होली विशेष: यहां 570 साल से, बचते हैं गुलाल से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के दो गांव ऐसे हैं, जहां 570 साल ऐसी घटना घटी कि आज तक यहां धुलेंडी के दिन फाग नहीं खेला जाता। नारनौल जिले के गांव डालनवास और गादड़वास में 570 साल ऐसी घटना घटी कि आज तक यहां धुलेंडी के दिन फाग नहीं खेला जाता है।
गांव में इस दिन दादी सती की याद में बने मंदिर पर पूजा-अर्चना के साथ एक विशाल मेले का आयोजन कर ग्रामीण दादी सती के प्रति श्रद्धा दिखाते हैं। धुलेंडी के अगले दिन ग्रामीण रंग खेलते हैं।
सतनाली-महेंद्रगढ मुख्य सड़क मार्ग पर कस्बे से 11 किमी दूर गांव डालनवास और गादड़वास बसे हैं। लोग यहां धुलेंडी के दिन एक दूसरे पर रंग नहीं डालते। करीब 570 साल पहले इस दिन गांव में एक युवती अपने होने वाली पति की चिता में सती हो गई थी। उसके बाद से गांव के लोग धुलेंडी के दिन रंग नहीं खेलते।
दोबड़ा की रहने वाली थी युवती
गांवों के बुजुर्गों ने बताया कि गांव माधोगढ़ के माडूराम का रिश्ता राजस्थान के गांव दोबड़ा की युवती से तय हुआ था। विवाह की तिथि निश्चित नहीं हुई थी। होली के दिन माधोगढ़ निवासी माड़ू सिंह दोस्तों के साथ खेलने के लिए डालनवास के बाठपाना मोहल्ले में आया था।
रंग खेलते समय माडूराम के सिर पर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। दोबड़ा की जिस युवती से माडूराम का रिश्ता तय हुआ था, उसे किसी अनहोनी का आभास हुआ और उसने परिजनों से इस बारे में बात कर अपने होने वाले पति से मिलने की इच्छा जाहिर की।
...उन्हें चर्म रोग से मुक्ति मिलती है
परिजनों ने इसे युवती का सपना मान कर यकीन नहीं किया और रीति-रिवाज के अनुसार उसे शादी पहले होने वाले पति से मिलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद युवती ने शादी के लिए खरीदे गहने और वस्त्र पहने और होने वाले पति से मिलने की जिद पर अड़ी रही। उसे परिजनों ने एक कमरे में बंद कर दिया।
अपने आप खुला दरवाजा
बुजुर्गों ने बताया कि कुछ देर बाद कमरे का दरवाजा अचानक खुला और युवती अपने पति से मिलने चल दी। परिजनों ने ऊंट-घोड़े दौड़ाकर उसका पीछा किया, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाए। घर से निकलने के बाद युवती गांव डालनवास में पहुंच गई।युवती जब वहां पहुंची तो माडूराम के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी।
युवती यह समाचार सुनते ही बेहोश हो गई। जब उसे होश आया तो माड़ूराम की चिता को मुखाग्नि दी जा रही थी। इसके बाद युवती होने वाले पति की जलती चिता में कूदकर सती हो गई। युवती के ऐसा कदम उठाने पर डालनवास, माधोगढ, बारड़ा सहित क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
ग्रामीणों को दिया था वरदान
ग्रामीणों का ऐसा मानना है कि युवती ने सती होने से पहले गांव के लोगों को वरदान दिया कि गांव में धुलेंडी के दिन रंग न खेलने और जहां वह सती हो रही है पूजा करने पर चर्म रोगों से मुक्ति मिलेगी। आज भी मान्यता है कि दादी सती के मेले में जो लोग आस्था से उनकी पूजा अर्चना करते हैं और मन्नत मांगते हैं उन्हें चर्म रोग से मुक्ति मिलती है। इसलिए आज तक गांव में धुलेंडी पर रंग नहीं खेला जाता है।