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हाईकोर्ट का आदेश, मानव रहित फाटक पर चेतावनी का बोर्ड नहीं तो दुर्घटना के लिए रेलवे जिम्मेदार

Wed, 12 Sep 2018 12:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 12 Sep 2018 12:49 PM IST
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High court Order, Indian Railway Responsible for Accident on Warning Less Railway Crossing
indian railway
जहां मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग पर चेतावनी के बोर्ड न हों वहां पर रेल दुर्घटना का शिकार होने वाले को मुआवजा देने के लिए रेलवे बाध्य है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह अहम आदेश एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले की विधवा भगवता दामसे व दो नाबालिग बच्चों की याचिका पर आया है।
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याचिका में भगवता दामसे ने कहा कि उसके पति दामोदर कुरुक्षेत्र के काठी किंग होटल में कुक का काम करते थे। जब 2 जनवरी को वह धक्का बस्ती के निकट से मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग साइकिल से पार कर रहे थे तो उसे शताब्दी एक्सप्रेस ने टक्कर मार दी। इस हादसे के कारण उसकी मौत हो गई।
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एलएनजेपी में हुए पोस्टमार्टम में भी रेल एक्सीडेंट के कारण मौत होने की बात सामने आई और आरपीएफ की जांच में भी। ऐसे में रेलवे याची परिवार को मुआवजा जारी करे। रेलवे की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि दामोदर लापरवाह था और उसे क्रॉसिंग पार करने से पहले उतर कर दोनों तरफ देखना चाहिए था।
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हाईकोर्ट ने  रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह रेलवे की जिम्मेदारी है कि वह मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग को फाटक वाली क्रॉसिंग में बदले। साथ ही यह भी कहा कि इस क्रॉसिंग पर कोई चेतावनी चिह्न नहीं था। यदि चेतावनी का चिह्न होता तो शायद दामोदर इसे पार नहीं करता।


ऐसे में रेलवे को पीड़ित परिवार को मुआवजा देना ही होगा। कोर्ट ने 4 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित करते हुए रेलवे को इसे दो माह के भीतर पीड़ित परिवार को जारी करने के आदेश दिए हैं।
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