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सिटी सेंटर स्कैम में ईडी ने बढ़ाई कैप्टन सरकार की मुश्किलें, हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 20 Apr 2017 09:41 AM IST
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लुधियाना सिटी सेंटर स्कैम मामले में दर्ज एफआईआर, चालान और चार्जशीट सौंपे जाने के लिए याचिका दाखिल कर कैप्टन सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 2007 में कथित तौर पर हुए इस स्कैम में कैप्टन सहित कई रसूखदारों को आरोपी बनाया गया है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार, विजिलेंस समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
ईडी ने याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना ट्रायल कोर्ट के गत वर्ष दिए गए उस फैसले को रद्द करने की अपील की है, जिसके तहत ट्रालय कोर्ट ने स्कैम मामले में दर्ज एफआईआर और चालान की कॉपी ईडी को सौंपने की अपील खारिज कर दी थी। ईडी जालंधर के सहायक निदेशक ने याचिका में कहा कि लुधियाना सिटी सेंटर में करोड़ों के घोटाले को लेकर विजिलेंस ने 23 मार्च 2007 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद लुधियाना सेशन कोर्ट में चार्जशीट भी पेश की गई थी।
एफआईआर के आधार पर ईडी ने 2013 में करोड़ों के घोटाले में मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत जांच आरंभ कर दी थी। इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित कई रसूखदारों के नाम आरोपियों की सूची में शामिल किए गए थे। जांच शुरू करने के लिए 2007 में विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में दायर किये गए चालान की कॉपी की विजिलेंस के एसएसपी से 2013 में पत्र लिखकर मांगी गई थी।
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ईडी ने याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना ट्रायल कोर्ट के गत वर्ष दिए गए उस फैसले को रद्द करने की अपील की है, जिसके तहत ट्रालय कोर्ट ने स्कैम मामले में दर्ज एफआईआर और चालान की कॉपी ईडी को सौंपने की अपील खारिज कर दी थी। ईडी जालंधर के सहायक निदेशक ने याचिका में कहा कि लुधियाना सिटी सेंटर में करोड़ों के घोटाले को लेकर विजिलेंस ने 23 मार्च 2007 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद लुधियाना सेशन कोर्ट में चार्जशीट भी पेश की गई थी।
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एफआईआर के आधार पर ईडी ने 2013 में करोड़ों के घोटाले में मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत जांच आरंभ कर दी थी। इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित कई रसूखदारों के नाम आरोपियों की सूची में शामिल किए गए थे। जांच शुरू करने के लिए 2007 में विजिलेंस द्वारा दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट में दायर किये गए चालान की कॉपी की विजिलेंस के एसएसपी से 2013 में पत्र लिखकर मांगी गई थी।
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कॉपी पाने के लिए ईडी ने दी अब हाईकोर्ट में दस्तक
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
विजिलेंस ने 25 जून 2015 को यह कॉपी देने से इनकार कर दिया था। विजिलेंस ने कहा था कि यदि ईडी चाहे तो कॉपी लुधियाना की जिला अदालत के रिकॉर्ड से इसे हासिल कर सकती है। ईडी ने कहा था कि कॉपी उपलब्ध करवाने के लिए वे बाध्य नहीं है और इसका अधिकार कोर्ट को है। फिर ईडी ने लुधियाना के जिला एवं सेशन जज के समक्ष अर्जी दायर रिकॉर्ड से इस केस की एफआईआर और चालान की कॉपी उपलब्ध करवाए जाने की मांग की।
पिछले वर्ष 2 अप्रैल को ईडी की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि वह सिर्फ आरोपियों को ही चालान की कॉपी दे सकती है। यदि ईडी को कॉपी चाहिए तो वह विजिलेंस से आसानी से हासिल कर सकता है। इन आदेशों को चुनौती देते हुए अब ईडी ने हाईकोर्ट में दस्तक दी है। ईडी ने कहा कि वे इस मामले की अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर हे है और ऐसे में मांगे गए दस्तावेजे जरूरी है।
यह है मामला
लुधियाना सिटी सेंटर के करार में कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित 36 लोगों पर 3000 करोड़ के घपले के आरोप लगे थे, जिसके बाद जांच विजिलेंस को दी गई, जिसकी सुनवाई लुधियाना कि अदालत में चल रही है। इस मामले में आरोपियों में पूर्व पंजाब मंत्री चौधरी जगजीत सिंह का नाम भी शामिल था। आरोप था कि लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन ने बिना सरकार से कोई अनुमति प्राप्त किए कंपनी के साथ करार किया।
ट्रस्ट और कंपनी में करार यह था की कंपनी साइट्स की बिक्री से संबंधित वसूली गई राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा ट्रस्ट को देना था। आरोप यह भी था कि कंपनी ने सिटी सेंटर में साइट्स की बिक्री से संबंधी जो करार किए, उनसे 70 प्रतिशत पेमेंट कैश में ली गई और मात्र 30 प्रतिशत राशि ही चेक से ली गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस टीएस ढींडसा ने पंजाब सरकार और विजिलेंस को 29 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
पिछले वर्ष 2 अप्रैल को ईडी की याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि वह सिर्फ आरोपियों को ही चालान की कॉपी दे सकती है। यदि ईडी को कॉपी चाहिए तो वह विजिलेंस से आसानी से हासिल कर सकता है। इन आदेशों को चुनौती देते हुए अब ईडी ने हाईकोर्ट में दस्तक दी है। ईडी ने कहा कि वे इस मामले की अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर हे है और ऐसे में मांगे गए दस्तावेजे जरूरी है।
यह है मामला
लुधियाना सिटी सेंटर के करार में कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित 36 लोगों पर 3000 करोड़ के घपले के आरोप लगे थे, जिसके बाद जांच विजिलेंस को दी गई, जिसकी सुनवाई लुधियाना कि अदालत में चल रही है। इस मामले में आरोपियों में पूर्व पंजाब मंत्री चौधरी जगजीत सिंह का नाम भी शामिल था। आरोप था कि लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन ने बिना सरकार से कोई अनुमति प्राप्त किए कंपनी के साथ करार किया।
ट्रस्ट और कंपनी में करार यह था की कंपनी साइट्स की बिक्री से संबंधित वसूली गई राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा ट्रस्ट को देना था। आरोप यह भी था कि कंपनी ने सिटी सेंटर में साइट्स की बिक्री से संबंधी जो करार किए, उनसे 70 प्रतिशत पेमेंट कैश में ली गई और मात्र 30 प्रतिशत राशि ही चेक से ली गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस टीएस ढींडसा ने पंजाब सरकार और विजिलेंस को 29 मई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।