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हरियाणाः 53वीं बार स्थानांतरित किए गए आईएएस अशोक खेमका, अब मिला पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग
Thu, 28 Nov 2019 09:24 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 Nov 2019 09:24 AM IST
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आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : file photo
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हरियाणा कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को एक बार फिर स्थानांतरित कर दिया गया है और यह उनका 53वां तबादला है। खेमका को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव के पद से हटा दिया गया है। अब उन्हें अभिलेख, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभागों का प्रधान सचिव बनाया गया है।
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मार्च 2019 में ही उन्हें खेल एवं युवा मामले विभाग से हटाकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव का जिम्मा सौंपा गया था। बीते साल नवंबर में उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव पद से हटाकर खेल एवं युवा मामले के विभाग में तैनात किया गया था।
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दरअसल, हरियाणा की नई गठबंधन सरकार में भी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक खेमका का बुरा दौर जारी है। खेमका को नई सरकार के पहले फेरबदल में ही तबादले का सामना करना पड़ा है। 1991 बैच के आईएएस अधिकारी खेमका अपने 28 साल के कार्यकाल में इससे पहले 52 तबादले झेल चुके हैं।
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आठ महीने पहले ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में उनकी पोस्टिंग हुई थी। तब उनके पास खेल विभाग भी था, लेकिन पूर्व भाजपा सरकार ने चुनावों से पहले उनसे वह भी वापस लेकर आईएएस आनंद मोहन शरण को दे दिया था। 53वें तबादले पर खेमका की टीस सामने आई है।
खेमका ने बुधवार सुबह तबादला होने के बाद दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पर ट्वीट किया, जिसमें उनका दर्द छलक गया। उन्हें पुरातत्च, अभिलेखागार व संग्रहालय विभाग में पोस्टिंग दी गई है, यह विभाग उन्हें सात साल बाद फिर मिला है। कम महत्व के इस विभाग में पूर्व हुड्डा सरकार ने भी 2012 में पोस्टिंग दी थी।
अब भाजपा-जजपा सरकार ने भी उन्हें खुड्डेलाइन पोस्टिंग दे दी है। अभिलेखागार विभाग राज्य मंत्री कमलेश ढांडा व पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राज्य मंत्री अनूप धानक के पास हैं। उन्होंने तबादला सूची जारी होने से पहले सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर भी महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर चली उठापटक पर ट्वीट किया गया था।
जिसमें उन्होंने लिखा था कि विधायकों की खरीद फरोख्त, उन्हें बंधक बनाना सभी जनसेवा के लिए किया जाता है। जनसेवा जैसा सुअवसर छोड़ा नहीं जाता, वंचित रहने से ह्रदय में पीड़ा जो होती है। होने दो, खूब द्वंद्व होने दो। साझेदारी में तो मिल बांटकर जनसेवा की जाएगी।
जहां गए, घोटाले किए उजागर, हुड्डा सरकार में झेले 22 तबादले
खेमका की तासीर ही कुछ ऐसी है कि वह जिस भी विभाग में जाते हैं, वहां पर घोटाले पकड़ ही लेते हैं। पूर्व हुड्डा सरकार में उन्हें बीज विकास निगम में घोटाला पकड़ा, 2012 में अरावली क्षेत्र में फरीदाबाद के कोट गांव में 31 सौ एकड़ जमीन की चकबंदी रोकी व रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी की डीएलएफ के साथ डील को रद्द कर दिया।
इससे बवाल मच गया और खेमका साइडलाइन कर दिए गए। हुड्डा सरकार के दस साल में खेमका को 22 तबादलों का सामना करना पड़ा। पूर्व भाजपा सरकार में खेमका ने समाज कल्याण विभाग में तीन लाख पेंशनर्स की पेंशन रोक दी। खेल विभाग में अनेक अनियमितताएं उजागर कीं। इससे वह भाजपा सरकार के निशाने पर आ गए।
सीएम मनोहर लाल के साथ भी खेमका एसीआर के नंबर को लेकर सीधा टकरा चुके हैं। मुख्य सचिव ने दस में से 8.22 नंबर दिए थे, जिन्हें पूर्व खेल मंत्री विज ने 9.22 कर दिया था। सीएम ने यह अंक घटाकर 9 कर दिए थे। जिसे खेमका ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में उन्हें छह तबादलों का सामना करना पड़ा।
तबादले के बाद खेमका का ट्वीट
फिर तबादला। लौटकर फिर वहीं। कल यानि 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया गया। आज यानि बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं नियमों को एक बार और तोड़ा गया। कुछ प्रसन्न होंगे। अंतिम ठिकाने जो लगा। ईमानदारी का ईनाम जलालत।
इससे बवाल मच गया और खेमका साइडलाइन कर दिए गए। हुड्डा सरकार के दस साल में खेमका को 22 तबादलों का सामना करना पड़ा। पूर्व भाजपा सरकार में खेमका ने समाज कल्याण विभाग में तीन लाख पेंशनर्स की पेंशन रोक दी। खेल विभाग में अनेक अनियमितताएं उजागर कीं। इससे वह भाजपा सरकार के निशाने पर आ गए।
सीएम मनोहर लाल के साथ भी खेमका एसीआर के नंबर को लेकर सीधा टकरा चुके हैं। मुख्य सचिव ने दस में से 8.22 नंबर दिए थे, जिन्हें पूर्व खेल मंत्री विज ने 9.22 कर दिया था। सीएम ने यह अंक घटाकर 9 कर दिए थे। जिसे खेमका ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में उन्हें छह तबादलों का सामना करना पड़ा।
तबादले के बाद खेमका का ट्वीट
फिर तबादला। लौटकर फिर वहीं। कल यानि 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया गया। आज यानि बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं नियमों को एक बार और तोड़ा गया। कुछ प्रसन्न होंगे। अंतिम ठिकाने जो लगा। ईमानदारी का ईनाम जलालत।