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बिना नोटिस वैध हो सकेंगे अवैध निर्माण, पार्षद अनिल दुबे व चंद्रवती शुक्ला ने योजना बनाकर एडिशनल कमिश्नर को सौंपी
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चंडीगढ़। शहर की पुनर्वास कॉलोनियों में बने मकानों में अवैध निर्माण को वैध करने की योजना बनाई जा रही है। पार्षद अनिल दूबे और चंद्रवती शुक्ला ने एडिशनल कमिश्नर एसके जैन को इस संबंधी योजना बनाकर सौंपी है।
इसमें वन टाइम सेटलमेंट के साथ बिना नोटिस दिए सभी मकानों को वैध घोषित करने के लिए कहा गया है। पार्षद चंद्रवती शुक्ला ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के 95 प्रतिशत मकान दूसरे लोगों ने खरीद लिए हैं। अब जिन लोगों ने मकान लिया है उन्हें काफी समस्या हो रही है। इतने बड़े स्तर पर मकानों को तोड़ा नहीं जा सकता है। निगम या प्रशासन एक कमेटी बनाए। सर्वे कराकर जो जुर्माना अथवा अन्य कार्रवाई करनी है तो करे और मकानों को वैध किया जाए। इससे निगम को भी कुछ रेवेन्यू आ मिलेगा।
वहीं पार्षद अनिल दूबे ने कहा कि विकास नगर और सेक्टर-52 में 6 हजार मकान ऐसे हैं जिनमें जरूरत के हिसाब से निर्माण कार्य करवा लिया गया है। अब इन मकानों को तोड़ना ठीक नहीं है। वन टाइम सेटलमेंट के हिसाब से कोई पॉलिसी बनाकर इन लोगों को पूरा मालिकाना हक दिया जाए। अब सदन की बैठक में तय होगा कि इस पॉलिसी को किस तरह लागू करवाया जा सकता है अथवा यह होना संभव नहीं है। वहीं, दूसरी ओर पार्षदों का कहना है जुर्माने के रूप में जिन लोगों को प्रशासन ने घर आवंटित किए थे उन्हें डिबार किया जा सकता है। ताकि ऐसी समस्या भविष्य में उत्पन्न न हो। ज्ञात हो कि नीड बेस चेंज के लिए काफी दिनों तक लोगों ने प्रदर्शन किया था। राजनैतिक पार्टियों ने भी पूरा जोर लगाया था, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।
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इसमें वन टाइम सेटलमेंट के साथ बिना नोटिस दिए सभी मकानों को वैध घोषित करने के लिए कहा गया है। पार्षद चंद्रवती शुक्ला ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के 95 प्रतिशत मकान दूसरे लोगों ने खरीद लिए हैं। अब जिन लोगों ने मकान लिया है उन्हें काफी समस्या हो रही है। इतने बड़े स्तर पर मकानों को तोड़ा नहीं जा सकता है। निगम या प्रशासन एक कमेटी बनाए। सर्वे कराकर जो जुर्माना अथवा अन्य कार्रवाई करनी है तो करे और मकानों को वैध किया जाए। इससे निगम को भी कुछ रेवेन्यू आ मिलेगा।
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वहीं पार्षद अनिल दूबे ने कहा कि विकास नगर और सेक्टर-52 में 6 हजार मकान ऐसे हैं जिनमें जरूरत के हिसाब से निर्माण कार्य करवा लिया गया है। अब इन मकानों को तोड़ना ठीक नहीं है। वन टाइम सेटलमेंट के हिसाब से कोई पॉलिसी बनाकर इन लोगों को पूरा मालिकाना हक दिया जाए। अब सदन की बैठक में तय होगा कि इस पॉलिसी को किस तरह लागू करवाया जा सकता है अथवा यह होना संभव नहीं है। वहीं, दूसरी ओर पार्षदों का कहना है जुर्माने के रूप में जिन लोगों को प्रशासन ने घर आवंटित किए थे उन्हें डिबार किया जा सकता है। ताकि ऐसी समस्या भविष्य में उत्पन्न न हो। ज्ञात हो कि नीड बेस चेंज के लिए काफी दिनों तक लोगों ने प्रदर्शन किया था। राजनैतिक पार्टियों ने भी पूरा जोर लगाया था, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।
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