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एसजीपीसी के पूर्व अधिकारी बोले- सेना ने जो सामान लौटाया, उसकी सूची जांचने का काम मेरा नहीं था

Mon, 10 Jun 2019 11:45 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 10 Jun 2019 11:45 AM IST
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Indian Army, Operation Blue Star, Sikh Reference Library, SGPC former officer statement
फाइल फोटो
एसजीपीसी के तत्कालीन सहायक सचिव कुलवंत सिंह रंधावा का कहना है कि सूची में कौन से सामान की जानकारी थी या सेना ने कौन सा सामान लौटाया, यह जांचने का काम उनका नहीं था। श्री हरमंदिर साहिब स्थित सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के बहुमूल्य खजाने को खुर्द-बुर्द करने के खुलासे के बाद कुलवंत सिंह रंधावा ने बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सेना द्वारा लौटाए गए कुछ सामान की सूची उस समय के लाइब्रेरियन बलबीर सिंह ने उनके सामने रखी थी।
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इस सूची में एसजीपीसी के सचिव भान सिंह के हस्ताक्षर थे। बलबीर सिंह ने उन्हें कहा था कि सेना द्वारा भेजे सामान की सूची पर वह भी हस्ताक्षर कर दें। उन्होंने अपने सामने पहले बलबीर सिंह से सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का सामान वसूल पाया लिखवाकर उस सूची पर हस्ताक्षर करवाए थे। बाद में उन्होंने उस सूची पर दस्तखत किए थे।  
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कुलवंत सिंह रंधावा ने कहा कि सूची जांचने का काम उनका नहीं था क्योंकि तत्कालीन सचिव भान सिंह ने उस सूची पर पहले ही हस्ताक्षर किए हुए थे। एसजीपीसी का दफ्तरी सेना द्वारा लौटाए सामान की सूची उस समय के अधिकारियों के सामने रख रहा था, इसलिए उस पर विश्वास था। सामान की जांच की जिम्मेदारी भान सिंह की थी, न कि उनकी। रंधावा आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान एसजीपीसी में सहायक सचिव के पद पर थे। बाद में वह एसजीपीसी के सचिव और वरिष्ठ सचिव के पद पर भी रहे।
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कुलवंत रंधावा ने कहा कि तत्कालीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गुरतेज सिंह ने भी उन दस्तावेजों की जांच की थी, जो सेना द्वारा भेजे गए थे। उन्होंने दावा किया कि बाद में इन दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई। संसद में एक मंत्री ने इन दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा था कि सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का समान लौटा दिया गया है जबकि यह सच नहीं था।

उन्होंने बताया कि सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के नीचे अखंड कीर्तनी जत्थे के पास दो कमरे थे जहां वह कीर्तन की तालीम दिया करते थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार में जब सेना बहुमूल्य खजाना ले गई तो उन्होंने भी वहां की धार्मिक किताबों पर अपना क्लेम किया था।

रंधावा का मानना है कि सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में रखा बहुमूल्य खजाना रजिस्टर पर दर्ज होने के बाद बाहर नहीं जा सकता। किसी भी व्यक्ति को कोई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के दस्तावेजों को बाहर ले जाने की आज्ञा नहीं है। खोजार्थी इन दस्तावेजों को वहीं बैठ कर पढ़ते हैं। लाइब्रेरी का खजाना यदि बाहर गया है, तो यह जांच का विषय है। 13 जून को एसजीपीसी द्वारा इस संदर्भ में बैठक बुलाई गई है, उसमें शामिल होने का न्योता उन्हें मिला है। वह इस बैठक में शामिल होंगे और अपने विचार रखेंगें।
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