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ऐतिहासिक पहल, गुर्जर समाज ने लिया मृत्युभोज बंद करने का फैसला

Tue, 21 Jun 2016 05:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हांसी(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, हांसी(हरियाणा) Updated Tue, 21 Jun 2016 05:41 PM IST
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Historic initiative taken by Gujjar community, decided to stop Mrityu Bhoj
गुर्जर समाज ने लिया मृत्युभोज बंद करने का फैसला - फोटो : amar ujala

ऐतिहासिक पहल करते हुए 21 गांवों के लोगों समेत गुर्जर समाज ने लिया मृत्युभोज बंद करने का फैसला। गुर्जर समाज द्वारा मृत्युभोज बंद करने का फैसला लिया गया। इस संबंध में रविवार को हरियाणा के हांसी में शगुन वाटिका में गुर्जर चिंतन सम्मेलन का आयोजन किया गया।

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सम्मेलन में 21 गांवों के प्रबुद्ध लोगों ने भाग लिया। बैठक में वक्ताओं ने मृत्युभोज पर चर्चा करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त किया जाए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सबसे पहले मृत्युभोज की शुरुआत गांव बड़सी से हुई थी। उस समय भी इसका विरोध किया था, लेकिन कुछ लोगों के दबाव के चलते यह बंद नहीं हो पाई थी। उसके बाद से यह प्रथा चलती आ रही है।
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वक्ताओं ने कहा कि आजकल मृत्युभोज में रसगुल्ले और जलेबी जैसी स्टॉल भी लगने लगी हैं, जोकि वेदना और दुख की घड़ी में किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कर्ज उठाकर सामाजिक दबाव और दिखावे के चलते मृत्युभोज का आयोजन करना पड़ता है। इसके चलते हमारा समाज आर्थिक रूप से पिछड़ता जा रहा है। हालांकि हिंदू धर्म ग्रंथों में कहीं भी मृत्युभोज जैसी प्रथा का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन लोग दिखावे के चलते इसका आयोजन कर रहे हैं।

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यादव समाज ने मृत्युभोज बंद करवाने के लिए की कमेटी गठित

Historic initiative taken by Gujjar community, decided to stop Mrityu Bhoj
गुर्जर समाज ने लिया मृत्युभोज बंद करने का फैसला - फोटो : amar ujala

अंतिम संस्कार में शवों को नहीं ओढ़ाएंगे शाल
गुर्जर समाज के कृष्णपाल गुर्जर ने बताया कि बैठक में उपस्थित 21 गांव के मुअज्जिज लोगों द्वारा मृत्युभोज कार्यक्रम का आयोजन न किए जाने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा शवों को जलाते समय शॉल आदि न ओढ़ाने का फैसला लिया गया है, क्योंकि इससे प्रदूषण फैलता है।
 
उध्‍ार यादव सभा की बैठक रविवार को यादव सभा के प्रधान ओपी यादव की अध्यक्षता मे प्रगति हाई स्कूल के प्रांगण में आयोजित की गई। बैठक में समाज में फैली सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों को दूर करने बारे मंथन किया गया। बैठक में सबसे पहले समाज से मृत्युभोज बंद करवाने के लिए जनजागरण अभियान चलाने को एक कमेटी का गठन किया गया।

स अवसर पर लेक्चरर जेपी यादव को इस कमेटी का प्रधान और रिटायर्ड प्राचार्य जगदीश यादव, रिटायर्ड हेड मास्टर कृष्ण यादव डॉ. डीपी यादव, राजमल यादव, एडवोकेट सुखबीर यादव पूर्व सरपंच दूलीचंद यादव को कमेटी सदस्य मनोनीत किया गया।

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