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कारपोरेट सेक्टर में जाने की बजाय युवा वकील लोगों को न्याय दिलाएं : जस्टिस सूर्यकांत

Sun, 24 Nov 2019 01:15 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 24 Nov 2019 01:15 AM IST
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Instead of going into the corporate sector, young lawyers help people get justice: Justice Suryakant
चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दुख इसका नहीं है कि न्यायालयों में केस पेंडिंग चल रहे हैं, बल्कि इस बात का है कि लोगों को कानून की जानकारी नहीं है। न्यायालयों में पेंडिंग केस हल हो जाएंगे, लेकिन लोग कानूनी ज्ञान के अभाव में अदालत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वह कानूनी ज्ञान की अलख जगाएं, लोगों को इसके लिए जागरूक करें। जस्टिस सूर्यकांत पीयू के लॉ विभाग और यूआईएलएस के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक पासआउट 800 से अधिक विद्यार्थियों को एलएलबी की डिग्री प्रदान की।
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उन्होंने कहा, तमाम युवा कानूनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद कॉरपोरेट क्षेत्र व लॉ फार्म में चल जाते हैं, लेकिन कानून की शिक्षा का यह असली मकसद नहीं है। असली काम है लोगों को न्याय दिलाना, इसलिए युवा इस कार्य के लिए हाथ बढ़ाएं। कहा, जब अच्छे वकील नहीं होंगे तो जजों की भी कमी होगी। एक अच्छा वकील वही होता है, जिसकी ड्राफ्टिंग अच्छी हो।
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जिमभनेजियम हाल में हुए कन्वोकेशन में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने अनुभव साझा किए। कहा, कन्वोकेशन में लिखित भाषण पढ़ा जाता है, लेकिन मैं लिखकर भाषण नहीं लाया। कहा, कनाडा में हुए कॉमनवेल्थ जजेज के सम्मेलन में जब वह पहुंचे तो वहां कई चीजें सीखने को मिलीं। भाषण का अर्थ है कि लोगों को साफ समझ आना चाहिए, इसलिए मैं यहां लिखित की बजाय खुलकर बातें कह रहा हूं। उन्होंने कानून के शासन की रक्षा के बारे में भी बताया।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज राजीव शर्मा, जज राकेश कुमार जैन, जज दया चौधरी ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व वीसी प्रो. राजकुमार ने पीयू की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डीन विधि संकाय अनु चतरथ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। साथ ही जीके चतरथ मेमोरियल फंड के तहत 23 युवाओं को 2100 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर डीयूआई प्रो. शंकरजी झा, यूआईएलएस निदेशक डॉ. रतन सिंह, लॉ विभाग चेयरमैन प्रो. मीनू पॉल आदि रहीं।
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पीयू के सुरक्षा अधिकारी को मिली डिग्री
पीयू के सुरक्षा अधिकारी विक्रम सिंह को थ्री ईयर एलएलबी की डिग्री मिली। विक्रम सिंह ने एमबीए, एमए, बीटेक में शिक्षा ग्रहण की है। वह 11 साल से पीयू में सुरक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। पीजीआई में कार्यरत जसवीर सिंह को भी एलएलबी की डिग्री दी गई। उन्होंने वर्ष 2016 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर ली थी।
रैंप बनाया नहीं, कार्यक्रम के बाद दिव्यांग को मंच पर ही छोड़ गए
कन्वोकेशन में दिव्यांग विद्यार्थियों को खासी परेशानी हुई। मंच पर जैसे ही डिग्री लेने के लिए उनका नाम पुकारा गया तो उन्हें बमुश्किल मंच तक व्हीलचेयर के साथ पहुंचाया गया। मंच पर सीढ़ियां थीं, जबकि दिव्यांगों के लिए यह सुविधा होनी जरूरी थी। एक दिव्यांग तो व्हीलचेयर के साथ मंच पर ही रहा। कार्यक्रम समाप्त हो गया, सभी लोग उसको नीचे उतारना भूल गए, बाद में उनके एक परिचित ने नीचे उतारा। मालूम हो कि हर साल दिव्यांगों को दिक्कतें होती हैं, लेकिन मंच तक पहुंचने के लिए आज तक रैंप नहीं बनाया गया। कई बार दिव्यांगों ने दीक्षांत समारोह में ही इसकी मांग की थी। उधर, जिमभनेजियम हाल में वीडियो दिखाने के लिए स्क्रीन का प्रयोग नहीं किया गया, इसके लिए टीवी का प्रयोग किया गया जबकि स्क्रीन पर युवाओं को वीडियो बेहतर दिखते। इसकी भी युवा चर्चा करते नजर आए।

जस्टिस सूर्यकांत को वीसी बोल गए चीफ जस्टिस
वीसी प्रो. राजकुमार ने जब भाषण शुरू किया तो उन्होंने मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नाम से संबोधित किया। इसी तरह संचालन के दौरान भी प्रो. श्रुति बेदी ने भी जस्टिस सूर्यकांत को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जज के रूप में संबोधित कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद इस गलती को सुधारा गया।
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