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Haryana: पांच साल में पहली बार सरस्वती महोत्सव से अंतरराष्ट्रीय दर्जा हटेगा, 2018 में हुई थी शुरूआत

Wed, 18 Jan 2023 05:33 PM IST
भूपेंद्र सिंह राजेश शांडिल्य, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
राजेश शांडिल्य, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 18 Jan 2023 05:33 PM IST
सार

2018 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव की शुरुआत की थी। 25 और 26 जनवरी को महज दो दिवसीय सरस्वती महोत्सव-2023 होगा। सरस्वती नदी और आस्था का विषय संघ और भाजपा के कोर एजेंडे में शामिल है।

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International status will be removed from Saraswati Festival for the first time in five years
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच साल में पहली बार होगा जब हरियाणा में मनाए जाने वाले सरस्वती महोत्सव का अंतरराष्ट्रीय दर्जा नजर नहीं आएगा। यानी इस साल यह कार्यक्रम सरस्वती महोत्सव-2023 के लोगो के साथ आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ भाजपा के कोर एजेंडे में सरस्वती नदी विरासत, इसके जीर्णोद्धार और आस्था का विषय प्रमुखता से जुड़ा है।

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यही कारण था कि हरियाणा में अक्तूबर 2014 में भाजपा की बहुमत वाली सरकार बनने के एक साल के भीतर हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड स्थापित किया गया। संघ और भाजपा से जुड़े दो व्यक्तियों में प्रशांत भारद्वाज के बाद धुमन सिंह किरमिच इस बोर्ड की कमान संभाल रहे हैं।
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बोर्ड के गठन के साथ ही हरियाणा में सरस्वती महोत्सव की शुरुआत की गई। वहीं दूसरे साल में यानी 2017 में पहली बार हरियाणा के आदीबद्री स्थल से सरस्वती सांस्कृतिक यात्रा एवं सेमिनार आयोजित किए गए,जबकि तीसरे साल में 2018 में पहली बार सरस्वती महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी।
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तब से यह माना जा रहा था कि इस उत्सव को राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से लगातार इसका कद गीता जयंती महोत्सव की तरह बढ़ाएगी। संभवतः इसीलिए हरियाणा और भारत के अफेयर के अलावा कई परीक्षाओं में अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव से संबंधित सवाल पिछले वर्षों में देखे गए।

मगर 2019 के दूसरे अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव के बाद 2020, 2021 और 2022 में वैश्विक महामारी के चलते इस उत्सव को अंतरराष्ट्रीय दर्जे के साथ जैसे तैसे मनाया तो गया, मगर इस उत्सव में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव जैसी रंगत नजर नहीं आई।

हालांकि 2022 में दावा किया गया था कि 2023 में अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव देश के चार राज्यों में हरियाणा के अलावा हिमाचल, राजस्थान और गुजरात में भी मनाया जाएगा, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ी। ना ही इस बार अंतरराष्ट्रीय सेमिनार होगा।

हालांकि इस साल सरस्वती नदी के किनारे स्थित 122 में से 101 गांवों में लोगों की भागीदारी से सरस्वती महोत्सव माने की अनूठी परंपरा शुरु होगी,जहां 25 और 26 जनवरी को भंडारे एवं अनुष्ठान होंगे।

सरस्वती महोत्सव को जन सामान्य उत्सव मनाने का प्रयास
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुमन सिंह ने बताया कि बोर्ड का प्रयास है कि सरस्वती महोत्सव पर सरकारी बजट खर्च ना करके, इसे जन सामान्य उत्सव बनाया जाए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की चाहत है कि हरियाणा सहित दूसरे राज्यों के लोगों की इस तरह के कार्यक्रम में रुचि पैदा हो और धीरे धीरे यह उत्सव श्रद्धा के साथ जागरूकता के महाकुंभ के रुप में अपनी पहचान कायम करे।


चार किमी की परिक्रमा होगी शुरू
इस बार आदी बद्री और पिहोवा में करीब चार किलोमीटर की परिक्रमा सरस्वती महोत्सव-2023 में शुरू होने जा रही है। धुमन सिंह ने बताया कि उन्होंने कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर पहली बार 2015 में बड़े स्तर पर संध्याकालीन महाआरती शुरू कराई थी। इस बार जब राहुल गांधी कुरुक्षेत्र पहुंचे तो वे भी इस महाआरती के आकर्षित होकर शामिल हुए थे, परिक्रमा का भी यही उद्देश्य है कि आदी बद्री और पिहोवा पहुंचने वाले लोग ब्रज की परिक्रमा की तरह यहां शामिल हों।

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