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टिप्पणी : नर्स ने मांगा मातृत्व अवकाश, हाईकोर्ट का जवाब- आपके दो सौतेले बच्चे, अब नहीं मिलेगी छुट्टी
Fri, 19 Mar 2021 02:36 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 19 Mar 2021 02:36 AM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआई की एक नर्स के मातृत्व अवकाश के आवेदन को रद्द करने के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले दो बच्चे उसके जैविक बच्चे नहीं हैं तो भी उसका खुद का पैदा हुआ बच्चा तीसरा बच्चा माना जाएगा। ऐसे में वह मातृत्व अवकाश की हकदार नहीं है।
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याचिका दाखिल करते हुए दीपिका सिंह ने बताया कि उसका विवाह 18 फरवरी, 2014 को अमर सिंह से हुआ था। अमर सिंह की पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी और उसके दो जीवित बच्चे थे। याची को पहला जैविक बच्चा 6 जून, 2019 को हुआ था। उसने 4 जून से 30 नवंबर 2019 तक के मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था। आवेदन यह कहते हुए खारिज किया गया था कि उसके पहले से दो जीवित बच्चे हैं और दो से कम जीवित बच्चों की स्थिति में ही यह अवकाश दिया जाता है।
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इसके खिलाफ याची ने कैट में याचिका दाखिल की थी। कैट ने पीजीआई के आदेश को सही मानते हुए याचिका खारिज कर दी। इसके खिलाफ याची हाईकोर्ट पहुंची। हाईकोर्ट ने कहा कि याची अपने पति के पहली पत्नी से हुए दो बच्चों की भी मां है। याची ने उनका ध्यान रखने के लिए चाइल्ड केयर लीव भी ली है। ऐसे में यह उसका पहला बच्चा है कहकर वह मातृत्व अवकाश का दावा नहीं कर सकती। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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