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हाईकोर्ट ने सुलझाया चंडीगढ़ की हाउसिंग सोसाइटियों के पानी के बिल का मसला

Wed, 02 Nov 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 02 Nov 2016 01:00 AM IST
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highcourt resolved the issue of water bills of housing societies in Chandigarh
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
शहर की हाउसिंग सोसाइटियों को आ रहे पानी के औसत बिलों से छुटकारा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस मुद्दे को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ ने हाउसिंग सोसाइटियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने रिवाइज साइट प्लान की विधिवत प्रति दो महीने के भीतर इस्टेट आफिस को सौंपे और इस्टेट आफिस को इन रिवाइज साइट प्लान के आधार पर दो माह में ही सोसाइटियों को आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी करने को कहा गया है। इसके बाद नगर निगम इन हाउसिंग सोसाइटियों को डोमेस्टिक वाटर सप्लाई के बिल जारी करेगा।
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कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज एग्जीक्यूटिव आफिसर को-आपरेटिव सोसाइटी सेक्टर-49 चंडीगढ़ की ओर से दायर याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और चंडीगढ़ नगर निगम को प्रतिवादी बनाते हुए हाउसिंग सोसाइटी को घरेलू उपयोग की दरों के आधार पर पानी के बिल दिए जाने की मांग की गई थी।
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याचिका में कहा गया कि सोसाइटी को चंडीगढ़ प्रशासन ने मल्टी-स्टोरी आवासीय अपार्टमेंट बनाने के लिए भूमि अलाट की थी। सोसाइटी ने अपार्टमेंट का निर्माण किया और उसके सदस्य अपार्टमेंट में रहने भी लगे, लेकिन इस्टेट आफिस चंडीगढ़ की ओर से सोसाइटी को आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। इसके चलते चंडीगढ़ नगर निगम ने भी घरेलू दर पर पानी की सप्लाई देने में असमर्थता जता दी।
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सोसाइटियों को रिवाइज साइट प्लान दो माह में दाखिल करने का निर्देश

highcourt resolved the issue of water bills of housing societies in Chandigarh
हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान ही चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य प्रशासक-सह-वित्त सचिव ने मामला सुलझाने का प्रयास किया, जिसमें उन्होंने पाया कि सोसाइटी ने तय साइट प्लान में कुछ फेरबदल किए हैं। इसमें रास्ते को चौड़ा किया गया, जिससे सोसाइटी की भूमि पर हरित क्षेत्र घट गया। इसके अलावा अपार्टमेंट में लोगों ने बालकनी में ग्लेजिंग और खिड़कियों पर सनशेड की चौड़ाई बढ़ाने आदि जैसे बदलाव भी किए हैं। इसी कारण सोसाइटी को आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इसे मामूली फेरबदल करार देते हुए सोसाइटियों को तुरंत आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी करने के आदेश दिए। खंडपीठ ने कहा कि प्रत्येक अपार्टमेंट में किए गए निजी फेरबदल के लिए बिल्डिंग ब्रांच संबंधित मकान मालिक को नोटिस जारी कर सकती है, जैसा कि उन सोसाइटियों के लिए किया गया है, जिन्हें आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सोसाइटियों को रिवाइज साइट प्लान, जिसमें किए गए बदलाव इंगित किए गए हों, को प्राइवेट आर्किटेक्ट से विधिवत तौर पर प्रमाणीकृत करवाकर दो माह में फिर से जमा कराने के निर्देश जारी करते हुए संबंधित विभाग को भी दो माह में आक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं।
 
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