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आर्मी में गर्भवती की नियुक्ति, हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
एजेंसी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 10 Feb 2016 09:35 AM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि अगर चयन प्रक्रिया के दौरान कोई महिला उम्मीदवार गर्भवती होती है तो उसे आर्मी मेडिकल कोर में डॉक्टर के तौर पर योगदान देने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि ऐसी चीजों के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं है।
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कोर्ट ने जिस मामले में यह फैसला दिया है उसके मुताबिक एक महिला उम्मीदवार ने आर्मी मेडिकल कोर के शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए 2013 की शुरुआत में आवेदन दिया था। सारी परीक्षाएं और मेडिकल टेस्ट पास करने के बाद उसे फरवरी 2014 में कोर में योगदान देने के लिए कहा गया।
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हालांकि इस पूरी चयन प्रक्रिया के बीच उसने गर्भधारण कर लिया। नौकरी में योगदान के दिन उसने इसकी जानकारी दी। लेकिन इस आधार पर उसे योगदान करने से रोक दिया गया। इसके बाद वह मामले को लेकर पंजाब और हरियाणा कोर्ट पहुंची।
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कोर्ट की जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की बेंच ने महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चा पैदा करने और रोजगार के बीच किसी एक को चुनने के विकल्प के लिए बाध्य करना महिला के प्रजनन अधिकार और रोजगार के अधिकार दोनों में दखलंदाजी है। ऐसी चीजों के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।