Punjab: हाईकोर्ट ने कहा- थाने पर हमले ने देश की आत्मा को झकझोर दिया, आरोपी को जमानत न्याय का मजाक उड़ाने जैसा
23 फरवरी को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के समर्थकों ने अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया था, जिसमें 6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। समर्थक अमृतपाल के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की रिहाई के लिए प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
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अजनाला में पुलिस थाने पर हमले के दो आरोपियों को बड़ा झटका देते हुए हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था और ऐसे में आरोपी को जमानत न्याय का मजाक उड़ाने जैसा होगा। आरोपियों ने राज्य की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती दी है और ऐसे में हम आंखें नहीं मूंद सकते।
याचिका दाखिल करते हुए जगदीश व पुरुषोत्तम ने हाईकोर्ट को बताया कि अमृतसर के अजनाला थाने पर हुए हमले में याचिकाकर्ताओं को आरोपी बनाया गया है। याचिकाकर्ता शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के वॉलंटियर हैं और ऐसे में सत्तासीन दल उन्हें इस मामले में फंसा रहा है। वह उस दिन घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी को खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के समर्थकों ने अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया था, जिसमें 6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। समर्थक अमृतपाल के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की रिहाई के लिए प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि घटना के दिन अमृतपाल के नेतृत्व में 200-250 लोगों की भीड़ थाने के पास पहुंची थी और कानून को अपने हाथ में लेकर अपने साथियों को छुड़ाना चाहती थी। भीड़ हिंसक हुई और कई पुलिस अधिकारियों को गंभीर चोट पहुंचाई गई। इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनकी टावर लोकेशन उनका झूठ साबित करने को काफी है।
संवेदनशीलता जरूरी, वरना आम आदमी का विश्वास खत्म हो जाएगा
कोर्ट ने कहा वर्तमान मामले को संवेदनशीलता के साथ निपटाना जरूरी है, अन्यथा कानून वितरण एजेंसियों में आम आदमी का विश्वास खत्म हो जाएगा। यह न्यायालय अपनी संवैधानिक भूमिका से पीछे नहीं हट सकता और आम आदमी की पीड़ा से आंखें नहीं मूंद सकता। यह न्याय का मखौल होगा, अगर गंभीर आरोपों के बावजूद याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहा कर दिया जाता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।