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OMG! कबाड़ीवाला निकला करोड़पति, जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा(पंजाब)
Updated Sat, 04 Mar 2017 09:15 AM IST
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धन
आयकर विभाग अधिकारियों के होश उड़ गए यह जानकर की कबाड़ बेचने वाला व्यक्ति करोड़पति है। जांच की गई तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए। पंजाब के बठिंडा में आयकर विभाग ने कबाड़िये मिट्ठू के घर व दुकान में छापेमारी की। जांच में खुलासा हुआ कि उसने नोट बंदी के दौरान अपने खाते में डेढ़ करोड़ रुपए जमा करवाए।
आयकर विभाग ने इतना पैसा खाते में आने के बारे में पूछा तो उसे पहले बताया कि सामान बेचकर पैसे घर में रखे थे, लेकिन जब सख्ती की तो जमीन बेचने से लेकर कई दावे किए। मामला समझने के बाद अफसरों ने पैसे को संदिग्ध माना व कार्रवाई के लिए लिखा गया। इसके बाद अधिकारियों ने पेट्रोल पंप पर काम करने वाले रजिंदर कुमार के घर में रेड की तो पता चला कि उसके खाते में चार करोड़ रुपए जमा है।
आयकर विभाग को शक तब हुआ, जब रजिंदर ने बताया कि वह पेट्रोल पंप पर बतौर मैनेजर काम करता है। उसने बताया कि यह पैसा पेट्रोल पंप की पेमेंट है। सख्ती करने पर जब पूछा गया कि उसने नोटबंदी के दौरान ही इतनी बड़ी राशि क्यों जमा कराई तो वह जवाब नहीं दे सका। गौरतलब है कि नोटबंदी के दौरान बैंकों में मोटी रकम जमा करवाने वालों को आयकर विभाग ने 15 दिन पहले नोटिस जारी कर पैसे का हिसाब मांगा था, लेकिन इसमें ज्यादातर लोग आयकर विभाग को जबाव ही नहीं दे पाए। इसके बाद अब विभाग ने जोन स्तर पर टीमें गठित करके कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।
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आयकर विभाग ने इतना पैसा खाते में आने के बारे में पूछा तो उसे पहले बताया कि सामान बेचकर पैसे घर में रखे थे, लेकिन जब सख्ती की तो जमीन बेचने से लेकर कई दावे किए। मामला समझने के बाद अफसरों ने पैसे को संदिग्ध माना व कार्रवाई के लिए लिखा गया। इसके बाद अधिकारियों ने पेट्रोल पंप पर काम करने वाले रजिंदर कुमार के घर में रेड की तो पता चला कि उसके खाते में चार करोड़ रुपए जमा है।
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आयकर विभाग को शक तब हुआ, जब रजिंदर ने बताया कि वह पेट्रोल पंप पर बतौर मैनेजर काम करता है। उसने बताया कि यह पैसा पेट्रोल पंप की पेमेंट है। सख्ती करने पर जब पूछा गया कि उसने नोटबंदी के दौरान ही इतनी बड़ी राशि क्यों जमा कराई तो वह जवाब नहीं दे सका। गौरतलब है कि नोटबंदी के दौरान बैंकों में मोटी रकम जमा करवाने वालों को आयकर विभाग ने 15 दिन पहले नोटिस जारी कर पैसे का हिसाब मांगा था, लेकिन इसमें ज्यादातर लोग आयकर विभाग को जबाव ही नहीं दे पाए। इसके बाद अब विभाग ने जोन स्तर पर टीमें गठित करके कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।
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