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रामपाल की याचिका पर सरकार को आखिरी मौका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 27 Feb 2016 11:45 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अदालत की आपराधिक अवमानना में फंसे सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल की याचिका पर हरियाणा सरकार को जवाब देने का आखिरी मौका दिया गया है। आश्रम पर पुलिस कार्रवाई के दौरान एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने हिसार के बरवाला थाने में रामपाल के खिलाफ कत्ल और बंधक बनाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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इसी एफआईआर को रद्द करने के लिए याचिका दायर की गई थी। याचिका में पैरवी करते हुए एडवोकेट एसके गर्ग नरवाना ने कहा था कि मृतका के रिश्तेदारों का आरोप है कि महिला की मौत पुलिस फायरिंग में हुई, लेकिन उल्टा रामपाल के खिलाफ ही कत्ल, आपराधिक जालसाजी व बंधक बनाने का मामला दर्ज कर लिया गया।
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इस याचिका पर आईजी रेंज को जवाब देना था, लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया। शुक्रवार को जस्टिस फतेहदीप सिंह की एकल बेंच ने सरकार को जवाब का अंतिम मौका देते हुए सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी है। आश्रम पर पुलिस कार्रवाई की सीबीआई जांच कराने की रामपाल की एक अन्य याचिका पर भी शुक्रवार को सुनवाई हुई, लेकिन इस मामले में सुनवाई स्थगित कर दी गई।
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इस याचिका में रामपाल ने आरोप लगाया था कि वह केवल आपराधिक अवमानना में ही वांछित था और उसे जिस तरीके से पुलिस ने घेराबंदी करके पकड़ा, वह गलत था। इस कार्रवाई के दौरान रामपाल के खिलाफ देशद्रोह व आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। याचिका में कहा था कि देशद्रोह का मामला बनता ही नहीं था। ऐसे में पुलिस कार्रवाई को संदेह के घेरे में लाते हुए घटनाक्रम की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि अदालत की अवमानना के मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस एम जियापाल और जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने रामपाल के पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, लेकिन पुलिस ने आश्रम में घुसने में असमर्थता जताई थी। पुलिस का कहना था कि आश्रम पर कार्रवाई करने से खूनखराबा हो सकता है और हालात बिगड़ सकते हैं।
बेंच ने कहा था कि भले ही रामपाल बंकर में क्यों न छिपा हो, उसे बाहर निकाल कर लाया जाए। इसी पर पुलिस ने आश्रम की घेराबंदी कर लंबी जद्दोजहद के बाद रामपाल को गिरफ्तार किया था और इस दौरान आश्रम अनुयायियों ने पुलिस पर पथराव व हमला भी किया था।