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Chandigarh News: ट्रॉमा में 5 मिनट के अंदर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई तो ब्रेन हो सकता है डैमेज
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चंडीगढ़। ट्रॉमा के केस में घायल के ब्रेन में 3 से 5 मिनट के अंदर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई तो ब्रेन डैमेज होने का खतरा रहता है। घायल के मुंह की सफाई कर तत्काल ऑक्सीजन की नली डाली जानी चाहिए। यह जानकारी पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर काजल जैन ने रविवार को एयरवेज में ट्रॉमा इमरजेंसी पर आयोजित कार्यशाला में दी।
उन्होंने बताया कि ट्रॉमा केस में घायल को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। कई बार उसके मुंह में खून भरा होता है। दांत टूटे होते हैं। जबड़ा भी टूट चुका होता है। घायल अवस्था में पेट का खाना भी मुंह में आ जाता है। हड्डी के छोटे-छोटे टुकड़े भी मुंह में भर जाते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को सांस की नली का रास्ता नहीं दिखाई देता। उस दौरान डॉक्टर घायल की गंभीर स्थिति को देखकर यह तय करने में देरी कर देते हैं कि उसके मुंह में ऑक्सीजन की पाइप को कैसे डालना है। उस दौरान एक-एक सेकंड बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में त्वरित निर्णय के लिए ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें डॉक्टर को मुंह की सफाई के बाद ऑक्सीजन पाइप डालने का तरीका समझाने के साथ ऐसा न कर पाने पर उसे घायल के गर्दन के आगे की तरफ कट लगाकर पाइप डालने की तकनीक भी समझाई गई। ऑक्सीजन पाइप डालने की यह प्रक्रिया एक मिनट के अंदर पूरी होनी चाहिए। ट्रॉमा के केस में घायल के मुंह में सांस की नली दिखाई न देने की स्थिति में किन उपकरणों का उपयोग लाभदायक सिद्ध हो सकता है, यह भी बताया गया। कार्यक्रम में डॉ. सुमन अरोड़ा, डॉ. निधि भाटिया, डॉ. जितेंद्र कौर मक्कड़, डॉ. पंकज कुंद्रा और डॉ. अमित शाह ने भी एयरवेज एंड ट्रॉमा इमरजेंसी से जुड़ी जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि ट्रॉमा केस में घायल को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। कई बार उसके मुंह में खून भरा होता है। दांत टूटे होते हैं। जबड़ा भी टूट चुका होता है। घायल अवस्था में पेट का खाना भी मुंह में आ जाता है। हड्डी के छोटे-छोटे टुकड़े भी मुंह में भर जाते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को सांस की नली का रास्ता नहीं दिखाई देता। उस दौरान डॉक्टर घायल की गंभीर स्थिति को देखकर यह तय करने में देरी कर देते हैं कि उसके मुंह में ऑक्सीजन की पाइप को कैसे डालना है। उस दौरान एक-एक सेकंड बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में त्वरित निर्णय के लिए ही यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें डॉक्टर को मुंह की सफाई के बाद ऑक्सीजन पाइप डालने का तरीका समझाने के साथ ऐसा न कर पाने पर उसे घायल के गर्दन के आगे की तरफ कट लगाकर पाइप डालने की तकनीक भी समझाई गई। ऑक्सीजन पाइप डालने की यह प्रक्रिया एक मिनट के अंदर पूरी होनी चाहिए। ट्रॉमा के केस में घायल के मुंह में सांस की नली दिखाई न देने की स्थिति में किन उपकरणों का उपयोग लाभदायक सिद्ध हो सकता है, यह भी बताया गया। कार्यक्रम में डॉ. सुमन अरोड़ा, डॉ. निधि भाटिया, डॉ. जितेंद्र कौर मक्कड़, डॉ. पंकज कुंद्रा और डॉ. अमित शाह ने भी एयरवेज एंड ट्रॉमा इमरजेंसी से जुड़ी जानकारी दी।
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