IAS कासनी ने दिखाए खेमका जैसे तेवर
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हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी ने आशंका जताई है कि उनका फोन टेप हो रहा है। साथ ही भरोसा जताया है कि अब तक उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी को व्यक्तिगत ठेस पहुंचाए। हां सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई है और उठाते रहेंगे। सीआईडी लगातार उनका पीछा कर रही है।
इस बात से वे अवगत हैं। जहां भी जाते हैं उन्हें कुछ लोग फालो करते हुए दिखते हैं। अमर उजाला से बातचीत में कासनी ने कहा कि यह विवाद उनकी तरफ से नहीं निपटा है। सरकार गलत करेगी तो वे बोलते रहेंगे। गलत ढंग से की जा रही जिन नियुक्तियों के खिलाफ मैने आवाज उठाई है, उससे कम से कम अधिकारी आगे ऐसे काम करने से डरेंगे।
उनके इस कदम से अफसरशाही और सरकार पर दबाव तो पड़ा है। उन्होंने कहा कि मेरी तरफ से विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। यदि आगे भी गलत काम होगा तो वे फाइलों पर लिखते रहेंगे।
मेरे माध्यम से नहीं गई शपथ ग्रहण की फाइल
सेवा के अधिकार आयोग की एक अगस्त को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के बारे में कासनी ने कहा है कि प्रशासनिक सुधार विभाग में ऐसा कोई फैसला नहीं किया गया है। यदि शपथ ग्रहण समारोह है तो फाइल मेरे माध्यम से जानी चाहिए थी। रविवार को मेरे पास कोई फाइल नहीं आई है। उन्होंने कहा कि शपथ के लिए नए राज्यपाल की अनुमति जरूरी है।
आईएएस अधिकारियों ने की कासनी की हौसलाअफजाई:
ऐसे अधिकारी जो सरकारी तंत्र में रह कर सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते उन्होंने वीरवार को प्रदीप कासनी की पीठ ठोकी। कासनी ने बताया कि कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कहा है कि उन्होंने सही कदम उठाया है। ऐसा किया जाना जरूरी था।
अशोक खेमका जैसे हैं कासनी के तेवर
हरियाणा के विभिन्न आयोगों की नियुक्ति पर सवाल उठाकर चर्चा में आए आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी को मजाक पसंद नहीं है। 30 साल के सेवा काल में उनका 40 बार तबादला हो चुका है। लेकिन आज तक उन्हें किसी जिले में डीसी नहीं लगाया गया।
कासनी की मां चरखी दादरी में दो कमरों के घर में रहती है। पिता सामाजिक कार्यकर्ता थे और इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए। तेवर भी अशोक खेमका जैसे। कासनी मुख्य सचिव एससी चौधरी को एसएमएस मामले में किसी भी सूरत में माफ करने को तैयार नहीं हैं।
पूरे प्रकरण से बेहद आहत हैं कासनी
अमर उजाला से बातचीत में कासनी पूरे प्रकरण से आहत दिखे। कासनी का मानना है कि हम जिस तरह के गणतंत्र में जी रहे हैं उसमें कटु वास्तविकता का अनुभव तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें जुबान पर नहीं ला सकते।
कासनी का दावा है कि मुख्य सचिव ने जो एसएमएस किया है उस तरह की भाषा वे इस्तेमाल नही कर सकते। बहुत कुरेदने पर एक बात जरूर कहते हैं कि ऐसे कोई अपनी गर्दन तलवार के नीचे नहीं रखता। तीस वर्ष के सेवा काल में 40 से ज्यादा स्थानांतरण झेल चुके कासनी 1997 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
पदोन्नति भी उन्होंने अदालतों के माध्यम से लड़ाई लड़ कर ली है। 1980 में हरियाणा सिविल सेवा में एचसीएस अधिकारी के तौर पर उनका चयन हुआ। 1984 में उन्होंने सेवाएं ज्वाइन की। जिसके बाद 1997 में पदोन्नति पाई।
केंद्र तक पहुंचा कासनी का विवाद
हरियाणा के आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी का विवाद अब केंद्र तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार इस मामले में कभी भी दखल दे सकती है। केंद्रीय कार्मिक तथा प्रशिक्षण मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी आईएएस के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। केंद्र ने यदि इस मामले में दखल दिया तो कासनी को राहत जरूर मिलेगी।
केंद्र की इस मामले में दखल देने की मंशा इसीलिए और बलवती हो गई है, क्योंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है। हरियाणा की सरकार पहले ही केंद्र के निशाने पर है। विधानसभा चुनाव आते देख भाजपा इसको चुनावी मुद्दा बना सकती है। भाजपा के बाद अब इनेलो की बारी है।
इनेलो भी शीघ्र ही इस मामले को लेकर राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी केपास अपना विरोध दर्ज करवाएगी। उधर, चीफ सेक्रेट्री इस मामले में अपना कदम पीछे हटा चुके हैं, लेकिन फिलहाल यह विवाद हल होता नहीं दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला भी पत्र लिख कर इन नियुक्तियों को गलत ठहरा चुके हैं।