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Chandigarh News: दुर्घटनाग्रस्त हुई कार का मरम्मत खर्च न देने पर एश्योरेंस कंपनी पर लगाया 10 हजार का हर्जाना
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चंडीगढ़। उपभोक्ता आयोग ने सड़क हादसे के चलते कार मरम्मत में हुए खर्च का भुगतान न करने पर न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी पर 10 हजार का हर्जाना और 10 हजार रुपये बतौर मुकदमा खर्च उपभोक्ता को देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ कार मरम्मत में खर्च हुए 44 हजार रुपये 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से देने के आदेश दिए हैं।पंचकूला जिले के रहने वाले जयचंद ने उपभोक्ता आयोग में दायर याचिका में बताया कि वह हरियाणा नंबर की उक्त कार का मालिक है जो कि उसी के नाम पर पंजीकृत है। उसने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से कार का बीमा कराते हुए 12 हजार 491 रुपये का प्रीमियम भुगतान किया था। इससे पहले, शिकायतकर्ता ने कार को विजय कुमार को बेचने का फैसला किया था लेकिन किन्ही कारणों से कार बिक्री को लेकर हुआ सौदा रद्द हो गया। हालांकि शिकायतकर्ता ने पहले पंजीकरण प्राधिकरण के समक्ष एनओसी जारी करने के लिए आवेदन भी किया था। जिसे कालका पंजीकरण प्राधिकरण ने स्वीकार करते हुए एनओसी जारी करते हुए कार को विजय कुमार के नाम पर हस्तांतरित (ट्रांसफर) कर दिया। लेकिन, जारी हुई उक्त एनओसी का कभी उपयोग न होने और बिक्री सौदा रद्द होने के चलते शिकायतकर्ता ही उक्त कार का पंजीकृत मालिक बना रहा। इसके बाद 16 अगस्त 2019 कि सुबह 6:45 पर कालका स्थित खेरावाली चौक पर कार एक सड़क दुर्घटना का शिकार होने के बाद क्षतिग्रस्त हो गई।
नुकसान के दावे की रिपोर्ट को किया था खारिज
शिकायतकर्ता के मुताबिक दुर्घटना की सूचना तुरंत कंपनी को दी गई। जिन्होंने घटनास्थल का मौका मुआयना कराने के लिए सर्वेयर को नियुक्त किया था। उनके अनुसार सर्वेयर ने सर्वे कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। हालांकि कंपनी ने शिकायतकर्ता के नुकसान के दावे की रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने हादसे के पहले ही उक्त कार को किसी और व्यक्ति को दिया। जिसके चलते वह दुर्घटना के समय उक्त कार का मालिक नहीं था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिर से कंपनी से अनुरोध करते हुए उसके वास्तविक दावे (क्लेम) को स्वीकार कर नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा। लेकिन कंपनी पर उसके इस अनुरोध का कोई असर नहीं पड़ा। जिसके बाद पीड़ित उपभोक्ता ने मामले को लेकर चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग में कंपनी के खिलाफ याचिका दायर कर दी।
कंपनी को नुकसान की भरपाई करने के आदेश
मामले में याचिकाकर्ता ने कार के हादसे में क्षतिग्रस्त होने के चलते मरम्मत में खर्च हुए 70 हजार 931 रुपये कंपनी से लेने को लेकर याचिका में दावा किया। हालांकि सर्वेयर की रिपोर्ट में कार में हुए वास्तविक नुकसान 44 हजार बताया गया। मामले में दोनों पक्षों को सुनने और सामने तथ्यों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को नुकसान की भरपाई करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में कंपनी को कार की मरम्मत में खर्च हुए 44 हजार रुपये 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से देने के लिए कहा है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को कोई मानसिक पीड़ा के चलते मुआवजे के रूप में 10 हजार और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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नुकसान के दावे की रिपोर्ट को किया था खारिज
शिकायतकर्ता के मुताबिक दुर्घटना की सूचना तुरंत कंपनी को दी गई। जिन्होंने घटनास्थल का मौका मुआयना कराने के लिए सर्वेयर को नियुक्त किया था। उनके अनुसार सर्वेयर ने सर्वे कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। हालांकि कंपनी ने शिकायतकर्ता के नुकसान के दावे की रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने हादसे के पहले ही उक्त कार को किसी और व्यक्ति को दिया। जिसके चलते वह दुर्घटना के समय उक्त कार का मालिक नहीं था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिर से कंपनी से अनुरोध करते हुए उसके वास्तविक दावे (क्लेम) को स्वीकार कर नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा। लेकिन कंपनी पर उसके इस अनुरोध का कोई असर नहीं पड़ा। जिसके बाद पीड़ित उपभोक्ता ने मामले को लेकर चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग में कंपनी के खिलाफ याचिका दायर कर दी।
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कंपनी को नुकसान की भरपाई करने के आदेश
मामले में याचिकाकर्ता ने कार के हादसे में क्षतिग्रस्त होने के चलते मरम्मत में खर्च हुए 70 हजार 931 रुपये कंपनी से लेने को लेकर याचिका में दावा किया। हालांकि सर्वेयर की रिपोर्ट में कार में हुए वास्तविक नुकसान 44 हजार बताया गया। मामले में दोनों पक्षों को सुनने और सामने तथ्यों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को नुकसान की भरपाई करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में कंपनी को कार की मरम्मत में खर्च हुए 44 हजार रुपये 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से देने के लिए कहा है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को कोई मानसिक पीड़ा के चलते मुआवजे के रूप में 10 हजार और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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