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Chandigarh: चंडीगढ़-मोहाली में बनी थी नारनौल में पकड़ी गई शराब, बैच नंबर खोलेगा माफिया का राज
Sat, 24 Jun 2023 08:32 AM IST
निवेदिता वर्मा
परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 24 Jun 2023 08:32 AM IST
सार
नारनौल के एसपी विक्रांत भूषण ने बताया कि पकड़े गए शराब के कैंटर पर महाराष्ट्र की नंबर प्लेट लगी हुई थी। जब नंबर की जांच कराई गई तो पता चला कि नंबर फर्जी है। कैंटर से बरामद शराब की बोतलों पर लगे लेवल पर ओएसिस डिस्टिलरीज लिमिटेड, चंडीगढ़ और चंडीगढ़ डिस्टिलर्स एंड बॉटलर्स लिमिटेड, एसएएस नगर (पंजाब) का नाम है।
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Spurious Liquor
- फोटो : Social Media
विस्तार
नारनौल (हरियाणा) में पकड़ी गई अवैध शराब चंडीगढ़ और मोहाली के बॉटलिंग प्लांट में बनी थी। नारनौल पुलिस ने जब बरामद शराब की पेटियां खोलीं तो अधिकतर बोतलें चंडीगढ़ मार्का की मिलीं, जिन पर सेल फॉर चंडीगढ़ लिखा था। ऐसे में साफ है कि कैंटर से बरामद शराब की 256 पेटियों को चंडीगढ़ से तस्करी कर गुजरात ले जाया जा रहा था। चंडीगढ़ पुलिस के दो बर्खास्त कांस्टेबलों की भूमिका भी इस ओर इशारा कर रही है। अब पुलिस बैच नंबर से शराब माफिया तक पहुंचने की तैयारी में है।
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उधर, नारनौल पुलिस मामले में फरार चल रहे बर्खास्त आरोपी कांस्टेबल अनिल की गिरफ्तारी के लिए चंडीगढ़ में दबिश दे रही है। गुरुवार देर रात सेक्टर-26 स्थित उसके घर पर पुलिस ने छापा मारा, लेकिन अनिल हाथ नहीं लगा। आरोपी फरार बताया जा रहा है। वहीं, पता चला है कि मूलरूप से भिवानी का रहने वाला कांस्टेबल अनिल शराब के इस अवैध कारोबार में हिस्सेदार था। चंडीगढ़ पुलिस अब उसका पुराना रिकार्ड खंगालने में जुटी है। बता दें कि इस मामले में लगभग सभी आरोपी भिवानी के हैं।
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नारनौल के एसपी विक्रांत भूषण ने बताया कि पकड़े गए शराब के कैंटर पर महाराष्ट्र की नंबर प्लेट लगी हुई थी। जब नंबर की जांच कराई गई तो पता चला कि नंबर फर्जी है। कैंटर से बरामद शराब की बोतलों पर लगे लेवल पर ओएसिस डिस्टिलरीज लिमिटेड, चंडीगढ़ और चंडीगढ़ डिस्टिलर्स एंड बॉटलर्स लिमिटेड, एसएएस नगर (पंजाब) का नाम है। इससे यह पता चलता है कि बरामद शराब चंडीगढ़ और एसएस नगर (मोहाली) में बनी है।
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नारनौल पुलिस अब शराब की बोतलों पर मिले बैच नंबर के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि पकड़ी गई अवैध शराब किसके लाइसेंस और परमिट पर दोनों बॉटलिंग प्लांटों से बाहर निकाली गई थी। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब चंडीगढ़ की शराब कहीं और पकड़ी गई है। पहले भी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में चंडीगढ़ मार्का शराब पकड़ी जा चुकी है। हाल ही में डड्डूमाजरा कॉलोनी में बने अवैध गोदाम से शराब की 2043 पेटियां पकड़ी गईं, जिन्हें उत्तराखंड, बिहार समेत दूसरे राज्यों में भेजा जाना था।
आखिर किसकी शह पर चल रहा तस्करी का धंधा
नाम न लिखने की शर्त पर एक शराब ठेकेदार ने तस्करी के पूरे खेल का खुलासा किया। बताया कि शहर में शराब ठेकेदार तीन जगह से शराब लेते हैं। शराब की तीन श्रेणियां हैं। पहली विदेशी ब्रांड (एल-1) की शराब होती है, जो विदेश से आयात होकर आती हैं। दूसरी श्रेणी में इंडियन मेड विदेशी ब्रांड की शराब होती है।
तीसरी श्रेणी में देसी या चीप ब्रांड की शराब होती है। चंडीगढ़ में देसी या चीप ब्रांड के शराब के अधिकतर बॉटलिंग प्लांट चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में मौजूद हैं। यहां अधिकतर बॉटलिंग प्लांट में स्प्रिट से शराब बनाई जाती है। हर बॉटलिंग प्लांट पर एक्साइज डिपार्टमेंट के एक अधिकारी की ड्यूटी होती है।
एक्साइज अधिकारी की इजाजत पर ही प्लांट में शराब बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाली स्प्रिट आती है। एक्साइज के अधिकारी को यह पता होता है कि कितने हजार लीटर स्प्रिट में कितने लीटर शराब बनेगी। अधिकारी ही ठेकेदार या दूसरे राज्य में एक्साइज ड्यूटी देकर प्लांट से शराब लेने आने वालों के परमिट की जांच करता है। परमिट एक गाड़ी में 300 पेटियों का है तो उससे ज्यादा एक भी बोतल बॉटलिंग प्लांट से बिना एक्साइज अधिकारी की अनुमति के बाहर नहीं जा सकती है।
शराब तस्कर सेटिंग के जरिए एक गाड़ी शराब का परमिट लेकर बॉटलिंग प्लांट से दो गाड़ी शराब निकाल ले जाते हैं। शराब तस्कर बॉटलिंग प्लांट से निकलने वाली एक गाड़ी की ड्यूटी फीस देकर दूसरी गाड़ी अंदर खाते निकालकर एक्साइज ड्यूटी की चोरी कर सरकार को मोटा चूना लगाते हैं। अंदर खाते निकलने वाली दूसरी गाड़ी के पास परमिट न होने के चलते वह अवैध शराब होती है।
पुलिस को संदेह, थाने में अनिल का मददगार
यह भी कहा जा रहा है कि अनिल अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकता है। पुलिस को संदेह है कि थाने में उसका कोई मददगार भी रहा होगा। चंडीगढ़ पुलिस भी मामले में एक जांच रिपोर्ट तैयार कर रही है। बता दें कि हरियाणा पुलिस ने कांस्टेबल रविंदर समेत तीन अन्य आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर लिया था। पुलिस ने अनिल समेत दो आरोपी फरार चल रहे हैं। बता दें कि नारनौल पुलिस ने 20 जून को कैंटर में तस्करी कर गुजरात ले जाई जा रही शराब की खेप पकड़ी थी, जिसे यूटी पुलिस के दो कांस्टेबल समेत छह लोग एस्कॉर्ट कर रहे थे। पुलिस ने मौके से चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल रविंद्र समेत चार को गिरफ्तार किया था जबकि कांस्टेबल अनिल समेत दो फरार हो गए थे। आरोपियों के खिलाफ नारनौल (हरियाणा) पुलिस ने धेाखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश रचने और एक्साइज एक्ट की धारा में केस दर्ज किया है।