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लैंड माइन का पता लगाने में अब जान जाने का खतरा नहीं, भारतीय सेना को मिला नया उपकरण
Tue, 11 Feb 2020 01:43 AM IST
Vikas Kumar
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 11 Feb 2020 01:43 AM IST
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सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवान
- फोटो : PTI
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बॉर्डर एरिया और अन्य संवेदनशील इलाकों में भारतीय सेना को अब लैंड माइन ढूंढने में बेकार की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। ये खोज अब अत्याधुनिक उपकरण के जरिए ज्यादा सुरक्षित और सटीक दिशा में चलेगी, जिससे लैंड माइन खोज कर रही सेना के विशेषज्ञों की टीम को खतरा भी कम रहेगा।
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इसके लिए भारतीय सेना के स्पेशल बम निरोधक दस्तों को अब ‘ड्यूल टेक्नोलॉजी माइन डिटेक्टर’ से लैस करवाया है। यह एक खास तकनीक पर आधारित आस्ट्रिया निर्मित उपकरण है, जो लैंड माइन ढूंढने में विशेषज्ञों की मशक्कत को काफी हद तक कम करेगा। इसकी खास बात यह कि ये उपकरण न केवल जमीन बल्कि खारे पानी के भीतर भी काम कर सकेगा। काबिलेगौर है कि इस वक्त सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए घाटी और अन्य बार्डर एरिया खासकर पंजाब, राजस्थान क्षेत्र में इस तरह के अत्याधुनिक उपकरण सेना के लिए बहुत जरूरी हैं।
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अब लैंड माइन प्लास्टिक बॉडी के, फायरिंग पिन को तुरंत पकड़ेगा
इस ‘ड्यूल टेक्नोलॉजी माइन डिटेक्टर’ उपकरण में दो तरह की तकनीक होगी। विशेषज्ञ जिस तकनीक पर काम करना चाहता है, उपकरण को उस लिहाज से सेट किया जाएगा। पहली तकनीक के अंतर्गत मैटल डिटेक्टर जमीन के नीचे हर तरह की धातुओं व खनिजों को डिटेक्ट करेगा और बीप की आवाज देगा। भारतीय सेना के पास पुराने लैंड माइन डिटेक्टर भी अभी इसी तकनीक पर काम करते हैं। इससे जमीन के नीचे हर तरह के मैटल पकड़ में आने पर ये उपकरण आवाज करता रहता है। इसलिए दुश्मनों द्वारा जमीन केनीचे छिपाए लैंड माइन ढूंढने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
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दूसरी तकनीक के अंतर्गत ये उपकरण जमीन में किसी भी तरह के खनिज पदार्थ को डिटेक्ट करने पर आवाज नहीं करेगा और लैंड माइन की फायरिंग पिन को ही डिटेक्ट करेगा। बताते चलें कि अब लैंड माइन भी नए तकनीक के जरिए बनाए जा रहे हैं, जिसमें पूरी माइन बॉडी प्लास्टिक निर्मित होती है, लेकिन उसकी फायरिंग पिन को मैटल को ही बनाना पड़ता है और इस डिटेक्टर की नई तकनीक इसी फायरिंग पिन को तुरंत पकड़ने में कारगर है।
चार्ज होकर 70 घंटे तक काम करेगा उपकरण
- ‘ड्यूल टेक्नोलॉजी माइन डिटेक्टर’ चार्ज होने के बाद 70 घंटे तक काम करेगा, इसकी पॉवर सप्लाई 4 गुणा 1.5 वोल्ट होगी
- ये 40 डिग्री से 55 डिग्री सेल्सियस पर काम करेगा, लेकिन स्टोरेज क्षमता 85 डिग्री सेल्सियस होगी
- उपकरण की टेलिस्कोपिक पोल लेंथ 1.6 मीटर तक होगी और इसका सर्च हेड व्यास 270 एमएम का होगा
- ये डिटेक्टर जमीन के नीचे 46 सेंटीमीटर तक हाई मेटल माइन, 30 सेंटीमीटर तक लो मेटल माइन को खोज सकेगा। जबकि खारे पानी के भीतर ये 30 सेंटीमीटर तक काम कर सकेगा।