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चंडीगढ़वासियों सावधान! अब मास्क व ग्लव्ज इधर-उधर फेंका तो लगेगा जुर्माना, निर्देश जारी
Mon, 22 Jun 2020 12:31 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2020 12:31 PM IST
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मास्क, ग्लव्ज फेंकने पर लगेगा जुर्माना
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ नगर निगम ने अब मेडिकल वेस्ट जैसे मास्क, ग्लव्ज व एप्रेन आदि फेंकने के लिए शहर के सभी सहज सफाई केंद्रों पर अलग से बॉक्स रखवा दिए हैं। साथ ही लोगों से अपील की है कि मेडिकल वेस्ट को अलग से पैकेट बनाकर ही सफाई कर्मी को दें। कोई व्यक्ति इस्तेमाल किया हुआ मास्क व ग्लव्ज इधर-उधर फेंकता मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शहर में अक्सर देखा जा रहा था कि लोग लगातार सड़कों पर मास्क, ग्लव्ज व एप्रेन फेंक रहे थे। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका थी। लोगों का कहना था कि कहीं भी ऐसे बॉक्स नहीं हैं, जहां यह मेडिकल वेस्ट अलग से फेंका जाए। ऐसे में निगम ने सभी सहज सफाई केंद्रों पर एक-एक पीला बॉक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें लोग अपना मेडिकल वेस्ट फेंक सकते हैं।
वहीं लोगों को अब मेडिकल वेस्ट भी सूखे और गीले कचरे की तरह अलग करके देना होगा ताकि उसे निस्तारण केंद्र तक आसानी से भेजा जा सके। ऐसा न करने वालों के खिलाफ चालान काटने की कार्रवाई की जाएगी।
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इस बारे में नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने कहा कि शहर में लोग मास्क व ग्लव्ज इधर-उधर फेंक रहे थे। उनके पास विकल्प भी नहीं था अलग कचरा देने का। अब हर सफाई केंद्र में एक-एक पीला बॉक्स लगा दिया है ताकि लोग मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग डाल सकें।
इस बारे में डॉ. एपी सिंह, एमओएच ने कहा कि लोगों से अपील की है कि कर्मचारियों को मेडिकल वेस्ट अलग से दें। न दे पाएं तो अपने सेक्टर सफाई केंद्र में डालें। ऐसा न करने पर अब जुर्माना लगाया जाएगा। कोरोना से बचाव के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है।
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शहर में अक्सर देखा जा रहा था कि लोग लगातार सड़कों पर मास्क, ग्लव्ज व एप्रेन फेंक रहे थे। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका थी। लोगों का कहना था कि कहीं भी ऐसे बॉक्स नहीं हैं, जहां यह मेडिकल वेस्ट अलग से फेंका जाए। ऐसे में निगम ने सभी सहज सफाई केंद्रों पर एक-एक पीला बॉक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें लोग अपना मेडिकल वेस्ट फेंक सकते हैं।
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वहीं लोगों को अब मेडिकल वेस्ट भी सूखे और गीले कचरे की तरह अलग करके देना होगा ताकि उसे निस्तारण केंद्र तक आसानी से भेजा जा सके। ऐसा न करने वालों के खिलाफ चालान काटने की कार्रवाई की जाएगी।
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इस बारे में नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने कहा कि शहर में लोग मास्क व ग्लव्ज इधर-उधर फेंक रहे थे। उनके पास विकल्प भी नहीं था अलग कचरा देने का। अब हर सफाई केंद्र में एक-एक पीला बॉक्स लगा दिया है ताकि लोग मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग डाल सकें।
इस बारे में डॉ. एपी सिंह, एमओएच ने कहा कि लोगों से अपील की है कि कर्मचारियों को मेडिकल वेस्ट अलग से दें। न दे पाएं तो अपने सेक्टर सफाई केंद्र में डालें। ऐसा न करने पर अब जुर्माना लगाया जाएगा। कोरोना से बचाव के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है।
प्रतिदिन 13 गाड़ियों से पहुंचता है 100 किलो मेडिकल वेस्ट
एमओएच डॉ. एपी सिंह के अनुसार निगम ने शहर के क्वारंटीन सेंटर व घरों से मेडिकल वेस्ट देने के लिए 20 गाड़ियां लगाईं हैं। इनमें से अभी 13 गाड़ियां ही चल रहीं हैं। शेष 7 अतिरिक्त हैं। इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित प्लांट में ही मेडिकल वेस्ट का निस्तारण होता है, जिसे एक निजी कंपनी संचालित करती है।
पहले कंपनी केवल 40 किग्रा तक ही मेडिकल वेस्ट लेती थी। उसके बाद कंपनी ने दो शिफ्ट में काम शुरू कराया और 100 किग्रा तक प्रतिदिन पीपीई किट, मास्क व ग्लव्ज लेने लगी। बीच में मरीजों की संख्या कम हो गई थी। अब फिर बढ़ गई है। रविवार को टीम ने 397 पीले बैग घरों से लिए थे। शनिवार को भी 378 बैग लिए थे।
मेडिकल वेस्ट कम हुआ तो निगम ने खुद निस्तारण शुरू किया
निगम पिछले तीन दिनों से अपने कचरे को स्वयं ही निस्तारित कर रहा है। शहर से आने वाले कचरे को निगम तीन दिनों तक लगातार सैनेटाइज करता है। उसके बाद सामान्य पद्धति से उसका निस्तारण कर देते हैं। निगम के अनुसार इसमें डब्ल्यूएचओ के मानकों का पूरा ध्यान में रखा जा रहा है। अब मरीजों की संख्या कम होने के बाद खुद ही निस्तारण कर ले रहे हैं।
पहले कंपनी केवल 40 किग्रा तक ही मेडिकल वेस्ट लेती थी। उसके बाद कंपनी ने दो शिफ्ट में काम शुरू कराया और 100 किग्रा तक प्रतिदिन पीपीई किट, मास्क व ग्लव्ज लेने लगी। बीच में मरीजों की संख्या कम हो गई थी। अब फिर बढ़ गई है। रविवार को टीम ने 397 पीले बैग घरों से लिए थे। शनिवार को भी 378 बैग लिए थे।
मेडिकल वेस्ट कम हुआ तो निगम ने खुद निस्तारण शुरू किया
निगम पिछले तीन दिनों से अपने कचरे को स्वयं ही निस्तारित कर रहा है। शहर से आने वाले कचरे को निगम तीन दिनों तक लगातार सैनेटाइज करता है। उसके बाद सामान्य पद्धति से उसका निस्तारण कर देते हैं। निगम के अनुसार इसमें डब्ल्यूएचओ के मानकों का पूरा ध्यान में रखा जा रहा है। अब मरीजों की संख्या कम होने के बाद खुद ही निस्तारण कर ले रहे हैं।