करतारपुर कॉरिडोरः भारत-पाक के बीच हुई वार्ता, लेकिन नहीं मिलाए हाथ, हिंदुस्तान ने दिया ये संदेश
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पुलवामा आतंकी हमले के एक महीने बाद करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर भारत-पाकिस्तान के बीच गुरुवार को अधिकारी स्तर की बैठक हुई। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए पासपोर्ट अनिवार्य होगा। भारतीय अधिकारियों ने प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए भेजे जाने पर जोर दिया।
इसके अलावा यह प्रस्ताव भी दिया कि गुरु पर्वों और अन्य ऐतिहासिक दिवसों पर अलग से दस हजार श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति और इस कॉरिडोर को पूरा साल खुला रखा जाए। हालांकि इस दौरान एक और वाकया देखने को मिला।
बैठक के दौरान पाकिस्तानी शिष्टमंडल के मुखिया डॉ. मोहम्मद फैजल ने विश्वास दिलाया कि आतंकवादियों को श्री करतारपुर साहिब की पावन धरती का प्रयोग नहीं करने दिया जाएगा। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यह बैठक करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण को लेकर थी। इस बैठक को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत न समझा जाए।
यह बैठक दिल्ली में नहीं, दोनों देशों को बांटने वाली सीमा अटारी में हुई है। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए आने वाले शिष्टमंडल को न कोई रेड कारपेट स्वागत दिया गया और न ही उनके साथ हाथ मिलाया गया। दोनों पक्षों के बीच पांच घंटे तक लगातार बातचीत हुई।
कॉरिडोर में 300 मीटर ऊंचा तिरंगा लहराएगा
करतारपुर कॉरिडोर परिसर में 300 मीटर ऊंचा तिरंगा भी फहराएगा। कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने वाले इस तिरंगे के लिए विशेष राष्ट्रीय स्मारक का भी निर्माण किया जाएगा। इससे पहले अटारी सीमा पर 360 फुट ऊंचा तिरंगा मार्च 2017 में लगाया गया था। बॉर्डर पर अब दो सीमावर्ती स्थानों पर झंडा लहराएगा। दूसरे चरण में 30 मीटर ऊंचा एक वाच टावर, दर्शक दीर्घा और एक रेस्टोरेंट का निर्माण किया जाएगा।