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भारतीय ज्ञान परंपरा में आतंकवाद, युद्ध और हिंसा का समाधान: आचार्य देवव्रत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 26 Nov 2016 11:46 PM IST
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Himachal Pradesh Governor Acharya Dev Vrat
- फोटो : अमर उजाला
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भारत की पहचान ज्ञान परंपरा से ही है। सृष्टि की उत्पत्ति आज के वैज्ञानिक दो अरब वर्ष पूर्व मानते हैं। यह बात हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शनिवार को सेक्टर-37 स्थित लॉ भवन में पंचनद शोध संस्थान की ओर से आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर व्याख्यान देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि वेदों से ज्ञान आया है। भारतीय ज्ञान परंपरा काफी उन्नत थी, यहां के एक-एक ऋषि वैज्ञानिक थे। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म था तो मानव धर्म है और यह दुनिया को भारत ने सिखाया।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विश्व में फैले आतंकवाद युद्ध और हिंसा का समाधान निहित है। यह दर्शन किसी एक व्यक्ति, क्षेत्र या संप्रदाय के बारे में न सोच कर पूरी सृष्टि की चिंता करता है। इसलिए इस विचार में सभी लोगों का सुख निहित है।
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उन्होंने कहा कि वेदों से ज्ञान आया है। भारतीय ज्ञान परंपरा काफी उन्नत थी, यहां के एक-एक ऋषि वैज्ञानिक थे। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म था तो मानव धर्म है और यह दुनिया को भारत ने सिखाया।
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आचार्य देवव्रत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विश्व में फैले आतंकवाद युद्ध और हिंसा का समाधान निहित है। यह दर्शन किसी एक व्यक्ति, क्षेत्र या संप्रदाय के बारे में न सोच कर पूरी सृष्टि की चिंता करता है। इसलिए इस विचार में सभी लोगों का सुख निहित है।
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'हम जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हैं वैसा ही दूसरों के प्रति करें, यही धर्म है'
पंचनद शोध संस्थान की ओर से आयोजित व्याख्यान में लोग
भारतीय ज्ञान परंपरा के कारण ही संभव हो सका कि यहां के मनीषियों ने सृष्टि की उत्पत्ति संबंधी सटीक गणना की है। ऐसी गणना जो आधुनिक वैज्ञानिकों से भी ज्यादा प्रामाणिक है। सृष्टि की रचना के साथ ही भारत ने ज्ञानार्जन का काम शुरू कर दिया था, जो आज तक निरंतर जारी है। यह ज्ञान परंपरा ही है कि एक सड़क किनारे बोरी पर बैठा सामान्य ज्योतिषी भी दशकों बाद लगने वाले सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण की प्रमाणिक जानकारी दे देता है।
आचार्य देवव्रत ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि हम जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हैं वैसा ही दूसरों के प्रति करें, यही धर्म है। इस मौके पर पंचनद शोध संस्थान के मार्गदर्शक एवं देश के जाने-माने शिक्षाविद दीनानाथ बत्रा ने कहा कि देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए जो भारत का गौरव बढ़ाए।
संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण सिंह आर्य ने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत भारतीय ग्रंथों को विकृत किया गया है। इस दौरान शोध संस्थान के निदेशक व माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रोफेसर बृज किशोर कुठियाला, राधे श्याम शर्मा, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष भीमसेन समेत बड़ी संख्या में उत्तर भारत के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।
आचार्य देवव्रत ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि हम जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हैं वैसा ही दूसरों के प्रति करें, यही धर्म है। इस मौके पर पंचनद शोध संस्थान के मार्गदर्शक एवं देश के जाने-माने शिक्षाविद दीनानाथ बत्रा ने कहा कि देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए जो भारत का गौरव बढ़ाए।
संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण सिंह आर्य ने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत भारतीय ग्रंथों को विकृत किया गया है। इस दौरान शोध संस्थान के निदेशक व माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति प्रोफेसर बृज किशोर कुठियाला, राधे श्याम शर्मा, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष भीमसेन समेत बड़ी संख्या में उत्तर भारत के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।