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करों के बोझ से दबे होटल उद्योग को नई सरकार से उम्मीदें
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Thu, 24 Apr 2014 12:34 PM IST
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देश का होटल उद्योग करों के बोझ में बुरी तरह से छटपटा रहा है। उद्योग पर औसतन बीस फीसदी कर हैं, जबकि कहीं यह 35 फीसदी तक भी हैं। इससे जहां विदेशी पर्यटकों की दिक्कतें बढ़ रही हैं, वहीं उद्योग की ग्रोथ पर भी असर हो रहा है।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने का भरोसा दिलाया है इसलिए होटल उद्योग को एनडीए यानी मोदी सरकार से काफी उम्मीदें हैं।
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होटल उद्योग का तर्क है कि सरकार किसी भी पार्टी की बने, होटल उद्योग को करों में राहत, एक समान कर प्रणाली, सिंगल विंडो क्लीयरेंस समेत एक विशेष पैकेज दिया जाए। इसके लिए बाकायदा होटल एसोसिएशन ने पेपर भी तैयार कर लिया है।
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होटल उद्योग के अनुसार भारत में औसतन कर बीस फीसदी है। पड़ोसी देशों मसलन मलेशिया में छह फीसदी, सिंगापुर में सात फीसदी, हांगकांग में जीरो फीसदी, थाईलैंड में सात फीसदी, जापान में पांच फीसदी, टर्की में आठ फीसदी, नेपाल में सात फीसदी और श्रीलंका में छह फीसदी है।
होटल एसोसिएशन ने भी इसे सात फीसदी करने की वकालत की है। एसोसिएशन का तर्क है कि ऐसा करने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी राजस्व में भी इजाफा होगा।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ नॉर्दर्न इंडिया के प्रधान गिरिश ओबेराय का तर्क है कि एक होटल खोलने से पहले उद्यमी को सौ तरह के लाइसेंस लेने पड़ रहे हैं। इंस्पेक्टरी राज से मुक्ति दिलाना भी अनिवार्य है। ओबेराय बुधवार को होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब की फार्च्यून क्लासिक में आयोजित बैठक में बातचीत कर रहे थे।
ओबेराय ने आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि देश में हर साल घरेलू पर्यटक 1452 मिलियन इधर उधर जाते हैं। इनमें से धार्मिक पर्यटन की संख्या अधिक है। केवल 12 मिलियन विदेशी पर्यटक ही भारत आते हैं जो कुल पर्यटन का केवल 0.62 फीसदी है। अगले पांच साल में इसे एक फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए एक लाख करोड़ के निवेश की जरूरत है।
वर्ष 2012-13 में सबसे अधिक विदेशी निवेश 3.25 बिलियन डालर भारत में आया है। अगले पांच साल तक यह उद्योग सालाना दस मिलियन युवाओं को रोजगार देगा जबकि फिलहाल 53 मिलियन लोग पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं।