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Hindi News ›   Chandigarh ›   Interview of Haryana Chief Secretary Sanjeev Kaushal

Haryana: कई चुनौतियों पर काम कर रहे हैं हरियाणा के मुख्य सचिव, भ्रष्टाचार पर नकेल लगाना सबसे बड़ा लक्ष्य

Mon, 03 Apr 2023 05:02 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 03 Apr 2023 05:02 PM IST
सार

मुख्य सचिव ने कहा कि हमने निदेशालय मर्ज किए। एक-दो समाप्त भी कर दिए। यह सभी महकमों में सहमति से संभव हुआ। 22 से 23 महकमों को एक साथ छेड़ना आसान नहीं था। विभागों में मंत्रियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Interview of Haryana Chief Secretary Sanjeev Kaushal
मुख्य सचिव संजीव कौशल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में शासन और प्रशासन के बीच के तालमेल का लंबा अनुभव रखने वाले मुख्य सचिव संजीव कौशल एक साथ कई चुनौतियां पर काम कर रहे हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें आम जनता के हितों से जुड़ी योजनाओं को शत-प्रतिशत अमल में लाना है। भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगानी है। अफसरों को काम करने के लिए प्रेरित भी करना है। वह इन सभी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जुटे हुए हैं। उन्हें कितनी कामयाबी मिली? कोरोना काल की मुश्किलों के बाद के हालातों और अन्य कई मुद्दों पर उनसे खास बातचीत... 

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सवाल: सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है। आपने इसके लिए क्या तरीका निकाला?
जवाब:
एंटी करप्शन ड्राइव सीएम का फोकस एरिया रहा है। कई स्थानों पर संदिग्ध व्यक्ति चिन्हित किए। वहां के डीसी को बताया कि इन लोगों को पास नहीं फटकने देना है। यह काम बहुत सफाई से किया है। जब मैंने ज्वाइन किया उससे थोड़ा सा पहले एचसीएस भर्ती का घोटाला हुआ था। हमने निर्भीक होकर निर्णय लिया। डिप्टी सेक्रेटरी को नौकरी से निकाल दिया। हाल ही में हमने एक एचसीएस, भूमि अधिग्रहण अधिकारी को बर्खास्त भी किया।
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सवाल: अफसरों के खिलाफ जांच की अनुमति देने में समय लगता है।
जवाब:
यह प्रक्रिया तेज कर रहे हैं। नए प्रावधान के मुताबिक 17 ए की क्लिेयरेंस होती है और फिर सेंक्शन फाॅर प्रॉसिक्यूशन होता है। हम कोशिश करते हैं कि महीने भर में हो। टारगेट तो हम 15 दिन का ले कर चलते हैं। सीएम ने फैसला लिया कि डिवीजनल विजिलेंस ब्यूरो बनाएं। एसपी को शक्तियां दीं। एक करोड़ तक की शिकायतें वे देख रहे हैं। सेंक्शन फाॅर प्राॅसिक्यूशन डिवीजनल कमीशनर को डेलीगेट कर दी। इससे एक करोड़ तक के भ्रष्टाचार की फाइल सचिवालय में न घूमे।
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सवाल: एंटी करप्शन ब्यूरो ने कितने अफसरों के खिलाफ जांच की संस्तुति मांगी है?
जवाब:
नाम तो मैं नहीं बताना चाहूंगा, लेकिन बहुत से ऐसे मामले हैं। हम बारीकी से देख रहे हैं कि क्या किया जा सकता है। कम से कम सात या आठ आईएएस, 10 के करीब एचसीएस और चार आईपीएस ऐसे हैं जिनके खिलाफ जांच की अनुमति मांगी है। कुछ एचपीएस अधिकारी भी हैं।

सवाल: डीसी, एसपी की जिलों में दो घंटे जनसुनवाई की डयूटी क्यों लगानी पड़ी?
जवाब:
पहले भी यह निर्देश दिए थे। अब जोर देने के लिए कहा है जिससे जनता की सुनवाई हो। मंगलवार को मैंने भी कोई मीटिंग नहीं की। सारा दिन विधायकों और अन्य लोगों के लिए उपलब्ध रहा। मुख्यमंत्री जी ने भी कोई बैठक नहीं की। सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक हम मीटिंग नहीं करेंगे तो डीसी, एसपी अपने कार्यालय में मौजूद रहेंगे और जनसुनवाई करेंगे।

सवाल: इस काम की मॉनीटरिंग कैसे संभव है?
जवाब:
मैंने आपको वही बताया है कि माॅनीटरिंग खुद ब खुद हो जाती है। आम तौर पर हम मीटिंग न रखें डीसी की तो वो उपलब्ध हैं। खुद उन्हें अनुपालना करनी है कि 11 से एक बैठक हो। कभी-कभी दिक्कत हो सकती है कि किसी का दौरा हो, कुछ हो लेकिन आम तौर पर उपलब्ध रहते हैं। डीसी सारा दिन उपलब्ध रहता है। इसमें मेरा मानना यह भी है कि कैंप ऑफिस में अधिकारी को बैठना नहीं चाहिए।

सवाल: आईएएस एचसीएस की वर्किग में क्या सुधार किए?
जवाब:
इस सवाल का जवाब किसी किताब में लिखना चाहिए, क्योंकि प्रशासन में आप जो निर्णय लेते हैं उनकी नींव छोटी-छोटी चीजों से बनती है। सबसे पहली चुनौती कोविड था। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण था चीजों को सरल बनाना। प्राइवेट सेक्टर में आपने देखा होगा वर्क फ्राॅम होम जोर पकड़ चुका है। प्रशासन में वही लेवल ऑफ इफेक्टिविटी लाना, कोविड वाले धीमेपन से सबको बाहर लाना सबसे महत्वपूर्ण था।

सवाल: यह सब संभव करने के लिए क्या करना पड़ा?
जवाब:
शुरुआत में हमने बायोमेट्रिक हाजिरी पर जोर दिया। जिससे यह पता चला कि सब सामान्य हो गया है। हमने हाजिरी न लगाने वाले एक भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। उसका मानसिक प्रभाव पड़ा। लोग समय से कार्यालय आने लगे और काम करने की प्रवृत्ति दोबारा से जगी। काम पटरी पर आ गया और गाड़ी चल पड़ी।

सवाल: कोविड के कारण क्या दिक्कतें आई थीं?
जवाब:
कोविड के कारण शिथिलता आई थी। एजेंडा नहीं बनता था। मीटिंग के मिनट नहीं बनते थे। वो काम शुरू किया। फिर सीएम ने गुड गर्वेनेंस के अवार्ड पर जोर दिया, वो हमने शुरू किया। उसमें हमने बदलाव किया कि आईएएस और आईपीएस को अवार्ड नहीं दिए जाएंगे क्योंकि ये तो वरिष्ठ हैं। अवार्ड दूसरी और तीसरी पंक्ति को मिलना चाहिए।

सवाल: कोविड के समय जो प्रोजेक्ट धीमे पड़ गए, उनको गति कैसे दी?
जवाब:
मुख्यमंत्री जी ने और मैंने यह संज्ञान लिया कि कई बड़े प्रोजेक्ट शिथिल हो गए थे। पूरे नहीं हो रहे थे। हमने एक कमेटी बनाई। उस एक कमेटी का मैं हेड हूं। हम रिव्यू करते हैं। अब उसका डैशबोर्ड बन गया है। काफी प्रोजेक्ट समय से पूरे हुए। सारी प्रक्रिया शुरू की। हमें कोई जोर नहीं लगाना पड़ रहा। विश्वविद्यालय अस्पताल एसटीपी सब समय से पूरे हो रहे हैं।


सवाल: विभागों को मर्ज करने का फैसला किसका था और फायदा क्या हुआ?
जवाब:
जाहिर तौर पर सोच हमेशा प्रदेश के मुखिया की होती है, अधिकारियों का काम होता है अमल करना। हमने निदेशालय मर्ज किए। एक-दो समाप्त भी कर दिए। यह सभी महकमों में सहमति से संभव हुआ। 22 से 23 महकमों को एक साथ छेड़ना आसान नहीं था। विभागों में मंत्रियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक सचिवों को अलग-अलग मामलों में जिलों में भेजना भी एक बड़ा अनुभव है। 

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