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Haryana: वोट कटवा भी नहीं बने क्षेत्रीय दल... इनेलो पर निशान गंवाने का खतरा, जजपा के लिए भी खतरे की घंटी

Wed, 05 Jun 2024 12:27 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 05 Jun 2024 12:27 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव की शुरुआत से ही भाजपा और कांग्रेस इनेलो और जजपा को वोट कटवा श्रेणी में रख लगातार हमला बोल रहे थे। खासकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दोनों दलों को निशाने पर रखा और वह यह माहौल बनाने में सफल रहे कि यह देश का चुनाव है। मतदाताओं ने मुख्यत: भाजपा और इंडिया गठबंधन को ही वोट दिया।

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INLD and JJP fighting for their existence in Haryana
Haryana Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हरियाणा के दोनों क्षेत्रीय दल इनेलो और जजपा वोट कटवा भी साबित नहीं हो पाए। दोनों दलों में से केवल इनेलो के अभय चौटाला ही अकेले प्रत्याशी हैं, जो 50 हजार मतों का आंकड़ा पार कर पाए हैं। 
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अभय चौटाला के 50 हजार से अधिक मत लेने से आप गठबंधन के प्रत्याशी डॉ. सुशील गुप्ता को जरूर हार का सामना करना पड़ा और भाजपा के नवीन जिंदल को इसका सीधा लाभ मिला। इनके अलावा, किसी भी सीट पर इनेलो और जजपा के प्रत्याशी न तो मुकाबले में आ पाए और न ही किसी की जीत और हार प्रभावित कर पाए। छह प्रतिशत मत हासिल नहीं करने के चलते अब इनेलो पर चुनाव चिह्न चश्मा गंवाने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं, जजपा के लिए भी खतरे की घंटी बज गई है।
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सभी दसों सीटों पर लड़ी थी जजपा
इस बार जजपा ने प्रदेश की दसों लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे, जबकि इनेलो ने अंबाला, कुरुक्षेत्र, सिरसा, हिसार, और गुरुग्राम में चुनाव लड़ा। इनेलो ने करनाल में एनसीपी के वीरेंद्र मराठा को समर्थन दिया था। किसी भी सीट पर दोनों दलों के प्रत्याशियों को मतदाताओं ने गंभीरता से नहीं लिया। गौर हो कि दोनों ही दलों का वोट बैंक खासकर ग्रामीण मतदाता और जाट समाज के साथ किसान-मजदूर है, लेकिन चौटाला परिवार में फूट के चलते दोनों अलग-अलग दल होने का असर साफ दिखा।
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दोनों दलों का पिछला प्रदर्शन
विभाजन से पहले हरियाणा में इनेलो का मत प्रतिशत ठीक रहा है। इनेलो लगातार लोकसभा चुनाव में 15 से 28 प्रतिशत वोट हासिल करती रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इनेलो के दो सांसद थे और उन्हें 24.4 प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 में विभाजन के बाद इनेलो का सबसे खराब प्रदर्शन रहा और उसे मात्र 1.9 प्रतिशत वोट मिले। 2019 के लोकसभा चुनाव में जजपा का प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा। उसे केवल 4.9 प्रतिशत ही वोट मिले थे। देर शाम तक के जारी परिणामों के अनुसार इस बार इनेलो 1.87 फीसदी और जजपा 0.87 फीसदी ही मत ले पाई है।

जजपा के प्रत्याशी 25 हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाए
जजपा के दसों प्रत्याशियों में से एक भी 25 हजार मतों का आंकड़ा पार नहीं कर पाए। इनमें सबसे अधिक हिसार से प्रत्याशी नैना चौटाला ही 22 हजार से अधिक मत ले पाई। इनके बाद सिरसा में रमेश खटक ने 20 हजार से अधिक मत हासिल किए हैं। इनके अलावा, भिवानी से राव बहादुर सिंह, गुरुग्राम से राहुल फाजिलपुरिया, करनाल से देवेंद्र कादियान, सोनीपत से भूपेंद्र मलिक, फरीदाबाद से नलीन हुड्डा, कुरुक्षेत्र से पालाराम सैनी, रोहतक से रविंद्र कुमार 15 हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। 

वहीं, इनेलो की बात करें तो सबसे अधिक मत सिरसा से संदीप लोहट ने 92 हजार से अधिक मत हासिल किए, पार्टी में दूसरे नंबर अभय चौटाला 80 हजार मतों के करीब रहे। करनाल में इनेलो समर्थिक वीरेंद्र मराठा 27 हजार से अधिक मत ले पाए, जबकि गुरुग्राम से सौरभ खान, अंबाला से गुरप्रीत सिंह 10 हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाए।

किसान आंदोलन में इस्तीफे देने वाले नहीं कर पाए कमाल
किसान आंदोलन के दौरान ऐलनाबाद से इनेलो के विधायक अभय सिंह ने किसानों के समर्थन में पद से इस्तीफा दिया था और बाद में यहां उपचुनाव हुआ था। लोकसभा चुनावों में भाकियू के राज्य प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी ने अभय चौटाला का खुलकर समर्थन किया था, लेकिन अभय तीसरे स्थान पर रहे। इसी प्रकार, किसानों का समर्थन करने करनाल से बसपा प्रत्याशी वाले इंद्रजीत सिंह 30 हजार से अधिक मत ही ले पाए।


जनादेश स्वीकार, विरोधी लहर का राष्ट्रीय पार्टी होने से कांग्रेस को मिला फायदा : अभय
इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हरियाणा की जानता द्वारा दिये गये जनादेश को स्वीकार करते हैं। विपक्ष में इनेलो का संगठन आज भी ज़्यादा मजबूत है। जहां कांग्रेस का संगठन धरातल पर कहीं नहीं है, वहीं आपसी लड़ाई भी बहुत ज़्यादा है, लेकिन इन चुनावों में विरोधी लहर का फ़ायदा राष्ट्रीय पार्टी होने के कारण कांग्रेस को मिला और राष्ट्रीय मुद्दे होने के कारण जनता ने अपना मत उन्हें दिया। किसान, कमेरे, छोटे व्यापारी, कर्मचारी, युवाओं समेत सभी वर्गों की लड़ाई हमने विधानसभा के अंदर और बाहर लड़ी है और आगे भी पुरज़ोर तरीक़े से लड़ते रहेंगे। आगे विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।
 
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