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आईटी पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया सही: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:08 AM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आईटी पार्क के फेज-1 और फेज-2 के लिए 200 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को सही करार दिया है। इन आदेशों के साथ ही अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
यह जमीन अधिग्रहण 2004 में किया गया था और 2005 में प्रशासन ने इस जमीन का पजेशन लेकर 2006 में मुआवजा भी जारी कर दिया था। इस प्रक्रिया को 2014 -15 में चुनौती देते हुए अधिग्रहण के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं कि एक लंबे समय बाद इन्हें दायर किया गया है। अभी इस मामले में हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला आना बाकी है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के फेज-3 के लिए मौलीजागरां और रायपुर कलां की 40 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को भी सही करार दिया और इसे चुनोती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस जमीन का पजेशन भी प्रशासन ने 2003 में लेकर 2006 में इसका मुआवजा भी दे दिया था। ये याचिकाएं भी 2015 में एक लंबे अरसे बाद दायर की गई थीं।
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इन्हें मिली राहत
गांव कजेहड़ी, निजामपुर खुर्द और पलसोरा में प्रशासन की ओर से 2000 में शुरूकिए गए 15 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिकाएं हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली हैं और यह जमीन उनके वास्तविक मालिकों को वापस करने के निर्देश दिए हैं। हालाकि, निर्देश यह हैं कि सिर्फ उन्हीं मालिकों को जमीन वापस की जाएगी, जिनके पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस जमीन का मालिकाना अधिकार था।
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यह जमीन अधिग्रहण 2004 में किया गया था और 2005 में प्रशासन ने इस जमीन का पजेशन लेकर 2006 में मुआवजा भी जारी कर दिया था। इस प्रक्रिया को 2014 -15 में चुनौती देते हुए अधिग्रहण के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ ने यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं कि एक लंबे समय बाद इन्हें दायर किया गया है। अभी इस मामले में हाईकोर्ट का विस्तृत फैसला आना बाकी है।
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया के फेज-3 के लिए मौलीजागरां और रायपुर कलां की 40 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को भी सही करार दिया और इसे चुनोती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस जमीन का पजेशन भी प्रशासन ने 2003 में लेकर 2006 में इसका मुआवजा भी दे दिया था। ये याचिकाएं भी 2015 में एक लंबे अरसे बाद दायर की गई थीं।
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इन्हें मिली राहत
गांव कजेहड़ी, निजामपुर खुर्द और पलसोरा में प्रशासन की ओर से 2000 में शुरूकिए गए 15 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिकाएं हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली हैं और यह जमीन उनके वास्तविक मालिकों को वापस करने के निर्देश दिए हैं। हालाकि, निर्देश यह हैं कि सिर्फ उन्हीं मालिकों को जमीन वापस की जाएगी, जिनके पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस जमीन का मालिकाना अधिकार था।