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सर्जिकल स्ट्राइकः हौंसले के आगे डर ने घुटने टेके, देखिए लोग घरों में ही डटे

Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
हितेंद्र शर्मा/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
हितेंद्र शर्मा/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब) Updated Mon, 03 Oct 2016 09:34 PM IST
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indian army surgical strike in pok and people are ready to fight in border near villages
बॉर्डर से सटे गांवों के लोग
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर पर युद्ध के आसार बने हुए हैं, लेकिन वहां सटे गांवों के लोगों के हौंसले के आगे ये डर घुटने टेक रहा है।
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अपने पक्के घर व पकी फसलों को छोड़ कर हरगिज नहीं जाएंगे। हमें अपने घरों में मरना मंजूर है। ये कहना है बॉर्डर से सटे गांव चौंतड़ा के लोगों का।  प्रशासन के लाख कहने के बाद भी गांव का कोई भी परिवार गांव छोड़ कर जाने को तैयार नहीं है।

गांव के लोगों का कहना है कि वह पहले भी पाकिस्तान से हुई जंग के मंजर देख चुके हैं। उनके दिलों में जंग का खौफ जरूर है लेकिन वह गांव में रहकर सेना का सहयोग करने की ख्वाहिश रखते हैं।
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उमर उजाला ने जब एलओसी से महज दो सौ गज की दूरी पर स्थित गांव चौतड़ा में जाकर गांव के लोगों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन लोगों की करीब करीब 115 एकड़ जमीन एलओसी पर लगी कंटीली तार के उस पार है, जहां पर उनकी धान की फसल की बिजाई की हुई है और फसल पक कर तैयार है।
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पिछले कुछ दिनों से सीमा पर तनाव के चलते उन्हें तार के उस पार अपनी फसलों को देखने तक के लिए जाने पर पाबंदी लगी है, जिस कारण वह अपनी फसलों को देखने तक उस पार नहीं जा पा रहे।

लोग बोले, 1971 में और आज के वक्त में काफी अंतर

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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग - फोटो : अमर उजाला
लोगों ने कहा कि 1971 की जंग में भी वह गांव में ही थे, लेकिन उस वक्त में और आज के वक्त में जमीन आसमान का अंतर है। अब यहां पर उनके पक्के घर हैं, फसलें पकी हुई हैं और मवेशी हैं, जिन्हें प्रशासन की एक काल पर ले जाना काफी मुश्किल है।

गांव के सरपंच जसविंदर कौर, निशान सिंह, गुरबख्श सिंह, परमजीत कौर, गोपी, जसपाल सिंह, केवल कृष्ण ने बताया कि सीमा पार कंटीले तार के पार उनकी जमीन होने के चलते वहां ज्यादा ऊंची फसल लगाने पर पाबंदी के चलते 27 साल पहले सरकार ने उन्हें मुआवजे के तौर पर 3000 रुपये प्रति एकड़ देने की घोषणा की थी।

इन 27 वर्षों में उन्हें मात्र चार वर्ष ही मुआवजे की राशि मिल पाई है। लोगों का कहना सरकार को चाहिए कि सीमावर्ती किसानों को मुआवजा समय पर दिया जाए।

सरकार को चाहिए कि 10 किलोमीटर दूर प्लॉट दे दे

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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग - फोटो : अमर उजाला
लोगों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि उन्हें दस किलोमीटर दूर प्लाट दिए जाएं, ताकि आपात स्थिति में उन्हें सीमावर्ती गांव से हटाया भी जाए तो उनका रहने का कोई ठिकाना रहे।

इन्होंने कहा कि जब बार्डर एरिया प्रमाण पत्र बनाने की बारी आती है तो यहां से बीस किलोमीटर दूर बैठे लोगों को भी वही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। लोगों ने मांग की कि उनके लिए अलग से मापदंड बनाए जाएं।

जिला प्रशासन ने लगाई बसें
आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरा प्रबंध किया है। अगर कोई आपात स्थिति पैदा होती है तो सीमावर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए बसों का प्रबंध किया गया है। गांव के सरपंच को बस चालकों के नंबर दिए गए हैं, वह जब चाहे उन बसों को बुला कर गांव के लोगों को सीमा से पीछे ले जा सकते हैं।

उधर, सीमा से महज तीन किलोमीटर दूर कस्बा दोरांगला के बाजारों में सन्नाटा है। दुकानदारों ने बताया कि त्यौहारों के दिनों के बावजूद बाजार में कोई ग्राहक नही है। इससे उनका कारोबार चौपट हो रहा है। दोरांगला के किसान जल्द जल्द अपना धान समेटने में लगे हैं।
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