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Chandigarh News: कनाडा में सरकारी एजेंसियों के सामने पक्ष मजबूती से किया जाए पेश कनाडा से निर्वासन का सामना कर रहे विद्यार्थियों ने सीएम को लिखा पत्र
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ठगी के शिकार विद्यार्थियों के परिजनों को सरकार की तरफ से दी जाए आर्थिक मदद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कनाडा से निर्वासन के केस का सामना कर रहे विद्यार्थियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि कनाडा की एजेंसियों के सामने उनके मामले को मजबूती से पेश किया जाए। इस तरह केस भविष्य में घटित न हो, इसके लिए राज्य सरकार स्पेशल टास्क फोर्स गठित करे। वहीं, कनाडा में मुश्किल का सामना कर रहे विद्यार्थियों के परिजनों की आर्थिक मदद की जाए। विद्यार्थियों ने सरकार से इस मामले में उनके सिर पर लटक रही निर्वासन की तलवार से राहत दिलाने की मांग की है।
गत कुछ महीन पहले करीब 700 विद्यार्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद कनाडा की सरकार ने उनके निर्वासन का फैसला लिया था। इसके बाद छात्र संघर्ष की राह पर आ गए थे। उन्होंने वहां पक्का मोर्चा लगा दिया था। पंजाब व भारत सरकार ने मामले को प्रमुखता से कनाडा सरकार के सामने उठाया। इसके बाद विद्यार्थियों के निर्वासन को फिलहाल टाल दिया था। साथ ही अब कनाडा के कानून के मुताबिक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप में अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। उन्होंने पत्र में बृजेश मिश्रा समेत पांच एजेंटों का जिक्र किया, जिन्होंने इन विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में डाला। इस मामले में कनाडा में रह रहे एक्टिविस्ट जसप्रीत सिंह का कहना कि छात्र चाहते हैं कि धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों को पकड़ा जाए, साथ ही आरोपियों के बयान को जांच का हिस्सा बनाया जाए। पीड़ित एक छात्रा हरप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने पांच साल के बाद जब पीआर के लिए केस लगाया तो पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि एक बात पता चला कि बृजेश मिश्रा के पास इमिग्रेशन का लाइसेंस तक नहीं था। ऐसे में उनका केस मजबूत हुआ है, अगर सरकार सही तरीके से पैरवी करती है तो उन्हें राहत मिल सकती है। बता दें कि पंजाब सरकार ने पहले ही फैसला लिया है कि छात्रों का पक्ष मजबूती से रखने के लिए वहां वकीलों का एक पैनल तैयार किया जाएगा, जो कनाडा की एजेंसियों के सामने छात्रों का पक्ष रखेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कनाडा से निर्वासन के केस का सामना कर रहे विद्यार्थियों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। विद्यार्थियों ने मांग की है कि कनाडा की एजेंसियों के सामने उनके मामले को मजबूती से पेश किया जाए। इस तरह केस भविष्य में घटित न हो, इसके लिए राज्य सरकार स्पेशल टास्क फोर्स गठित करे। वहीं, कनाडा में मुश्किल का सामना कर रहे विद्यार्थियों के परिजनों की आर्थिक मदद की जाए। विद्यार्थियों ने सरकार से इस मामले में उनके सिर पर लटक रही निर्वासन की तलवार से राहत दिलाने की मांग की है।
गत कुछ महीन पहले करीब 700 विद्यार्थियों के दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद कनाडा की सरकार ने उनके निर्वासन का फैसला लिया था। इसके बाद छात्र संघर्ष की राह पर आ गए थे। उन्होंने वहां पक्का मोर्चा लगा दिया था। पंजाब व भारत सरकार ने मामले को प्रमुखता से कनाडा सरकार के सामने उठाया। इसके बाद विद्यार्थियों के निर्वासन को फिलहाल टाल दिया था। साथ ही अब कनाडा के कानून के मुताबिक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप में अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। उन्होंने पत्र में बृजेश मिश्रा समेत पांच एजेंटों का जिक्र किया, जिन्होंने इन विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में डाला। इस मामले में कनाडा में रह रहे एक्टिविस्ट जसप्रीत सिंह का कहना कि छात्र चाहते हैं कि धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों को पकड़ा जाए, साथ ही आरोपियों के बयान को जांच का हिस्सा बनाया जाए। पीड़ित एक छात्रा हरप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने पांच साल के बाद जब पीआर के लिए केस लगाया तो पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि एक बात पता चला कि बृजेश मिश्रा के पास इमिग्रेशन का लाइसेंस तक नहीं था। ऐसे में उनका केस मजबूत हुआ है, अगर सरकार सही तरीके से पैरवी करती है तो उन्हें राहत मिल सकती है। बता दें कि पंजाब सरकार ने पहले ही फैसला लिया है कि छात्रों का पक्ष मजबूती से रखने के लिए वहां वकीलों का एक पैनल तैयार किया जाएगा, जो कनाडा की एजेंसियों के सामने छात्रों का पक्ष रखेगा।
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