिश की गई और न ही खजाना विभाग की ओर से। क्योंकि फर्जी बिलों पर भुगतान मिलीभगत से किया गया। बाकायदा रोडवेज के तात्कालिक जीएम द्वारा लिखित में प्रमाणित किया गया तो सामान मिल गया, जबकि असल में कोई सामान आया ही नहीं था। इसी प्रकार, खजाना विभाग के अधिकारियों ने भी बिना किसी जांच पड़ताल के ही धड़ाधड़ बिल पास किए। खास बात ये है कि विभाग ने एक बार भी इस मामले की विजिलेंस जांच के लिए नहीं लिखा।
पांच पत्रों के बाद भी खजाना विभाग ने छिपाए अधिकारियों के नाम
खास बात ये है कि इस मामले में जांच अधिकारी ने खजाना विभाग के निदेशक को पांच बार पत्र लिखे और 1 अप्रैल, 2015 से 31 जुलाई 2017 तक चंडीगढ़ स्थित खजाना कार्यालय में तैनात डिलिंग अधिकारी, सहायक खजाना अधिकारी और खजाना अधिकारियों की सूची मांगी थी। साथ ही इन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र और इस मामले में रोल के बारे में पूछा था, लेकिन एक बार भी विभाग के निदेशक ने इसका जवाब नहीं दिया। हालांकि, जांच अधिकारी ने खुद इन अधिकारियों के बारे में जानकारी जुटाई।
गड़बड़ी करने वाले नहीं बख्शे जाएंगे
हरियाणा सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम करती है। गड़बड़ी चाहे किसी छोटे या बड़े अधिकारी या कर्मचारी ने की है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में अधिकारियों के जांच रिपोर्ट तलब की जाएगी, साथ ही जिनकी भी इस मामले में मिलीभगत रही है, उससे रिकवरी कराई जाएगी। जहां तक खजाना विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत की बात है तो इस बारे में वित्त विभाग के आला अधिकारियों से जवाब लिया जाएगा। - मूलचंद शर्मा, परिवहन मंत्री, हरियाणा सरकार।