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एचआईवी पीडितों को अब पीजीआई नहीं आना पड़ेगा इलाज के लिए, यहां से भी करा सकते हैं
Wed, 09 Jan 2019 04:58 PM IST
खुशबू गोयल
मुनीष कुमार, अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
मुनीष कुमार, अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 09 Jan 2019 04:58 PM IST
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एचआईवी पॉजीटिव मरीजों को अब इलाज के लिए चंडीगढ़ पीजीआई नहीं जाना पड़ेगा। एक और जगह है जहां से अब लोग ट्रीटमेंट करा सकते हैं। हरियाणा में अंबाला सिटी सेक्टर-10 के पॉलिक्लीनिक में स्थित एफआईएआरटी सेंटर में ही इलाज उपलब्ध होगा। इसके लिए अंबाला के दो डॉक्टरों को दिल्ली में प्रशिक्षित किया गया है। इसके चलते अब जिले में एचआईवी के मरीजों को टेस्ट कराने या दवाइयों के लिए पीजीआई चंडीगढ़ जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। गत दिनों पीजीआई प्रबंधन ने एफआईएआरटी सेंटर में इलाज के लिए अपनी सहमति दे दी है।
गोपनीय रहेगा पूरा इलाज
शहर के सेक्टर-10 में स्थित पॉलिक्लीनिक की पहली मंजिल पर एफआईएआरटी सेंटर (फैसिलिटी इंट्रीग्रेट एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी सेंटर) स्थापित किया गया है। इसमें एचआईपी पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए दो सीनियर डॉ. विमला आनंद और डॉ. हर्ष को तैनात किया गया है। इन दो डॉक्टरों को विशेष तौर पर दिल्ली में एनसीडीसी (नेशनल सेंटर डीसीस कंट्रोल) में भेज कर एचआईवी संबंधी इलाज की विशेष ट्रेनिंग दिलाई गई है। इस स्थान पर ओपीडी, दवाई वितरण केंद्र और ब्लड टेस्ट के लिए अलग कैबिन समेत पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और मरीजों की पहचान छुपाने के लिए पूरे इलाज को गोपनीय रखा जा रहा है।
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गोपनीय रहेगा पूरा इलाज
शहर के सेक्टर-10 में स्थित पॉलिक्लीनिक की पहली मंजिल पर एफआईएआरटी सेंटर (फैसिलिटी इंट्रीग्रेट एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी सेंटर) स्थापित किया गया है। इसमें एचआईपी पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए दो सीनियर डॉ. विमला आनंद और डॉ. हर्ष को तैनात किया गया है। इन दो डॉक्टरों को विशेष तौर पर दिल्ली में एनसीडीसी (नेशनल सेंटर डीसीस कंट्रोल) में भेज कर एचआईवी संबंधी इलाज की विशेष ट्रेनिंग दिलाई गई है। इस स्थान पर ओपीडी, दवाई वितरण केंद्र और ब्लड टेस्ट के लिए अलग कैबिन समेत पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और मरीजों की पहचान छुपाने के लिए पूरे इलाज को गोपनीय रखा जा रहा है।
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खून की जांच के लिए नहीं जाना पड़ेगा पीजीआई
हर छह माह में एचआईवी से ग्रसित मरीजों को खून की जांच के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या रोहतक जाना पड़ता था। वहां पर रोगियों को पहले सात दिन की दवाइयां दी जाती थीं फिर 28 दिन की दवाइयां दी जाती थीं। जब रोग स्थिर होने लगता था तब मरीज को वापस इलाज के लिए अंबाला भेजा जाता था। इसके बाद अंबाला के डॉक्टर मरीज का इलाज करते थे, पर अब ऐसा नहीं होगा।
अब जैसे ही मरीज के एचआईवी ग्रस्त होने पुष्टि होती है, उसका इलाज एफआईएआरटी सेंटर में शुरू हो जाएगा। जो विशेष दवाइयों की किट है वह यहां के डॉक्टर मरीज को अपनी निगरानी में उपलब्ध करवाएंगे। इसके अलावा मरीज को हर छह महीने पर खून की जांच के लिए भी पीजीआई नहीं जाना होगा। उनके ब्लड का सेंपल इसी सेंटर पर लिया जाएगा और यहां से सेंपल भेज कर रिपोर्ट मांग ली जाएगी।
उल्लेखनीय है कि एचआईवी के मरीजों की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता घट जाती है। इसके चलते पीड़ित की प्रत्येक छह महीन के बाद जांच की जाती है कि मरीज की प्रतिरोधक क्षमता दवाइयां खाने के बाद भी घट रही है या बढ़ रही है, या स्थिर है। पहले इसके लिए भी नियमित तौर पर पीजीआई जाना पड़ता था। जिले में 413 एचआईवी पीड़ितों का चल रहा इलाज एफआईएआरटी सेंटर अंबाला के अलावा रोहतक, कैथल, सोनीपत, भिवानी, जींद, हिसार में बनाए गए हैं। अंबाला में फिलहाल 413 एचआईवी पीड़ितों का इलाज चल रहा है।
अब जैसे ही मरीज के एचआईवी ग्रस्त होने पुष्टि होती है, उसका इलाज एफआईएआरटी सेंटर में शुरू हो जाएगा। जो विशेष दवाइयों की किट है वह यहां के डॉक्टर मरीज को अपनी निगरानी में उपलब्ध करवाएंगे। इसके अलावा मरीज को हर छह महीने पर खून की जांच के लिए भी पीजीआई नहीं जाना होगा। उनके ब्लड का सेंपल इसी सेंटर पर लिया जाएगा और यहां से सेंपल भेज कर रिपोर्ट मांग ली जाएगी।
उल्लेखनीय है कि एचआईवी के मरीजों की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता घट जाती है। इसके चलते पीड़ित की प्रत्येक छह महीन के बाद जांच की जाती है कि मरीज की प्रतिरोधक क्षमता दवाइयां खाने के बाद भी घट रही है या बढ़ रही है, या स्थिर है। पहले इसके लिए भी नियमित तौर पर पीजीआई जाना पड़ता था। जिले में 413 एचआईवी पीड़ितों का चल रहा इलाज एफआईएआरटी सेंटर अंबाला के अलावा रोहतक, कैथल, सोनीपत, भिवानी, जींद, हिसार में बनाए गए हैं। अंबाला में फिलहाल 413 एचआईवी पीड़ितों का इलाज चल रहा है।
टीबी के मरीजों का भी किया जाता है एचआईवी टेस्ट
एचआईवी पीड़ित मरीजों के शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इस तरह के मरीजों को सबसे ज्यादा टीबी होने की संभावना होती है। पर्याप्त इलाज से एचआईवी पीड़ित ठीक होते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं। इसके चलते जो सामान्य टीबी का मरीज भी आता है। उसका भी एचआईवी टेस्ट करा लिया जाता है। वहीं गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टेस्ट भी कराया जाता है। जिन मरीजों में रोग की पुष्टि हो जाती है। उसका सेंटर से इलाज शुरू करा दिया जाता है।
एचआईवी के मरीजों को पहले इलाज के लिए चंडीगढ़ व रोहतक पीजीआई जाना पड़ता था, लेकिन अब अंबाला शहर सेक्टर-10 के पॉलिक्लीनिक में स्थित एफआईएआरटी सेंटर में ही इलाज उपलब्ध होगा। इस एफआईआरटी सेंटर के अंबाला में स्थित होने से अंबाला के साथ यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के एचआईवी ग्रस्त रोगियों को भी लाभ होगा।
- संत लाल वर्मा, सीएमओ, अंबाला
एचआईवी के मरीजों को पहले इलाज के लिए चंडीगढ़ व रोहतक पीजीआई जाना पड़ता था, लेकिन अब अंबाला शहर सेक्टर-10 के पॉलिक्लीनिक में स्थित एफआईएआरटी सेंटर में ही इलाज उपलब्ध होगा। इस एफआईआरटी सेंटर के अंबाला में स्थित होने से अंबाला के साथ यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के एचआईवी ग्रस्त रोगियों को भी लाभ होगा।
- संत लाल वर्मा, सीएमओ, अंबाला