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डीएसपी, एसएचओ तक बदल गए, लेकिन जमीन में दबी लाश की अब तक नहीं हो सकी पहचान
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चंडीगढ़। बीते 18 जनवरी की शाम करीब 6 बजे पुलिस कंट्रोल रूम की घंटी बजी। एक अंजान युवती ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया के कॉलोनी नंबर-4 से सटे जंगल में एक शव के दोनों पैर और हाथ को कुत्ते नोच रहे हैं। सूचना मिलते ही महकमे में हड़कंप मचा। इसके तुरंत बाद डीएसपी हरजीत कौर, थाना प्रभारी जेडपी खान समेत अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। शव के पैर और दोनों हाथ जमीन से बाहर थे, जबकि बाकी का हिस्सा करीब 4 फुट गहरे गड्ढे में था। शव से तेज बदबू आ रही थी। फिंगर प्रिंट जब्त कर वीडियो ग्राफी करवाई गई। करीब 5 से 7 दिन पुराने शव के सिर पर गहरे जख्म के निशान थे। कयास लगाया गया कि मृतक की उम्र करीब 35 से 40 वर्ष की बीच थी।
ईस्ट डिवीजन की डीएसपी हरजीत कौर, प्रभारी जेडपी खान का मानना था कि किसी भारी हथियार से हत्या कर शव को मिट्टी में दफनाया है। शव को कब्जे में लेकर जीएमसीएच-32 में रखवा दिया गया। इंडस्ट्रियल थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूतों से छेड़छाड़) का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी। हैरानी की बात है कि शव मिलने के बाद 188 दिन बीत चुके हैं। इस बीच ईस्ट डिवीजन की डीएसपी हरजीत कौर, थाना प्रभारी जेडपी खान का तबादला भी हो गया, लेकिन स्मार्ट कही जाने वाली चंडीगढ़ पुलिस अब तक न तो मृतक की पहचान कर सकी और न ही आरोपियों तक पहुंच सकी है।
जंगल के चारों तरफ एरिया को सील किया
जिस जगह शव मिला, वहां आसपास काफी गंदगी थी। आसपास एरिया में ज्यादातर जगह कीचड़ से भरा हुआ था। कालोनी निवासी ज्यादातर लोग शौच के लिए उसी जंगल में जाते हैं। एसएसपी नीलांबरी विजय जगादले ने टीम का गठन कर कालोनी निवासी लोगों को फोटो दिखाकर मृतक की पहचान करने की कोशिश की, लेकिन पहचान नहीं हो सकी।
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सोशल मीडिया से भी पुलिस नाकाम
शव के शिनाख्त के लिए चंडीगढ़ हाईटेक पुलिस ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया, लेकिन पुलिस के हाथ ऐसा कोई ठोस सुराग नहीं लगा। वहीं, पुलिस टीम ने पंजाब, हिमाचल, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में गुमशुदगी की दर्ज रिपोर्ट को भी खंगाला। बताया गया कि शिनाख्त नहीं होने की वजह है यह भी है कि मृतक का चेहरा काफी हद तक खराब हो चुका था।
मोबाइल डंप डाटा से सुराग नहीं
शव के पहचान के लिए पुलिस ने लगभग सभी हथकंडे अपना लिए थे। इसके बाद मोबाइल डंप डाटा जब्त कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन ऐसा कोई संदिग्ध नंबर नहीं लगा, जिससे आरोपियों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल, अब यह कह पाना मुश्किल है कि मृतक की पहचान हो भी सकेगी या फिर इसे ठंडे बस्ते में बंद कर दिया गया है।
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ईस्ट डिवीजन की डीएसपी हरजीत कौर, प्रभारी जेडपी खान का मानना था कि किसी भारी हथियार से हत्या कर शव को मिट्टी में दफनाया है। शव को कब्जे में लेकर जीएमसीएच-32 में रखवा दिया गया। इंडस्ट्रियल थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूतों से छेड़छाड़) का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी। हैरानी की बात है कि शव मिलने के बाद 188 दिन बीत चुके हैं। इस बीच ईस्ट डिवीजन की डीएसपी हरजीत कौर, थाना प्रभारी जेडपी खान का तबादला भी हो गया, लेकिन स्मार्ट कही जाने वाली चंडीगढ़ पुलिस अब तक न तो मृतक की पहचान कर सकी और न ही आरोपियों तक पहुंच सकी है।
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जंगल के चारों तरफ एरिया को सील किया
जिस जगह शव मिला, वहां आसपास काफी गंदगी थी। आसपास एरिया में ज्यादातर जगह कीचड़ से भरा हुआ था। कालोनी निवासी ज्यादातर लोग शौच के लिए उसी जंगल में जाते हैं। एसएसपी नीलांबरी विजय जगादले ने टीम का गठन कर कालोनी निवासी लोगों को फोटो दिखाकर मृतक की पहचान करने की कोशिश की, लेकिन पहचान नहीं हो सकी।
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सोशल मीडिया से भी पुलिस नाकाम
शव के शिनाख्त के लिए चंडीगढ़ हाईटेक पुलिस ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया, लेकिन पुलिस के हाथ ऐसा कोई ठोस सुराग नहीं लगा। वहीं, पुलिस टीम ने पंजाब, हिमाचल, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में गुमशुदगी की दर्ज रिपोर्ट को भी खंगाला। बताया गया कि शिनाख्त नहीं होने की वजह है यह भी है कि मृतक का चेहरा काफी हद तक खराब हो चुका था।
मोबाइल डंप डाटा से सुराग नहीं
शव के पहचान के लिए पुलिस ने लगभग सभी हथकंडे अपना लिए थे। इसके बाद मोबाइल डंप डाटा जब्त कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन ऐसा कोई संदिग्ध नंबर नहीं लगा, जिससे आरोपियों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल, अब यह कह पाना मुश्किल है कि मृतक की पहचान हो भी सकेगी या फिर इसे ठंडे बस्ते में बंद कर दिया गया है।