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एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला: मानवाधिकार आयोग ने पीड़ितों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश
Thu, 22 Jul 2021 09:11 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 22 Jul 2021 09:11 PM IST
सार
पंजाब के बठिंडा में पिछले साल थैलेसीमिया पीड़ितों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला सामने आया था। जांच में सामने आया था कि सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मियों ने आपसी रंजिश के कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची एवं गर्भवती महिला को एचआईवी रक्त चढ़ाया था। इस मामले में थाना कोतवाली पुलिस ने ब्लड बैंक कर्मियों के खिलाफ केस भी दर्ज किया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
विस्तार
बठिंडा सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची व महिला को लापरवाही से एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 27 अगस्त 2021 तक पीड़ितों को चार-चार लाख रुपये की मुआवजा राशि जारी कर रिकॉर्ड की कॉपी आयोग को भेजने का निर्देश दिया है। यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस मामले में तय समय तक बच्ची व महिला को मुआवजा राशि नहीं दी तो आयोग सख्त कार्रवाई करने को मजबूर होगा।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कानूनी मामलों के सहायक रजिस्ट्रार दविंद्रा कुंद्रा ने जारी नोटिस में कहा कि आयोग को जालंधर के कुलवंत सिंह नागरा की शिकायत प्राप्त हुई थी। इसमें उन्होंने बठिंडा के सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में एक महिला व थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने की जानकारी दी थी। इसमें शिकायतकर्ता ने कहा था कि ब्लड बैंक के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते दोनों को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया, जिसमें आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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यह लापरवाही किसी भी सूरत में माफी लायक नहीं है। मामले में मरीजों को जहां चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए, वहीं लापरवाह लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार व उसके विभाग की तरफ से जांच व कार्रवाई को लेकर की गई देरी व लापरवाही पर भी सख्त टिप्पणी की है।
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आयोग ने कहा कि सरकार मात्र कानूनी व विभागीय कार्रवाई कर मामले में खानापूर्ति नहीं कर सकती है, बल्कि सेहत कर्मियों की लापरवाही के कारण जो मानसिक व शारीरिक वेदना परिजनों व पीड़ितों को झेलनी पड़ रही है, उसे कम नहीं किया जा सकता है।
सरकार का फर्ज था कि प्रभावित लोगों को बिना देरी मुआवजा दिया जाता लेकिन इसमें एक साल से अधिक समय तक की देरी करना लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने पंजाब सरकार ने इस मामले में प्रभावित व्यक्तियों को 27 अगस्त 2021 से पहले मुआवजे की राशि जारी करने का निर्देश दिया।