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पीजीआई में एंबुलेंस रैकेट की मनमानी पर सख्ती की तैयारी में प्रशासन

Wed, 08 Jun 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Jun 2016 01:37 AM IST
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illegal ambulances racket in PGI: staff of autopsy House will be changed
पीजीआई चंडीगढ़

एंबुलेंस ड्राइवरों की मनमर्जी और गुंडागर्दी रोकने के लिए पीजीआई ने सख्ती शुरू कर दी है। पीजीआई अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस में लगे कर्मचारियों की अदला-बदली (रोटेशन) होगी। पुलिस से मिले इनपुट के बाद पीजीआई ने इस दिशा में प्रस्ताव बनाना शुरू कर दिया है। पोस्टमार्टम हाउस में लगे कर्मचारी कई वर्षों से जमे हैं। पुलिस ने बताया कि उन्हें शक है कि पोस्टमार्टम हाउस के कुछ कर्मचारी मोर्चरी से सूचना फर्जी एंबुलेंस संचालकों के पास पहुंचा रहे थे।

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मोर्चरी के पास खड़ी होंगी एनजीओ की एंबुलेंस अधिकारियों ने बताया है कि अभी एंबुलेंस के लिए कोई जगह तय नहीं है, लेकिन अब मोर्चरी के पास एक जगह की तय की जाएगी, जिसमें एनजीओ की एंबुलेंस खड़ी हो सके। इस एंबुलेंस का एक रोस्टर भी तैयार होगा। कोशिश रहेगी कि एक बार में एक ही एनजीओ की गाड़ी खड़ी हो, ताकि  सभी का नंबर आए और किसी को परेशानी भी न हो। यह रोस्टर सभी रिसेप्शन पर मौजूद रहेगा। पीजीआई ने माता मनसा देवी सेवक दल, लाइफ लाइन, सेवा भारती, रेडक्रॉस यूटी, पंजाब और हरियाणा की एंबुलेंस को मोर्चरी से मरीज ले जाने की परमिशन दी है।
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डिस्पले बोर्ड पर रेट और मोबाइल नंबर होंगे
पीजीआई ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर सभी एनजीओ व एंबुलेंस के कॉन्टेक्ट नंबर डिस्पले किए जाएंगे। एनजीओ को कहा गया है कि वे अपनी रेट लिस्ट भी दें, ताकि डिस्पले बोर्ड में उसे पब्लिश किया जा सके। ये डिस्प्ले बोर्ड पोस्टमार्टम हाउस के अलावा इमरजेंसी, नेहरू बिल्डिंग, एडवांस ट्रामा सेंटर सहित अन्य स्थानों पर लगाए जाएंगे। इसके अलावा एंबुलेंस के नंबरों का प्रचार भी किया जाएगा।

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बाहर से एंबुलेंस बुलाई तो भरना होगा शपथ पत्र

illegal ambulances racket in PGI: staff of autopsy House will be changed
एंबुलेंस - फोटो : file photo

पीजीआई का मानना है कि जितने मरीज मोर्चरी या इमरजेंसी में आते हैं, उस हिसाब से एनजीओ के पास एंबुलेंस नहीं है। इस स्थिति में अगर एनजीओ की एंबुलेंस नहीं मिली तो मरीजों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा कई बार लोग पंचकूला या मोहाली से प्राइवेट एंबुलेंस मंगवाना चाहते हैं तो उन्हें मोर्चरी में एक फॉर्म भरना होगा, जिसमें उन्हें बताना होगा कि वह अपनी मर्जी से एंबुलेंस लेकर जा रहे हैं।

सीसीटीवी कैमरे लगेंगे और रिकॉर्ड भी होगा मेंटेन पीजीआई सिक्योरिटी ने अपने स्तर पर कुछ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मोर्चरी के बाहर दो सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि उन पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा मोर्चरी में आने वाली एंबुलेंस का नंबर और ड्राइवर के मोबाइल नंबर का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। इसके अलावा सिक्योरिटी ने भी अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है।

सोर्श की जांच के लिए पीजीआई ने बनाई कमेटी पीजीआई ने मंगलवार को एक पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। डायरेक्टर डॉ. वाईके चावला के निर्देश पर बनाई कमेटी मामले की जांच करेगी और एक महीने में रिपोर्ट सौंपेंगी। कमेटी का चेयरमैन डॉ. अरविंद राजवंशी को बनाया है। कमेटी में डॉ. एके भल्ला, एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर, लॉ अफसर सहित अन्य को शामिल किया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी।

जीएमसीएच-32 में भी चल रहा खेल
पीजीआई की तरह सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच-32) में भी प्राइवेट एंबुलेंस और टैक्सी संचालकों की दादागिरी का खेल चल रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक एनजीओ के ड्राइवर ने बताया कि उनकी एनजीओ का नंबर इमरजेंसी में पब्लिश है। मुश्किल से एक कॉल आती है, जबकि पहले पांच से छह कॉल आ जाती थीं। इमरजेंसी से मरीजों की सूचना पहले ही प्राइवेट गाड़ियों वालों को दे दी जाती है और वे मरीजों से मनमाना किराए वसूलते हैं। प्राइवेट टैक्सी और एंबुलेंस के कारिंदे इमरजेंसी में ही घूमते रहते हैं या फिर अंदर के कर्मचारियों से उनकी सेटिंग होती है।

इमरजेंसी में लिखे हैं प्राइवेट गाड़ियों के नंबर
जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी में इन्क्वायरी काउंटर में एंबुलेंस के नंबर लिखे हैं। इसमें गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब, रेडक्रॉस, रोटरी क्लब, चंडीगढ़ सेवा सोसायटी और लाइफ लाइन के नंबर पब्लिश हैं, लेकिन कुछ प्राइवेट नंबर भी हैं, जो टैक्सी स्टैंड के हैं। उन नंबर पर जब अंबाला चलने की बात की गई तो उन्होंने कहा कि चलेंगे। अंबाला के लिए 1500 रुपये लगेंगे, जबकि रेडक्रॉस की एंबुलेंस साढ़े 11 सौ रुपये में चलने के लिए तैयार हो गई।

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