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Highcourt: संपत्ति उत्तराधिकार कानून पर नहीं दिया जवाब, कोर्ट ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा को लगाई फटकार

Wed, 01 May 2024 03:22 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 01 May 2024 03:22 PM IST
सार

नेशनल लॉ स्कूल के छात्र दक्ष कादियान ने एडवोकेट सार्थक गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान को चुनौती दी है। याची ने बताया कि प्रावधानों के अनुसार यदि घर के मुखिया की मौत हो जाती है और वह मरने से पहले कोई वसीयत नहीं छोड़ते तो पुरुषों को प्राथमिकता दी जाती है।

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High Court reprimanded Haryana, Punjab and Central Government for not reply on Inheritance Act
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपत्ति उत्तराधिकार अधिनियम में पुरुषों को वरीयता और लैंगिक भेदभाव पर जवाब दाखिल न करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने तीनों को आखिरी मौका देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई पर जवाब नहीं आया तो सभी पर 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
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नेशनल लॉ स्कूल के छात्र दक्ष कादियान ने एडवोकेट सार्थक गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान को चुनौती दी है। याची ने बताया कि प्रावधानों के अनुसार यदि घर के मुखिया की मौत हो जाती है और वह मरने से पहले कोई वसीयत नहीं छोड़ते तो पुरुषों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसी स्थिति में पहली श्रेणी के उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती है जिसमें बेटा, बेटी, पोता-पोती आदि शामिल हैं। यदि पहली श्रेणी के उत्तराधिकारी मौजूद नहीं होते हैं तो दूसरी श्रेणी को मौका दिया जाता है। इसमें पुरुष रिश्तेदार को ही प्राथमिकता दी जाती है। यानी बुआ के स्थान पर चाचा को प्राथमिकता मिलती है। 
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वहीं तीसरी श्रेणी की बात करें तो बेटे की बेटी का बेटा या बेटे की बेटी की बेटी में से वरीयता देने की बात आती है तो इनमें से महिला को प्राथमिकता मिलती है। ऐसे में बेटे की बेटी की बेटी पूरी प्रॉपर्टी की हकदार होगी जबकि लड़के का हक नहीं होगा। याची ने कहा कि इस प्रकार लिंग के आधार पर भेदभाव करना सीधे तौर पर संविधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। 
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साथ ही याची ने बताया कि जब करीबी रिश्तेदारों में प्रॉपर्टी के बंटवारे की बात आती है तो वहां पुरुष रिश्तेदारों को ही प्राथमिकता दी जाती है और महिलाओं से भेदभाव, वहीं कुछ मामलों में इससे उलट है। ऐसे में प्रावधान ऐसा हो जो लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने वाला हो।
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