आयोग व जस्टिस रणजीत सिंह पर टिप्पणी मामले में सुखबीर और मजीठिया को हाईकोर्ट का नोटिस
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बेअदबी मामले की जांच कर चुके रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह की शिकायत पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखबीर बादल और बिक्रम मजीठिया को नए सिरे से सीआरपीसी की धारा 204 के तहत नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। जस्टिस रणजीत सिंह ने उन पर उनके आयोग के खिलाफ पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल और पूर्व मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया द्वारा की गई टिप्पणी के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक शिकायत दायर की थी।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 20 फरवरी को दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सोमवार को सुनवाई के दौरान बताया गया कि सुखबीर बादल के सेक्टर-9 के आवास में नोटिस भेजा गया था लेकिन वहां रेनोवेशन का काम चल रहा था और कोई ऐसा मौजूद नहीं था जिसे नोटिस दिया जा सके। दूसरी ओर नोटिस सर्व किए जाने के समय बिक्रमजीत सिंह मजीठिया भी घर पर नहीं थे।
जस्टिस अमित रावल ने कहा कि दोनों को नोटिस सर्व करने की प्रक्रिया सही नहीं थी। हाईकोर्ट ने अब इस केस के नंबर के साथ अब नए सिरे से सुखबीर सिंह बादल को उनके स्थायी पते पंजाब एमएलए फ्लैट्स और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को भी नोटिस सर्व करवाए जाने के आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने दोनों को सीआरपीसी धारा-204 के तहत नोटिस जारी कर दिया है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे। उस आदेश को भी हाईकोर्ट ने वापस ले लिया है क्योंकि मजीठिया को गलत केस नंबर के साथ नोटिस सर्व किया गया था। जस्टिस रंजीत सिंह ने हाईकोर्ट को भेजी शिकायत में सुखबीर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा उन पर और उनकी लॉ की डिग्री पर की गई आपत्तियों और टिप्पणी का जिक्र किया है।
इसके अलावा आयोग और उनके खिलाफ विभिन्न समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर दिए गए इंटरव्यू का भी हवाला दिया है। अपनी शिकायत में जस्टिस रंजीत सिंह ने कहा है कि यह सीधे तौर पर कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट की धारा-10 ए का उल्लंघन है। ऐसे में इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई की हाईकोर्ट से मांग की गई है।