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11 नहीं, मस्कट में इस समय फंसी हैं 100 से ज्यादा लड़कियां, पंजाब की छह, ज्यादातर हैदराबाद कीं

Thu, 13 Feb 2020 03:38 AM IST
ajay kumar महेश कुमार, कपूरथला (पंजाब)
महेश कुमार, कपूरथला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 13 Feb 2020 03:38 AM IST
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Indian women stuck in Muscat, Video goes viral
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

अरब देशों में सजायाफ्ता कई युवाओं को ब्लड मनी देकर फांसी के फंदे से बचाने वाले दुबई के नामवर सिख कारोबारी व सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसएसपी ओबराय एक बार फिर अरब देशों में फंसी बेटियों को बचाने के लिए आगे आए हैं। 

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फोन पर बातचीत में डॉ. एसपीएस ओबराय ने बताया कि भारत के कुछ गलत एजेंट भोली-भाली गरीब लड़कियों को अच्छी नौकरी का झांसा देकर पहले विजटर वीजा पर दुबई भेजते हैं। कुछ दिनों बाद वीजा खत्म होने के बाद जब दुबई में गैर-कानूनी तौर पर रहना कठिन हो जाता है तो फिर उन लड़कियां को गलत तरीके से सड़क के रास्ते मस्कट ले जाकर बेच देते हैं। 
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उन्होंने बताया कि इन लड़कियों को खरीदने वाले इन्हें अपने पास रखकर इनसे घरों और पशुओं की संभाल का भारी-भरकम काम करवाते हैं। इससे दुखी होकर लड़कियां वापस आना चाहती हैं लेकिन मजबूरन नहीं आ पातीं, क्योंकि इनके पासपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज इनके खरीददारों के पास होते हैं। 
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डॉ. ओबराय ने बताया कि यह मामला बीते साल भी उनके ध्यान में आया था। जब उन्होंने खुद सर्वे किया तो यह बात सामने आई कि इस समय 104 लड़कियों ने खरीददारों के चंगुल से भागकर मस्कट दूतावास और गुरुद्वारा साहिब में शरण ली थी। इनमें 65 लड़कियां भारतीय थीं। उस समय उन्होंने भारत सरकार और मस्कट में भारतीय एंबेसडर को भी इस मामले में पत्र लिखा था और कहा था कि इन लड़कियों को वापस भेजने की सेवा सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट को दी जाए। उस समय उन्होंने अपने खर्च पर मस्कट में फंसी 6 लड़कियों को वापस भारत भेजा था। 

उन्होंने कहा कि अब फिर एक वीडियो के माध्यम से यह पता लगा है कि करीब 89 लड़कियों ने मस्कट के भारतीय दूतावास में शरण ली हुई है, जबकि कुछ लड़कियां अभी भी अपने खरीददारों के पंजे में से निकल नहीं सकीं। इन 89 लड़कियों में से छह लड़कियां पंजाब की हैं। करीब 60 प्रतिशत लड़कियां हैदराबाद की हैं। 

उन्होंने कहा कि अरब देशों में अवैध ढंग से फंसीं 100 से ज्यादा लड़कियों को वापस लाने में इमीग्रेशन के जुर्माने, ओवरस्टे की पेनाल्टी और कोर्ट के फीस में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। अगर कहीं उनके खरीददारों को उनका खरीद मूल्य वापस करना पड़ा तो यह आंकड़ा कई गुणा बढ़ने की उम्मीद है, जो इन लड़कियों के परिवार वहन नहीं कर सकते। 

उन्होंने कहा कि यह सारा खर्च वहन करके इन लड़कियों को वापस लाने को तैयार हैं, लेकिन इस गंभीर मसले पर भारत सरकार की विशेष मदद की जरूरत है। बहुत सी लड़कियों के पास पासपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। ये दस्तावेज भारत सरकार की मदद के बिना किसी भी हालत में पूरे नहीं हो सकते हैं। 

बताते चलें कि कुछ दिन पहले मस्कट के भारतीय दूतावास में भारत वापस लौटने के लिए गिडगिड़ाने वाली कुछ पंजाबी लड़कियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसे देखकर सरबत दा भला ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसपीएस ओबराय ने इन लड़कियों को वापस लाने की पहलकदमी की है। इससे पहले डॉ. ओबराय ने दुबई में करोड़ों रुपये की ब्लड मनी देकर कई युवाओं को फांसी के फंदे से बचाया था।

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