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Chandigarh News: दो दशक पहले हुई नियुक्ति की तिथि से दिया उच्च पद, सीएस को कार्रवाई का आदेश

Fri, 14 Jun 2024 03:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2024 03:01 AM IST
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Higher post given from the date of appointment two decades ago, CS ordered to take action
-हाईकोर्ट ने कहा, तीन माह में मुख्य सचिव वन विभाग के तत्कालीन एसएस से स्पष्टीकरण मांग करें कार्रवाई
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-किस आधार पर और किन परिस्थितियों में जारी किया गया यह मनमाना व अवैध आदेश

-आदेश का उद्देश्य संदेहास्पद, जारी करने वाले अधिकारी को बनाया जाना चाहिए जिम्मेदार

विवेक शर्मा
चंडीगढ़। अनुकंपा के आधार पर दो दशक पहले नौकरी पाने वालों का अब 20 साल बाद नियुक्ति की तिथि से पद बढ़ाने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को वन विभाग के तत्कालीन एसीएस से स्पष्टीकरण मांगने और फिर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। वहीं, मामले में की गई कार्रवाई का ब्योरा तीन माह में सरकार को सौंपने को कहा।


याचिका दाखिल करते हुए अनिल कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि वे वन विभाग में 2004 में फॉरेस्टर नियुक्त हुए थे। इसके बाद डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर 2015 से 2019 के बीच बने। इसी बीच 2001 में अनुकंपा के आधार पर फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त हुए दो लोगों ने उच्च शिक्षा का हवाला देते हुए नियुक्ति की तिथि से उच्च पद देने की मांग कर दी। विभाग ने उनकी नियुक्ति की तिथि से 2020 में उन्हें फॉरेस्टर का उच्च पद दे दिया। 2021 में फॉरेस्टर की वरिष्ठता सूची दोबारा तैयार कर इन दोनों को डिप्टी फॉरेस्ट रेंजर बना दिया गया। याची ने बताया कि कई वर्षों से जो उनके जूनियर थे उन्हें अब वरिष्ठता सूची में ऊंचा स्थान दे दिया गया है। हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की तिथि से उच्च पद के दावे सरकार खारिज कर चुकी है। अदालतों में भी इस तरह के दावों का सरकार की ओर से विरोध किया गया। हाईकोर्ट के एक इसी प्रकार के आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट भी जा चुकी है। इन दोनों कर्मियों के मामले में सरकार ने अलग रुख अपनाया है और वह भी नियुक्ति के दो दशक बाद। यह आदेश एक एसीएस स्तर के अधिकारी द्वारा लिया गया है जो संदेहास्पद है। इस आदेश ने न केवल अनावश्यक अदालती विवाद को जन्म दिया बल्कि पूरी वरिष्ठता सूची को प्रभावित कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में आदेश जारी करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने अब मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह वन विभाग के तत्कालीन एसीएस से स्पष्टीकरण मांगे कि आखिर किन परिस्थितियों में कानून की अवहेलना करते हुए मनमाना व अवैध आदेश जारी किया गया।
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