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चंडीगढ़ के कर्मचारियों को करना होगा अपने आशियाने के लिए इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:52 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को हाउसिंग वेल्फेयर स्कीम के तहत आशियाना पाने के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी थी, इसलिए इसे कैबिनेट के पास भेजा गया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया जल्दी पूरा करने का प्रयास किया जाए और अगली सुनवाई पर हाउसिंग बोर्ड व प्रशासन इस स्कीम से जुड़ा पूरा रिकार्ड कोर्ट में पेश करें।
बुधवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही केंद्र सरकार से हाइकोर्ट ने जवाब मांगा। हाईकोर्ट के सवाल का जवाब देते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने बताया कि हाउसिंग वेलफेयर स्कीम की मंजूरी अब कैबिनेट से लेनी होगी और इसे कैबिनेट को भेज दिया गया है। ऐसे में कैबिनेट की मुहर के बाद से इसका रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, इसमें कुछ समय लग सकता है। हाइकोर्ट में बुधवार को दी गई जानकारी से कर्मचारियों की उम्मीदों को एक बार फिर से झटका लगा है और ऐसे में अपने आशियाने के लिए उन्हें और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ प्रशासन ने भी इस स्कीम के बारे में जवाब मांगा। इस दौरान संतोषजनक उत्तर न मिल पाने पर हाईकोर्ट ने दोनों से अगली सुनवाई के दौरान जमीन की अलॉटमेंट से लेकर पूरा रिकार्ड अगली सुनवाई के दौरान पेश करने को कहा है।
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बुधवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही केंद्र सरकार से हाइकोर्ट ने जवाब मांगा। हाईकोर्ट के सवाल का जवाब देते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने बताया कि हाउसिंग वेलफेयर स्कीम की मंजूरी अब कैबिनेट से लेनी होगी और इसे कैबिनेट को भेज दिया गया है। ऐसे में कैबिनेट की मुहर के बाद से इसका रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, इसमें कुछ समय लग सकता है। हाइकोर्ट में बुधवार को दी गई जानकारी से कर्मचारियों की उम्मीदों को एक बार फिर से झटका लगा है और ऐसे में अपने आशियाने के लिए उन्हें और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ प्रशासन ने भी इस स्कीम के बारे में जवाब मांगा। इस दौरान संतोषजनक उत्तर न मिल पाने पर हाईकोर्ट ने दोनों से अगली सुनवाई के दौरान जमीन की अलॉटमेंट से लेकर पूरा रिकार्ड अगली सुनवाई के दौरान पेश करने को कहा है।
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