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जानिए, हरियाणा कांग्रेस के नए अध्यक्ष की रणनीति
डॉ. सुरेंद्र धीमान/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 12 Feb 2014 10:11 AM IST
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हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 19वें अध्यक्ष बने सिरसा के 38 वर्षीय सांसद डॉ. अशोक तंवर पहले दिन से ही संगठन मजबूती में जुट गए हैं। अध्यक्ष बनने पर उनकी प्राथमिकताओं, पार्टी में गुटबाजी, कार्यकारिणी समेत अन्य मुद्दों पर अमर उजाला ने उनसे विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:
प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को किस रूप में लेते हैं?
मैं समझता हूं कि हमारे नेतृत्व का मुझ पर विश्वास है और मैं हमेशा अपने नेतृत्व का इस बात केलिए ऋणी हूं और आभारी रहूंगा कि उन्होंने अलग-अलग समय पर छात्र संगठन से लेकर आज तक अलग-अलग जिम्मेदारी दी है।
आज तक मुझे जो जिम्मेदारी मिली है, मैंने उसे निभाने की कोशिश की है। चाहे वह एनएसयूआई के अध्यक्ष के रूप में हो, चाहे यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में हो या सांसद के रूप में।
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मैं समझता हूं कि मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली है, वह पूरी तरीके से सबके सहयोग के साथ, अपने अनुभवी नेताओं के सहयोग से, सबको साथ लेकर आगे की चुनौती को पार करेंगे। हमारे सामने लोकसभा 2014 और इसी साल विधानसभा के चुनाव चुनौती के रूप में हैं। इस चुनौती को हम सब मिलकर पूरा करेंगे।
मुझे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हमेशा आशीर्वाद और सहयोग मिलता रहा है। अब यह जिम्मेदारी दी है तो मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि उनकी अपेक्षा पर खरा उतर सकूं।
संगठन को मजबूत कर सकें और आने वाले समय में राहुल गांधी को मजबूत करेंगे। हमारा यही लक्ष्य है कि राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाएं।
चुनाव नजदीक हैं तो अध्यक्ष के नाते क्या प्राथमिकताएं देखते हैं?
मेरी प्राथमिकता है कि संगठन मजबूत हो। निम्न स्तर पर गांव से लेकर ऊपर तक संगठन मजबूत हो। सबको साथ लेकर चलना मेरी प्राथमिकता है। नौजवान, महिलाओं का नेतृत्व मजबूत हो।
गरीब समाज को ऊपर उठाने के लिए जो भी प्रयास किए जा सकते हैं, वे करेंगे। वैसे तो प्रदेश सरकार भी उनके लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन उनका लाभ जिस तरीके से पहुंचना चाहिए, वह थोड़ा कमजोर है।
संगठन और सरकार के साथ मिलकर उस पर काम करेंगे ताकि लोगों को उसका लाभ मिल सके और उनका जीवन स्तर ऊपर उठ सके।
पार्टी में इस समय गुटबाजी चरम पर है। एक गुट मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का माना जाता है तो दूसरा कुमारी सैलजा और चौधरी बीरेंद्र सिंह का। आप किसी भी गुट में नहीं हैं। गुटबाजी कैसे खत्म करेंगे?
सबको साथ लेकर गुटबाजी खत्म करेंगे। मैं समझता हूं कि राहुल गांधी ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी बात है, उसे घर के अंदर ही करना है। घर के भीतर बैठकर बात करें। हम सब का लक्ष्य है कि पार्टी मजबूत हो।
देश और समाज की सेवा के लिए हम सब राजनीति में हैं। उस लक्ष्य के साथ काम करेंगे और सबका सहयोग मिलेगा। हमारे पास अनुभवी नेताओं का अनुभव भी है, युवाओं की शक्ति भी है। सब समाज की लीडरशिप भी है। उन सबको साथ लेकर हम आगे बढ़ेंगे तो लक्ष्य की प्राप्ति जरूर होगी।
यानी गुटबाजी राहुल गांधी के मंत्र से खत्म करेंगे?
बिल्कुल, उनका (राहुल गांधी) स्पष्ट मत है कि हम (लीडर) जो भी बात करें, वह पार्टी के अंदर होनी चाहिए। अगर किन्हीं बातों पर कोई छोटे-मोटे मतभेद हैं भी, तो उसे अंदर ही दूर करना है। मैं समझता हूं कि यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है। इसे हम मिलकर आराम से सुलझा लेंगे।
जिस तरह चौधरी बीरेंद्र सिंह, कुमारी सैलजा, जय प्रकाश, शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के बयान आ रहे हैं, क्या वह अनुशासन के दायरे में है?
सब चीजें ठीक हो जाएंगी। सबको साथ लेकर हम अपना लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
प्रदेश की कार्यकारिणी दो साल से ज्यादा समय से नहीं है। कब तक कार्यकारिणी गठित करेंगे?
एक दिन पहले तो मेरी नियुक्ति हुई है। हम अपनी लीडरशिप से चर्चा करेंगे। क्या-क्या मामले हैं, आगे की क्या रणनीति है? लोकसभा के चुनाव सिर पर हैं। सारी चीजों पर मैं चर्चा करूंगा।
मैं समझता हूं कि अब गाड़ी टॉप गीयर में चलनी चाहिए और सीधे फास्ट मोड में चलनी चाहिए। इसके साथ-साथ हमारे जो तमाम साथी हैं, उन्हें साथ लेकर चलेंगे। यह सामूहिक नेतृत्व का मामला है। यह कोई व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है कि एक व्यक्ति ने फैसला करना है। सब लोगों से सलाह-मशविरा करने के बाद पार्टी को मजबूत कर आगे बढ़ाया जाएगा।
अध्यक्ष बनने के बाद क्या आप लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे और अगर लड़ेंगे तो सिरसा के बजाय अंबाला से या फिर सिरसा से ही लड़ेंगे?
मैं समझता हूं कि ये चीजें व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करती हैं। यह पार्टी की सोच पर निर्भर करता है। हमारी सोच महत्वपूर्ण है। उसे लेकर पार्टी नेतृत्व का जो भी फैसला होगा, उस पर हमें काम करना है। चुनाव लड़ना, न लड़ना, कहां से लड़ना है, ये सब बातें महत्वपूर्ण नहीं हैं। हमारी लीडरशिप अच्छी तरह जानती है कि किसे कब, कहां और क्या देना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार कब संभालेंगे?
सबसे चर्चा करेंगे। अभी तो नियुक्ति हुई है। सबसे बात करने के बाद कार्यभार संभालेंगे।
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प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को किस रूप में लेते हैं?
मैं समझता हूं कि हमारे नेतृत्व का मुझ पर विश्वास है और मैं हमेशा अपने नेतृत्व का इस बात केलिए ऋणी हूं और आभारी रहूंगा कि उन्होंने अलग-अलग समय पर छात्र संगठन से लेकर आज तक अलग-अलग जिम्मेदारी दी है।
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आज तक मुझे जो जिम्मेदारी मिली है, मैंने उसे निभाने की कोशिश की है। चाहे वह एनएसयूआई के अध्यक्ष के रूप में हो, चाहे यूथ कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में हो या सांसद के रूप में।
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मैं समझता हूं कि मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली है, वह पूरी तरीके से सबके सहयोग के साथ, अपने अनुभवी नेताओं के सहयोग से, सबको साथ लेकर आगे की चुनौती को पार करेंगे। हमारे सामने लोकसभा 2014 और इसी साल विधानसभा के चुनाव चुनौती के रूप में हैं। इस चुनौती को हम सब मिलकर पूरा करेंगे।
मुझे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हमेशा आशीर्वाद और सहयोग मिलता रहा है। अब यह जिम्मेदारी दी है तो मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि उनकी अपेक्षा पर खरा उतर सकूं।
संगठन को मजबूत कर सकें और आने वाले समय में राहुल गांधी को मजबूत करेंगे। हमारा यही लक्ष्य है कि राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाएं।
चुनाव नजदीक हैं तो अध्यक्ष के नाते क्या प्राथमिकताएं देखते हैं?
मेरी प्राथमिकता है कि संगठन मजबूत हो। निम्न स्तर पर गांव से लेकर ऊपर तक संगठन मजबूत हो। सबको साथ लेकर चलना मेरी प्राथमिकता है। नौजवान, महिलाओं का नेतृत्व मजबूत हो।
गरीब समाज को ऊपर उठाने के लिए जो भी प्रयास किए जा सकते हैं, वे करेंगे। वैसे तो प्रदेश सरकार भी उनके लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन उनका लाभ जिस तरीके से पहुंचना चाहिए, वह थोड़ा कमजोर है।
संगठन और सरकार के साथ मिलकर उस पर काम करेंगे ताकि लोगों को उसका लाभ मिल सके और उनका जीवन स्तर ऊपर उठ सके।
पार्टी में इस समय गुटबाजी चरम पर है। एक गुट मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का माना जाता है तो दूसरा कुमारी सैलजा और चौधरी बीरेंद्र सिंह का। आप किसी भी गुट में नहीं हैं। गुटबाजी कैसे खत्म करेंगे?
सबको साथ लेकर गुटबाजी खत्म करेंगे। मैं समझता हूं कि राहुल गांधी ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी बात है, उसे घर के अंदर ही करना है। घर के भीतर बैठकर बात करें। हम सब का लक्ष्य है कि पार्टी मजबूत हो।
देश और समाज की सेवा के लिए हम सब राजनीति में हैं। उस लक्ष्य के साथ काम करेंगे और सबका सहयोग मिलेगा। हमारे पास अनुभवी नेताओं का अनुभव भी है, युवाओं की शक्ति भी है। सब समाज की लीडरशिप भी है। उन सबको साथ लेकर हम आगे बढ़ेंगे तो लक्ष्य की प्राप्ति जरूर होगी।
यानी गुटबाजी राहुल गांधी के मंत्र से खत्म करेंगे?
बिल्कुल, उनका (राहुल गांधी) स्पष्ट मत है कि हम (लीडर) जो भी बात करें, वह पार्टी के अंदर होनी चाहिए। अगर किन्हीं बातों पर कोई छोटे-मोटे मतभेद हैं भी, तो उसे अंदर ही दूर करना है। मैं समझता हूं कि यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है। इसे हम मिलकर आराम से सुलझा लेंगे।
जिस तरह चौधरी बीरेंद्र सिंह, कुमारी सैलजा, जय प्रकाश, शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के बयान आ रहे हैं, क्या वह अनुशासन के दायरे में है?
सब चीजें ठीक हो जाएंगी। सबको साथ लेकर हम अपना लक्ष्य प्राप्त करेंगे।
प्रदेश की कार्यकारिणी दो साल से ज्यादा समय से नहीं है। कब तक कार्यकारिणी गठित करेंगे?
एक दिन पहले तो मेरी नियुक्ति हुई है। हम अपनी लीडरशिप से चर्चा करेंगे। क्या-क्या मामले हैं, आगे की क्या रणनीति है? लोकसभा के चुनाव सिर पर हैं। सारी चीजों पर मैं चर्चा करूंगा।
मैं समझता हूं कि अब गाड़ी टॉप गीयर में चलनी चाहिए और सीधे फास्ट मोड में चलनी चाहिए। इसके साथ-साथ हमारे जो तमाम साथी हैं, उन्हें साथ लेकर चलेंगे। यह सामूहिक नेतृत्व का मामला है। यह कोई व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है कि एक व्यक्ति ने फैसला करना है। सब लोगों से सलाह-मशविरा करने के बाद पार्टी को मजबूत कर आगे बढ़ाया जाएगा।
अध्यक्ष बनने के बाद क्या आप लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे और अगर लड़ेंगे तो सिरसा के बजाय अंबाला से या फिर सिरसा से ही लड़ेंगे?
मैं समझता हूं कि ये चीजें व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करती हैं। यह पार्टी की सोच पर निर्भर करता है। हमारी सोच महत्वपूर्ण है। उसे लेकर पार्टी नेतृत्व का जो भी फैसला होगा, उस पर हमें काम करना है। चुनाव लड़ना, न लड़ना, कहां से लड़ना है, ये सब बातें महत्वपूर्ण नहीं हैं। हमारी लीडरशिप अच्छी तरह जानती है कि किसे कब, कहां और क्या देना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार कब संभालेंगे?
सबसे चर्चा करेंगे। अभी तो नियुक्ति हुई है। सबसे बात करने के बाद कार्यभार संभालेंगे।