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बीच सुनवाई डीसी को हाईकोर्ट ने बुलाया, कहा- जब अवैध निर्माण हो रहे थे, तो क्या अफसर सो रहे थे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:51 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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एयरपोर्ट के 100 मीटर के दायरे में अवैध निर्माणों को लेकर अधिकारी आंखें बंद कर बैठे थे और जैसे ही कोर्ट ने संज्ञान लिया अचानक नींद टूटी और मनमाने तरीके से कार्रवाई शुरू कर दी गई। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जरूरी है लेकिन ऐसा करते हुए किसी के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को एयरपोर्ट के 100 मीटर दायरे में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए महज 6 घंटे का नोटिस देकर कार्रवाई करने पर अधिकारियों को फटकार लगाते हुए यह बात कही।
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हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बहलाना गांव के निवासियों ने बताया कि कोर्ट के आदेश में निर्माण गिराने से जुड़ा कुछ भी नहीं था लेकिन कोर्ट का सहारा लेते हुए निर्माण गिराने के नोटिस जारी कर दिए गए। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा रवैया अपनाते हुए डीसी को तलब कर लिया। डीसी ने कोर्ट में हाजिर होकर बताया कि यह नोटिस उन्होंने वर्क ऑफ डिफेंस एक्ट या पेरीफेरी एक्ट के तहत नहीं बल्कि अपनी शक्तियों का प्रयोग कर दिए थे, जिसे वापस लेने का फैसला ले लिया गया है।
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अब गलती में सुधार कर नए सिरे से नोटिस जारी किए जाएंगे और पर्याप्त मौका देने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाए लेकिन इसमें भी कानून का पालन जरूरी है। यदि अवैध निर्माण नहीं है तो एक इंच भूमि का निर्माण भी नहीं गिरना चाहिए। यदि कोर्ट के संज्ञान में आया कि ऐसा कुछ हुआ है तो इसके लिए दोषी अधिकारी को अपनी जेब से भुगतान करने के लिए तैयार रहना होगा।
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कोर्ट ने कहा कि जब निर्माण हो रहे थे तो प्रशासन और अधिकारी कहां थे। क्या तब आंखें मूंदे बैठे थे और कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद अचानक नींद टूट गई और याद आया कि कार्रवाई करनी है। कार्रवाई की ऐसी धुन लगी कि नियम कायदों को ताक पर रखकर किसी भी निर्माण को तोड़ने को तैयार हो गए और वह भी सिर्फ 6 घंटे का नोटिस देकर।
इस दौरान एमसी जीरकपुर ने बताया कि उन्होंने अभी तक 91 अवैध निर्माण गिराए हैं और ऐसे कुल 346 की पहचान की गई थी। अभी कुल 265 अवैध निर्माणों को गिराने के लिए नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के लिए समय दिए जाने की अपील की गई। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जो भी कार्य हो वह पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करके होनी चाहिए।