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Lawrence Interview: दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर HC गृह सचिव से नीचे किसी का हलफनामा मंजूर नहीं करेगा
Wed, 11 Dec 2024 08:00 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 11 Dec 2024 08:00 AM IST
सार
गैंगस्टर लाॅरेंस बिश्नोई के हिरासत में इंटरव्यू मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने बताया था कि इंटरव्यू खरड़ सीआईए थाने में हुआ था।
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lawrence bishnoi
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को साफ कर दिया कि लॉरेंस बिश्नोई के हिरासत में हुए इंटरव्यू के मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर गृह सचिव से नीचे किसी भी अधिकारी का हलफनामा स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने अवर सचिव का हलफनामा खारिज करते हुए अब गृह सचिव को सोमवार तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लॉरेंस के टीवी साक्षात्कार मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित रूप से किए गए आर्थिक अपराध के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सहायता ली जा सकती है। हाईकोर्ट ने जांच की प्रगति और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर विशेष डीजीपी प्रबोध कुमार की सीलबंद रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए मौखिक रूप से केंद्र सरकार से पूछा कि अभी तक की जांच में किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम सामने आया है तो डीजीपी प्रबोध कुमार ने कहा कि अभी तक नहीं, लेकिन जांच अभी जारी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि हमें आवश्यक लगा तो ईडी को सहायता के लिए निर्देश देंगे। केंद्र सरकार ने कहा कि यदि ऐसा आदेश मिलता है तो उसका पालन किया जाएगा।
केंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही पंजाब सरकार को जेलों में जैमर लगाने की अनुमति दे दी है और आगे किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने बताया था कि इंटरव्यू खरड़ सीआईए थाने में हुआ था। इसके बाद कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन एसएसपी पर कार्रवाई न होने के चलते पंजाब सरकार को हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लॉरेंस के टीवी साक्षात्कार मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों द्वारा कथित रूप से किए गए आर्थिक अपराध के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सहायता ली जा सकती है। हाईकोर्ट ने जांच की प्रगति और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर विशेष डीजीपी प्रबोध कुमार की सीलबंद रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए मौखिक रूप से केंद्र सरकार से पूछा कि अभी तक की जांच में किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम सामने आया है तो डीजीपी प्रबोध कुमार ने कहा कि अभी तक नहीं, लेकिन जांच अभी जारी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि हमें आवश्यक लगा तो ईडी को सहायता के लिए निर्देश देंगे। केंद्र सरकार ने कहा कि यदि ऐसा आदेश मिलता है तो उसका पालन किया जाएगा।
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केंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही पंजाब सरकार को जेलों में जैमर लगाने की अनुमति दे दी है और आगे किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने बताया था कि इंटरव्यू खरड़ सीआईए थाने में हुआ था। इसके बाद कई पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन एसएसपी पर कार्रवाई न होने के चलते पंजाब सरकार को हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी।
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